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मानसून के स्वागत में मना रज पर्व, संस्कृति और परंपरा से सराबोर हुआ ओडिशा

भुवनेश्वर,अंग भारत। ओडिशा में रविवार को पारंपरिक ‘पहिली रज’ के साथ बहुप्रतीक्षित रज पर्व की शुरुआत हो गई। आषाढ़ माह के आगमन और मानसून के स्वागत का प्रतीक यह पर्व राज्य की समृद्ध कृषि परंपरा, प्रकृति के प्रति श्रद्धा और सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण उत्सव माना जाता है। पर्व के शुभारंभ के साथ ही राज्यभर में उत्साह, उल्लास और पारंपरिक रंगत देखने को मिली।

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पहिली रज पर उत्सव में डूबा ओडिशा

रज पर्व के पहले दिन ‘पहिली रज’ को लेकर ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में विशेष उत्साह नजर आया। सुबह से ही लोग पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ पर्व मनाने में जुट गए। युवतियों, महिलाओं और बच्चों में इस पर्व को लेकर खास उत्सुकता देखने को मिली।राज्य के विभिन्न हिस्सों में सांस्कृतिक कार्यक्रमों, पारिवारिक आयोजनों और पारंपरिक खेलों का आयोजन किया गया। लोगों ने एक-दूसरे को पर्व की शुभकामनाएं देकर उत्सव की खुशियां साझा कीं।

पारंपरिक शृंगार और रीति-रिवाजों का अनूठा संगम

रज पर्व के अवसर पर युवतियां सुबह स्नान कर नए वस्त्र धारण करती हैं और विशेष पारंपरिक शृंगार करती हैं। पैरों में आलता और हाथों में मेहंदी लगाकर वे इस पर्व की सांस्कृतिक पहचान को जीवंत बनाए रखती हैं।पारंपरिक मान्यताओं के अनुसार यह पर्व माता धरती के प्रति सम्मान व्यक्त करने का अवसर भी माना जाता है। इसलिए इस दौरान कई स्थानों पर विशेष धार्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियां भी आयोजित की जाती हैं।

झूलों, लोकगीतों और खेलों की रही धूम

रज पर्व का सबसे आकर्षक हिस्सा ग्रामीण इलाकों में लगाए जाने वाले पारंपरिक झूले होते हैं। पेड़ों पर बांधे गए रंग-बिरंगे झूलों पर युवतियां झूला झूलते हुए लोकगीत गाती हैं और उत्सव का आनंद उठाती हैं।वहीं बच्चे और युवा भी विभिन्न पारंपरिक खेलों में भाग लेते हैं। ताश, लूडो और ओडिशा के लोकप्रिय पारंपरिक खेल ‘बगुड़ी’ सहित कई मनोरंजक गतिविधियों ने पर्व के माहौल को और भी जीवंत बना दिया।

पारंपरिक व्यंजनों से महका हर घर

रज पर्व की पहचान इसकी समृद्ध खाद्य परंपरा से भी जुड़ी हुई है। इस अवसर पर घरों में कई पारंपरिक व्यंजन तैयार किए जाते हैं। विशेष रूप से पोडा पीठा लोगों की पहली पसंद माना जाता है।इसके अलावा चकुली पीठा, मंडा पीठा और अरिसा पीठा जैसे स्वादिष्ट पारंपरिक पकवान भी बड़ी संख्या में बनाए जाते हैं। वहीं मीठे मसालों से तैयार विशेष ‘रज पान’ भी इस पर्व का महत्वपूर्ण हिस्सा होता है और लोगों के बीच काफी लोकप्रिय रहता है।

संस्कृति, प्रकृति और कृषि परंपरा का प्रतीक

रज पर्व केवल एक त्योहार नहीं, बल्कि ओडिशा की सांस्कृतिक पहचान का प्रतीक है। यह उत्सव प्रकृति के प्रति सम्मान, कृषि आधारित जीवनशैली और सामाजिक एकता का संदेश देता है।यह पर्व लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी है। साथ ही समाज में सामुदायिक सौहार्द, सांस्कृतिक जुड़ाव और पारिवारिक मूल्यों को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। पहिली रज के साथ शुरू हुआ यह उत्सव आने वाले दिनों में पूरे ओडिशा में पारंपरिक उल्लास और रंगत के साथ मनाया जाएगा।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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