बौंसी (बांका)/अंग भारत। अंतर्राष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर परमेश्वर लाल खेमका सरस्वती शिशु/विद्या मंदिर, बौंसी में शनिवार को एक भव्य योग कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें सैकड़ों विद्यार्थियों, अभिभावकों और स्थानीय नागरिकों ने सामूहिक योगाभ्यास कर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दिखाई। यह आयोजन केवल रस्म अदायगी नहीं था, बल्कि इसने स्पष्ट संदेश दिया कि कैसे आधुनिक जीवनशैली के बीच योग को अपनाकर हम बीमारियों को दूर रख सकते हैं और अपनी कार्यक्षमता बढ़ा सकते हैं।
दीप प्रज्वलन से शुरुआत
कार्यक्रम का औपचारिक शुभारंभ विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष राजीव कुमार सिंह, प्रधानाचार्य जीतेंद्र प्रसाद और पतंजलि योग के विशेषज्ञ विकास कुमार द्वारा संयुक्त रूप से दीप प्रज्वलित कर किया गया। भारत माता और महर्षि पतंजलि के चित्रों पर श्रद्धासुमन अर्पित करने के बाद वातावरण योगमय हो गया। मुख्य अतिथियों ने कहा कि योग केवल व्यायाम नहीं है, बल्कि यह एक जीवन जीने की कला है जो तनावपूर्ण जीवन में हमें सकारात्मक ऊर्जा से भर देती है।
योग में सबकी भागीदारी
इस आयोजन में समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी ने इसे एक जन आंदोलन जैसा बना दिया। आंकड़ों पर गौर करें तो इस सत्र में बड़ी संख्या में लोगों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया:
- विद्यार्थी: विद्यालय के सैकड़ों भैया-बहनों ने अनुशासन के साथ योगासन किए।
- शिक्षक: 22 आचार्यों ने विद्यार्थियों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अभ्यास किया।
- अभिभावक: 76 अभिभावकों की उपस्थिति यह दर्शाती है कि समाज अब स्वास्थ्य के प्रति जागरूक हो रहा है।
- पूर्व छात्र: 22 पूर्व छात्रों ने भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर विद्यालय से अपने जुड़ाव का परिचय दिया।
विशिष्ट योग अभ्यास
योग प्रशिक्षक विकास कुमार ने उपस्थित जनसमूह को योग के विभिन्न आयामों से रूबरू कराया। उन्होंने न केवल आसन करवाए, बल्कि सांसों के विज्ञान पर भी जोर दिया। मुख्य अभ्यास सत्र में शामिल थे:
| प्राणायाम | योगासन |
|---|---|
| भस्त्रिका | ताड़ासन |
| कपालभाति | वज्रासन |
| अनुलोम-विलोम | शशकासन |
| भ्रामरी | मंडूकासन |
इन क्रियाओं के अलावा सूर्य नमस्कार का भी अभ्यास कराया गया, जो शरीर के हर अंग के लिए सबसे पूर्ण व्यायाम माना जाता है।
योग का जीवन प्रभाव
योग की महत्ता पर चर्चा करते हुए विकास कुमार ने समझाया कि योग हमारे अंतर्मन को शांति प्रदान करता है। आज के दौर में जब हर तरफ प्रतिस्पर्धा है, तब योग हमें स्थिरता देता है। जो व्यक्ति नियमित रूप से प्राणायाम करता है, उसकी एकाग्रता शक्ति में अद्भुत वृद्धि होती है। उन्होंने विद्यार्थियों से कहा कि यदि वे रोजाना केवल 20 मिनट भी योग को दें, तो उनकी शैक्षणिक प्रदर्शन में सुधार होना निश्चित है।
योग का संकल्प
कार्यक्रम के समापन पर सुमन प्रसाद सिन्हा ने उपस्थित सभी लोगों को नियमित योगाभ्यास करने का संकल्प दिलाया। योग हमारी प्राचीन भारतीय विरासत है, जिसे पूरी दुनिया ने अपनाया है। यह हम भारतीयों की जिम्मेदारी है कि हम इसे अपनी दिनचर्या में शामिल करें। विद्यालय प्रबंधन ने आश्वासन दिया है कि भविष्य में भी ऐसे स्वास्थ्यवर्धक कार्यक्रम आयोजित किए जाते रहेंगे ताकि बौंसी का पूरा समाज निरोगी और सक्रिय बना रहे।
योग धर्म नहीं, विज्ञान है। यह आत्मा और शरीर के मिलन का एक मार्ग है, जो मनुष्य को बेहतर इंसान बनाता है।
विद्यालय के इस आयोजन ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही दिशा और उचित मार्गदर्शन मिले, तो ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों में भी स्वास्थ्य क्रांति लाई जा सकती है। बच्चों ने जो उत्साह इस दिन दिखाया, वह उनके उज्ज्वल भविष्य का संकेत है।








