पूर्णिया,अंग भारत। बिहार के सीमांचल और कोसी क्षेत्र के लाखों हवाई यात्रियों का इंतजार अब खत्म होने वाला है। पूर्णिया एयरपोर्ट पर जल्द ही एक विशाल, दो मंजिला और आधुनिक सुविधाओं से लैस स्थायी सिविल एन्क्लेव बनने जा रहा है, जिससे यात्रियों को संभालने की क्षमता करीब तीन गुना बढ़ जाएगी। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (AAI) ने इस बड़ी बुनियादी ढांचा परियोजना के लिए 294 करोड़ रुपये का आधिकारिक टेंडर जारी कर दिया है। वर्तमान में इस हवाई अड्डे की क्षमता प्रति घंटे सिर्फ 360 यात्रियों को संभालने की है, जो इस नए टर्मिनल के तैयार होने के बाद सीधे 1,000 यात्री प्रति घंटे तक पहुंच जाएगी। इस बड़े बदलाव से न केवल पूर्णिया बल्कि कटिहार, अररिया, किशनगंज जैसे पड़ोसी जिलों के लोगों को भी दिल्ली, मुंबई और कोलकाता जैसे महानगरों के लिए सीधी उड़ानें मिलने का रास्ता साफ होगा।
टेंडर और समय सीमा
इस बड़ी योजना को जमीन पर उतारने के लिए प्रशासन और विमानपत्तन प्राधिकरण ने रफ्तार पकड़ ली है। टेंडर की प्रक्रिया को लेकर पूरा कार्यक्रम तय हो चुका है, जिससे काम में तेजी बनी रहे। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण ने 22 जुलाई को इस परियोजना की आधिकारिक निविदा जारी की थी। इसके ठीक अगले दिन यानी 23 जुलाई से कंपनियों के लिए अपनी बोली (बिड) लगाने का विकल्प खोल दिया गया है।
आवेदन जमा करने की अंतिम तिथि 7 सितंबर तय की गई है। इसके तुरंत बाद, 11 सितंबर को तकनीकी और वित्तीय बोलियों की समीक्षा की जाएगी। काम शुरू करने से पहले कंपनियों के संदेह दूर करने के लिए 30 जुलाई को नई दिल्ली में एक प्री-बिड बैठक भी बुलाई गई है। टेंडर मिलने के बाद जो भी एजेंसी चुनी जाएगी, उसे इस पूरे काम को 18 महीने के भीतर पूरा करना होगा।
नए टर्मिनल का ढांचा
पूर्णिया एयरपोर्ट के डायरेक्टर डीपी गुप्ता के मुताबिक, नया सिविल एन्क्लेव कुल 20,250 वर्ग मीटर के बड़े हिस्से में फैला होगा। यह दो मंजिला (जी प्लस वन) इमारत होगी, जिसे आज की जरूरतों को ध्यान में रखकर तैयार किया जा रहा है। भीड़भाड़ से बचने के लिए इसमें कई विशेष प्रबंध किए जा रहे हैं।
नए टर्मिनल की मुख्य खूबियों को हम इस तरह समझ सकते हैं:
- यात्रियों का नया रास्ता: भीड़ को नियंत्रित करने के लिए इस इमारत में आगमन और प्रस्थान के रास्ते अलग होंगे। हवाई जहाज से आने वाले लोग पहली मंजिल से बाहर निकलेंगे, जबकि प्रस्थान करने वाले यात्री नीचे के फ्लोर से प्रवेश करेंगे।
- सीधे विमान तक पहुंच: खराब मौसम, बारिश या तेज धूप से बचने के लिए एयरोब्रिज का निर्माण किया जाएगा। इसके जरिए यात्री बिना रनवे पर उतरे सीधे विमान में जा सकेंगे।
- जल्दी चेक-इन की सुविधा: टर्मिनल के भीतर कुल 16 चेक-इन काउंटर बनाए जाएंगे। इससे काउंटर पर लंबी कतारों से मुक्ति मिलेगी और यात्रियों का समय बचेगा।
- विमान पार्किंग व्यवस्था: नया सिविल एन्क्लेव सीधे एप्रन यानी विमान खड़े होने की जगह के पास होगा। इस एप्रन का निर्माण कार्य इसी साल अक्टूबर तक पूरा होने की उम्मीद है।
सुविधाओं में बड़ा बदलाव
नीचे दी गई तालिका से समझा जा सकता है कि नए टर्मिनल के बनने के बाद यात्रियों को किस तरह की सुविधाएं मिलेंगी:
| सुविधा या मानक | मौजूदा स्थिति | नए टर्मिनल के बाद |
|---|---|---|
| यात्री क्षमता (प्रति घंटा) | 360 यात्री | 1,000 यात्री |
| कुल क्षेत्रफल | सीमित क्षेत्र | 20,250 वर्ग मीटर (जी+1 मंजिल) |
| चेक-इन काउंटर्स | कम संख्या | 16 काउंटर |
| बोर्डिंग और सुरक्षा | पारंपरिक तरीका | एयरोब्रिज और नए सुरक्षा उपकरण |
सुरक्षा और जमीनी तैयारी
एक बड़े एयरपोर्ट को सुचारू रूप से चलाने के लिए केवल खूबसूरत बिल्डिंग ही काफी नहीं होती, बल्कि सुरक्षा मानकों का दुरुस्त होना भी जरूरी है। इसी को लेकर पूर्णिया के जिला पदाधिकारी अंशुल कुमार ने एक उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। चूंकि यह एयरपोर्ट सैन्य हवाई क्षेत्र का हिस्सा है, इसलिए नागरिक प्रशासन और भारतीय वायु सेना (IAF) के बीच बेहतर तालमेल पर जोर दिया गया।
बैठक में मुख्य रूप से इन बिंदुओं पर सहमति बनी और कार्ययोजना तैयार की गई:
- रनवे के आसपास उड़ने वाले पक्षियों से उड़ानों को कोई खतरा न हो, इसके लिए विशेष बर्ड चेज़र तैनात किए जाएंगे।
- किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एयरपोर्ट पर 24 घंटे चिकित्सा दल, आधुनिक एम्बुलेंस और दमकल की गाड़ियां तैयार रहेंगी।
- इस बैठक में वायु सेना पूर्णिया के प्रतिनिधि, जिला भू-अर्जन पदाधिकारी, सदर अनुमंडल पदाधिकारी, सिविल सर्जन और एयरपोर्ट के उपनिदेशक मौजूद रहे ताकि जमीनी बाधाओं को तुरंत दूर किया जा सके।
इलाके की आर्थिक तरक्की
पूर्णिया एयरपोर्ट पर हवाई सफर करने वालों का आंकड़ा तेजी से बढ़ रहा है। मौजूदा समय में यहां से हर रोज 10 उड़ानों का संचालन किया जा रहा है। आंकड़ों के अनुसार, पिछले सिर्फ 10 महीनों में ही लगभग 3 लाख लोगों ने इस हवाई अड्डे का उपयोग किया है। यह संख्या स्पष्ट करती है कि इस क्षेत्र के लोगों को हवाई सेवा की कितनी बड़ी जरूरत थी।
एयरपोर्ट डायरेक्टर डीपी गुप्ता ने संकेत दिया है कि 20,250 वर्ग मीटर का यह प्रोजेक्ट केवल पहला कदम है। भविष्य में मांग बढ़ने पर इस परिसर का और भी विस्तार किया जाएगा। जब यह सिविल एन्क्लेव बनकर पूरी तरह तैयार हो जाएगा, तो न केवल सफर आसान होगा बल्कि सीमांचल में व्यापार, स्वास्थ्य सेवाओं और उच्च शिक्षा के नए अवसर खुलेंगे। स्थानीय मक्का उत्पादकों, जूट व्यापारियों और सिल्क उद्योग को सीधे देश के बड़े बाजारों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।








