नई दिल्ली,अंग भारत। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का छह दिवसीय यूरोप दौरा भारत की कूटनीतिक सक्रियता का एक नया अध्याय है। शनिवार को शुरू हुई यह यात्रा फ्रांस और स्लोवाक गणराज्य के साथ द्विपक्षीय संबंधों को गहरा करने और G7 शिखर सम्मेलन में ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज को बुलंद करने पर केंद्रित है। 18 जून तक चलने वाली यह यात्रा न केवल रक्षा और तकनीक के पुराने सहयोग को नई दिशा देगी, बल्कि भारत की बदलती वैश्विक छवि को भी मजबूती प्रदान करेगी।
फ्रांस के साथ रणनीतिक साझेदारी
प्रधानमंत्री मोदी की यात्रा का पहला प्रमुख पड़ाव फ्रांस है। भारत और फ्रांस के बीच संबंध अब केवल खरीद-फरोख्त तक सीमित नहीं रहे, बल्कि ये ‘विशेष वैश्विक रणनीतिक साझेदारी’ में बदल चुके हैं। राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के निमंत्रण पर हो रही यह बैठक पिछली वार्ताओं में बनी सहमति की समीक्षा करने का मौका है। दोनों नेता रक्षा विनिर्माण, अंतरिक्ष तकनीक और असैन्य परमाणु ऊर्जा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में सहयोग को आगे बढ़ाने की रणनीति पर काम करेंगे। यह दौरा दोनों देशों के बीच भरोसे को और अधिक ठोस बनाने की कोशिश है।
‘भारत इनोवेट्स’ का महत्व
14 जून को प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति मैक्रों संयुक्त रूप से ‘भारत इनोवेट्स’ कार्यक्रम की शुरुआत करेंगे। यह केवल एक औपचारिक उद्घाटन नहीं, बल्कि भारतीय स्टार्टअप्स के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार का दरवाजा खोलने का प्रयास है।
- भारतीय नवाचारों को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित करना।
- निवेशकों और फ्रांसीसी कंपनियों के साथ सीधा संवाद।
- तकनीक हस्तांतरण और साझा शोध को बढ़ावा।
- स्टार्टअप इकोसिस्टम के लिए नए बाजार की तलाश।
स्लोवाकिया की ऐतिहासिक यात्रा
प्रधानमंत्री की स्लोवाकिया यात्रा इतिहास के पन्नों में दर्ज होने वाली है। 1993 में स्लोवाकिया के एक स्वतंत्र राष्ट्र बनने के बाद से यह किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली आधिकारिक यात्रा है। ब्रातिस्लावा में प्रधानमंत्री मोदी राष्ट्रपति पेलेग्रिनी और प्रधानमंत्री रॉबर्ट फिको के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे। इस यात्रा का मुख्य फोकस उद्योग जगत के साथ तालमेल बिठाना और यूरोपीय संघ के भीतर भारत की आर्थिक पकड़ मजबूत करना है।
व्यापार और आर्थिक सहयोग
स्लोवाकिया के साथ भारत मुक्त व्यापार समझौते (FTA) को लेकर काफी उत्सुक है। व्यापारिक विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यूरोप के इस केंद्र के साथ भारत के व्यापारिक संबंध सुधरते हैं, तो यह पूरे यूरोपीय संघ के साथ भविष्य के बड़े समझौतों के लिए एक आधार तैयार करेगा। ऊर्जा और रक्षा उत्पादन में स्लोवाकिया की विशेषज्ञता भारत के ‘मेक इन इंडिया’ अभियान के लिए काफी फायदेमंद साबित हो सकती है।
G7 में ग्लोबल साउथ की आवाज
फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित होने वाला G7 शिखर सम्मेलन भारत के लिए बेहद अहम है। यह लगातार आठवां मौका है जब भारत को इस प्रतिष्ठित समूह का हिस्सा बनने के लिए विशेष आमंत्रण मिला है। प्रधानमंत्री मोदी यहाँ विकासशील देशों, जिन्हें ‘ग्लोबल साउथ’ कहा जाता है, की चिंताओं को प्रमुखता से रखेंगे।
भारत का G7 में शामिल होना इस बात का प्रमाण है कि आज दुनिया की कोई भी बड़ी समस्या भारत की भागीदारी के बिना हल नहीं की जा सकती।
पेरिस में नवाचार और भारतीय समुदाय
यात्रा के अंतिम चरण में प्रधानमंत्री का पेरिस दौरा तकनीकी दिग्गजों और प्रवासी भारतीयों के लिए बड़ा आकर्षण होगा। ‘वीवा टेक 2026’ में भारत का नेशनल पवेलियन अब तक का सबसे विशाल पवेलियन है, जो भारत की तकनीकी ताकत को दुनिया के सामने रखेगा। पेरिस में रहने वाले भारतीय समुदाय के साथ प्रधानमंत्री का संवाद न केवल सांस्कृतिक जुड़ाव को बढ़ाएगा, बल्कि उन्हें भारत के विकास पथ में सीधे तौर पर भागीदार बनाने की दिशा में एक कदम भी होगा।
भविष्य की कूटनीतिक दिशा
यह छह दिवसीय दौरा महज औपचारिक मुलाकातों का सिलसिला नहीं है। यह भारत की उस कूटनीति को दर्शाता है, जिसमें रक्षा, तकनीक, व्यापार और मानवीय संबंधों को एक साथ पिरोया गया है। स्लोवाकिया में पहली बार कदम रखना हो या G7 में विकासशील देशों की पैरवी करना, प्रधानमंत्री मोदी का यह मिशन भारत को वैश्विक नेतृत्व की भूमिका में स्थापित करने के लिए एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।








