भुवनेश्वर,अंग भारत। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने पारंपरिक गणपर्व ‘रज’ के अवसर पर देशवासियों को विशेषकर ओडिशा के लोगों को हार्दिक शुभकामनाएं दी हैं। उन्होंने अपने संदेश में इस पर्व को धरती, मातृत्व और प्रकृति के प्रति सम्मान का प्रतीक बताया और सभी नागरिकों के सुख, शांति एवं समृद्धि की कामना की।
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रज पर्व पर राष्ट्रपति का शुभ संदेश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने अपने संदेश में कहा कि वर्षा ऋतु के स्वागत का यह पारंपरिक उत्सव न केवल सांस्कृतिक महत्व रखता है, बल्कि यह प्रकृति के साथ सामंजस्यपूर्ण जीवन जीने की प्रेरणा भी देता है। उन्होंने कहा कि रज पर्व भारतीय परंपरा में धरती माता के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है।उन्होंने देशवासियों को इस पर्व की शुभकामनाएं देते हुए कहा कि यह उत्सव समाज को प्रकृति से जोड़ने के साथ-साथ सांस्कृतिक मूल्यों को भी सुदृढ़ करता है।
पिठा, पान और झूले की परंपरा का उल्लेख
अपने संदेश में राष्ट्रपति ने विशेष रूप से रज पर्व की पारंपरिक गतिविधियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि इस पर्व में पिठा, पान और झूले जैसी सांस्कृतिक परंपराएं लोगों को आपस में जोड़ने का कार्य करती हैं और सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देती हैं।उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन न केवल हमारी परंपराओं को जीवंत रखते हैं, बल्कि नई पीढ़ी को भी अपनी संस्कृति से जोड़ने का अवसर प्रदान करते हैं।
समाज को एकजुट करने वाला पर्व
राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि रज पर्व की विशेषताएं समाज को एकजुट करने और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने की प्रेरणा देती हैं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि इस पर्व के सांस्कृतिक और सामाजिक मूल्य नागरिकों को देश के विकास में सक्रिय भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करेंगे।उन्होंने कहा कि भारत की विविध सांस्कृतिक परंपराएं ही उसकी सबसे बड़ी शक्ति हैं और रज पर्व इसी सांस्कृतिक विरासत का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
सुख-समृद्धि और शांति की कामना
अंत में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने ओडिशा सहित पूरे देश के लोगों के लिए सुख, शांति और समृद्धि की कामना की। उन्होंने कहा कि ऐसे पर्व समाज में प्रेम, भाईचारे और सकारात्मकता का संदेश फैलाते हैं और राष्ट्र को आगे बढ़ाने में सहायक होते हैं।रज पर्व के अवसर पर राष्ट्रपति का यह संदेश पूरे देश में सांस्कृतिक एकता और सामाजिक सौहार्द को और मजबूत करने वाला माना जा रहा है।



































