मुंबई, अंग भारत। अभिनेत्री अनन्या पांडे आजकल अपनी आने वाली फिल्म ‘चांद मेरा दिल’ के एक गाने को लेकर सोशल मीडिया की सुर्खियों में छाई हुई हैं। फिल्म के एक गाने में उनके द्वारा किए गए भरतनाट्यम प्रेरित डांस स्टेप्स पर इंटरनेट दो धड़ों में बंट गया है। जहां एक तरफ लोग उनकी मेहनत की तारीफ कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ यूजर्स ने उन्हें ‘नेपो नट्यम’ कहकर ट्रोल करना शुरू कर दिया है। इस पूरी घटना के बीच मशहूर लेखिका और स्तंभकार शोभा डे ने चुप्पी तोड़ी है और अनन्या पांडे का पुरजोर समर्थन करते हुए ट्रोलर्स को करारा जवाब दिया है। शोभा डे का मानना है कि किसी कलाकार को महज एक परफॉर्मेंस के आधार पर इस तरह नीचा दिखाना पूरी तरह से गलत और अनुचित है।
शोभा डे का कड़ा रुख
शोभा डे ने सोशल मीडिया पर अनन्या पांडे के खिलाफ चल रही नफरत और ट्रोलिंग को पूरी तरह से गैर-जरूरी बताया है। उनका कहना है कि आज के दौर में सोशल मीडिया पर किसी को भी निशाना बनाना बहुत आसान हो गया है। शोभा डे ने तार्किक बात रखते हुए कहा कि फिल्म के किसी भी सीन या डांस सीक्वेंस के लिए सिर्फ अभिनेता को दोष देना तार्किक नहीं है। किसी भी परफॉर्मेंस के पीछे एक पूरी टीम की मेहनत होती है, जिसमें निर्देशक, क्रिएटिव टीम और कोरियोग्राफर्स शामिल होते हैं। यदि कोई खामी दिखती है, तो जिम्मेदारी पूरी टीम की होती है, न कि केवल परदे पर दिखने वाले कलाकार की।
कलाकार की मेहनत का सम्मान
शोभा डे ने इस बात पर जोर दिया कि अनन्या पांडे कोई पेशेवर शास्त्रीय नृत्यांगना (क्लासिकल डांसर) नहीं हैं, इसके बावजूद उन्होंने एक जटिल डांस फॉर्म को स्क्रीन पर पेश करने की कोशिश की। उन्होंने आगे कहा:
- अनन्या ने न केवल डांस किया, बल्कि भाव-भंगिमाएं (expressions) और लिप-सिंक के बीच संतुलन बनाने की चुनौती भी बखूबी निभाई।
- कैमरे के सामने एक साथ कई चीजों को मैनेज करना कोई बच्चों का खेल नहीं है।
- कलाकारों को नए प्रयोग करने की आजादी मिलनी चाहिए, न कि उन्हें हर बार ट्रोलिंग का शिकार बनाना चाहिए।
कोरियोग्राफर का आया बचाव
केवल शोभा डे ही नहीं, बल्कि फिल्म ‘चांद मेरा दिल’ की असिस्टेंट कोरियोग्राफर अनन्या कुरूप ने भी अभिनेत्री का बचाव किया है। कोरियोग्राफर के अनुसार, अनन्या पांडे ने बहुत ही कम समय के भीतर इस कठिन रूटीन को सीखा। उन्होंने बताया कि शूटिंग के दौरान अनन्या का समर्पण देखने लायक था और उन्होंने लगातार घंटों अभ्यास किया था ताकि वे उन स्टेप्स को सही तरीके से स्क्रीन पर उतार सकें। तकनीकी रूप से फिल्म की टीम अभिनेत्री की मेहनत से पूरी तरह संतुष्ट है और उन्हें लगता है कि दर्शकों को भी उनके इस प्रयास की सराहना करनी चाहिए।
सोशल मीडिया की दोहरी मानसिकता
यह पूरा विवाद हमें एक बार फिर सोचने पर मजबूर करता है कि सोशल मीडिया की दुनिया कितनी क्रूर हो सकती है। किसी भी फिल्मी हस्ती के खिलाफ एक हैशटैग चलाना आजकल ट्रेंड बन गया है। बहस के कुछ प्रमुख बिंदु नीचे दिए गए हैं:
| पक्ष (Support) | विपक्ष (Critics) |
|---|---|
| अनन्या ने नई विधा सीखने का साहस दिखाया। | डांस स्टेप्स में शास्त्रीय शुद्धता की कमी है। |
| एक कलाकार को सुधार के लिए मौका मिलना चाहिए। | उन्हें पारंपरिक कला को हल्के में नहीं लेना चाहिए था। |
| सोशल मीडिया ट्रोलिंग बंद होनी चाहिए। | सेलिब्रिटी होने के नाते उन्हें आलोचना झेलनी होगी। |
क्यों जरूरी है सही दृष्टिकोण
आज के दौर में जब मनोरंजन उद्योग प्रयोगों की ओर बढ़ रहा है, तब इस तरह की नकारात्मकता कलाकारों का मनोबल तोड़ सकती है। अनन्या पांडे के मामले में शोभा डे का स्टैंड यह याद दिलाता है कि हमें एक समाज के रूप में कलाकारों की मंशा और उनकी मेहनत का सम्मान करना सीखना चाहिए। अनन्या ने भरतनाट्यम को एक कंटेम्परेरी अंदाज में पेश करने की कोशिश की थी, जिसे कटरपंथियों ने सीधे ‘अपमान’ से जोड़ दिया, जबकि फिल्म निर्माण एक रचनात्मक प्रक्रिया है। अंततः, कला को परखा जाना चाहिए, लेकिन ट्रोलिंग के जरिए किसी का करियर प्रभावित करना किसी भी दृष्टि से उचित नहीं है।








