धोरैया/बांका/अंग भारत। विश्व पर्यावरण दिवस के उपलक्ष्य में धोरैया प्रखंड में चलाए गए एक व्यापक पौधारोपण अभियान ने न केवल सरकारी परिसरों को हरा-भरा किया है, बल्कि आम नागरिकों को भी प्रकृति के संरक्षण के प्रति सजग रहने का संदेश दिया है। इस पहल के तहत प्रखंड मुख्यालय, स्थानीय थाना परिसर, और पंचायत सरकार भवनों में फलदार और छायादार पौधे रोपे गए, जिनका मुख्य उद्देश्य आने वाली पीढ़ियों के लिए एक स्वच्छ और सुरक्षित वातावरण तैयार करना है। अधिकारियों और स्थानीय प्रतिनिधियों ने मिलकर यह स्पष्ट किया कि पर्यावरण को बचाना अब महज एक विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्य जीवन शैली है।
पौधारोपण में अधिकारियों की भागीदारी
अभियान की शुरुआत में प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने सक्रिय भूमिका निभाई। प्रखंड मुख्यालय के प्रांगण में प्रखंड प्रमुख रंजू देवी, बीडीओ अरविंद कुमार, थाना अध्यक्ष अमित कुमार और बीपीआरओ अनुपम अनुराग ने संयुक्त रूप से पौधे लगाकर कार्यक्रम की शुरुआत की। इस दौरान जदयू नेता आलोक कुमार की उपस्थिति ने इसे एक सामाजिक उत्सव का रूप दिया। अधिकारियों का मानना है कि सरकारी संस्थानों में ऐसे आयोजन करने से आम जनता के बीच भी सकारात्मक संदेश जाता है और लोग अपने घरों के आसपास पेड़ लगाने के लिए प्रेरित होते हैं।
पर्यावरण सुरक्षा क्यों है जरूरी
बीडीओ अरविंद कुमार ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज जिस तरह जलवायु परिवर्तन का खतरा सिर पर मंडरा रहा है, उसे देखते हुए पर्यावरण संरक्षण अब मानवता के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता होनी चाहिए। बढ़ता प्रदूषण और प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध इस्तेमाल पृथ्वी का तापमान बढ़ा रहा है। उनके अनुसार:
- जलवायु परिवर्तन के चक्र को धीमा करने के लिए अधिक से अधिक पेड़ लगाना अनिवार्य है।
- प्राकृतिक आपदाओं जैसे बाढ़ और सूखा के प्रभावों को हरियाली से कम किया जा सकता है।
- भूमि कटाव रोकने में फलदार और छायादार वृक्षों की भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
संरक्षण का संकल्प सबसे अहम
पौधा रोपना काम का सिर्फ पहला हिस्सा है; असली जिम्मेदारी उसकी देखभाल करने में है। थाना अध्यक्ष अमित कुमार ने इस बात पर जोर दिया कि सिर्फ फोटो खिंचवाने के लिए पौधे न लगाएं, बल्कि जब तक वे खुद जीवित न हो जाएं, उनकी सुरक्षा करें। यदि लगाए गए पौधों में से 50 प्रतिशत भी पेड़ बन जाते हैं, तो यह समाज के लिए एक बड़ी उपलब्धि होगी। उन्होंने स्थानीय युवाओं से आग्रह किया कि वे पौधों को पानी देने और खाद डालने के छोटे-छोटे कार्यों में मदद करें।
पंचायत स्तर पर व्यापक प्रयास
धोरैया के विभिन्न पंचायतों में भी पौधारोपण को जन आंदोलन का स्वरूप दिया गया। पंचायत सरकार भवन में मुखिया आरती देवी की अगुवाई में सरपंच प्रमिला देवी, किसान सलाहकार रोशन कुमार और स्वच्छता पर्यवेक्षकों ने मिलकर हरियाली बढ़ाने का काम किया। इस तरह के जमीनी प्रयासों से ग्रामीण क्षेत्रों में पर्यावरण के प्रति एक अलग ही जागरूकता देखी जा रही है।
पर्यावरण संरक्षण के 3 प्रभावी उपाय
| उपाय | विवरण |
|---|---|
| नियमित देखभाल | पौधों को समय पर जल और उचित उर्वरक दें। |
| स्थानीय प्रजातियां | ऐसे पौधे चुनें जो स्थानीय जलवायु के अनुकूल हों। |
| जन सहयोग | परिवार और पड़ोसियों को भी इसमें शामिल करें। |
जनभागीदारी से आएगा बदलाव
अंत में, वक्ताओं ने इस बात पर जोर दिया कि पर्यावरण संरक्षण कोई सरकारी फाइल नहीं है जिसे एक दिन चलाकर बंद कर दिया जाए। यह एक सतत आंदोलन है। अगर धोरैया का हर नागरिक प्रति वर्ष अपने जन्मदिन या किसी विशेष अवसर पर एक पौधा लगाने और उसके बड़े होने तक उसकी जिम्मेदारी लेने का संकल्प ले, तो आने वाले कुछ वर्षों में इस पूरे इलाके की आबोहवा में बड़ा बदलाव आ सकता है। यही वह रास्ता है जिससे हम अपनी अगली पीढ़ी को कंक्रीट के जंगलों के बजाय हरी-भरी और ऑक्सीजन से भरपूर दुनिया सौंप पाएंगे।








