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भागलपुर में नाला निर्माण बना नई परेशानी, ऊंचाई बढ़ने से घरों में पानी घुसने का खतरा

करोड़ों की योजना पर उठने लगे सवाल

भागलपुर,अंग भारत। शहर को जलजमाव की समस्या से राहत दिलाने के उद्देश्य से नगर निगम द्वारा करोड़ों रुपये की लागत से विभिन्न वार्डों में नालों का निर्माण कराया जा रहा है। हालांकि निर्माण कार्य की गुणवत्ता और डिजाइन को लेकर अब स्थानीय लोगों ने गंभीर सवाल उठाने शुरू कर दिए हैं। कई इलाकों में नालों की ऊंचाई और निर्माण शैली लोगों के लिए नई परेशानी बनती दिखाई दे रही है।स्थानीय नागरिकों का कहना है कि जिन परियोजनाओं से जलनिकासी बेहतर होने की उम्मीद थी, वही अब भविष्य में जलजमाव और घरों में पानी घुसने का कारण बन सकती हैं।

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स्लैब निर्माण और जल निकासी व्यवस्था पर सवाल

शहर के कई वार्डों में नालों के ऊपर लंबे-लंबे स्लैब डाल दिए गए हैं। लोगों का आरोप है कि इन स्लैबों में पानी की निकासी के लिए पर्याप्त छेद या सुराख नहीं छोड़े गए हैं। विशेषज्ञों का भी मानना है कि यदि वर्षा का पानी आसानी से नाले तक नहीं पहुंच पाएगा तो सड़कों पर जलभराव की स्थिति और गंभीर हो सकती है।स्थानीय जानकारों का कहना है कि बड़े स्लैब के बीच पर्याप्त जल निकासी बिंदु होना आवश्यक है, ताकि बारिश के दौरान पानी का प्रवाह बाधित न हो।

आनंदबाग मोहल्ले में सबसे ज्यादा नाराजगी

वार्ड संख्या 34 के भीखनपुर स्थित आनंदबाग मोहल्ले में नाला निर्माण को लेकर लोगों में भारी असंतोष देखा जा रहा है। यहां रहने वाले लोगों का आरोप है कि सड़क के बीचों-बीच बनाए गए नाले ने उनकी रोजमर्रा की जिंदगी को प्रभावित कर दिया है।निवासियों का कहना है कि नाला सड़क की सतह से काफी ऊंचा बना दिया गया है, जिससे घरों के सामने दीवार जैसी स्थिति बन गई है। इससे लोगों को घर से बाहर निकलने और वाहनों के आवागमन में भी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।

बारिश में घरों में घुस सकता है पानी

स्थानीय लोगों की सबसे बड़ी चिंता यह है कि नाले की ऊंचाई अधिक होने के कारण घरों का पानी बाहर नहीं निकल पाएगा। उनका कहना है कि बारिश के दौरान नाले का पानी उल्टा घरों में प्रवेश कर सकता है।निवासियों के मुताबिक यदि भारी वर्षा हुई तो पूरा मोहल्ला टापू जैसा बन सकता है और कई घर जलमग्न हो सकते हैं। लोगों का आरोप है कि निर्माण शुरू होने के समय ही उन्होंने अपनी आपत्तियां दर्ज कराई थीं, लेकिन उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया।

इंजीनियरिंग निगरानी पर भी उठे सवाल

स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य की निगरानी को लेकर भी सवाल खड़े किए हैं। उनका आरोप है कि कार्यस्थल पर शायद ही कभी किसी इंजीनियर को देखा गया हो और अधिकांश काम मिस्त्रियों के भरोसे कराया गया।नागरिकों का कहना है कि वार्ड संख्या 8, 13, 22, 43 और 50 में भी कमोबेश इसी तरह की स्थिति देखने को मिल रही है। लोगों का सवाल है कि जब नालों की ऊंचाई इतनी अधिक है तो उनमें पानी का प्रवाह सुचारु रूप से कैसे होगा।

नगर निगम ने सुधार का दिया आश्वासन

मामले पर नगर निगम की योजना शाखा के अधिकारी मो. रेहान अहमद ने कहा कि भविष्य में नाले के एस्टीमेट में आवश्यक संशोधन किए जाएंगे। जहां स्लैब में पानी की निकासी के लिए पर्याप्त सुराख नहीं बनाए गए हैं, वहां सुधारात्मक कार्य कराया जाएगा।उन्होंने बताया कि आगामी परियोजनाओं में स्लैब को सुरक्षित और उपयोगी बनाने के लिए अतिरिक्त प्रावधान जोड़े जाएंगे।

मेयर ने कहा- बेहतर मॉडल अपनाने पर होगा विचार

भागलपुर की मेयर डॉ. वसुंधरा लाल ने कहा कि नालों के ढक्कन मजबूत होना जरूरी है, लेकिन साथ ही जल निकासी की व्यवस्था भी प्रभावी रहनी चाहिए। उन्होंने बताया कि नगर निगम अन्य राज्यों में सफल नाला निर्माण मॉडलों का अध्ययन करेगा और उनके आधार पर नया एवं बेहतर एस्टीमेट तैयार करने पर विचार किया जाएगा।उन्होंने भरोसा दिलाया कि नागरिकों की समस्याओं को ध्यान में रखते हुए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जाएंगे।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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