सुपौल,अंग भारत। नेपाल के जलग्रहण क्षेत्रों में पिछले कई दिनों से हो रही लगातार बारिश का असर अब कोसी नदी पर साफ नजर आने लगा है। मंगलवार को कोसी बराज पर जलप्रवाह में अचानक तेजी देखी गई, जिसने प्रशासन और जल संसाधन विभाग की चिंता बढ़ा दी है। महज दो घंटे के भीतर नदी के डिस्चार्ज में करीब सात हजार क्यूसेक की उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई, जिसके बाद विभाग ने सतर्कता और कड़ी कर दी है।
कोसी बराज स्थित कंट्रोल रूम से जारी आंकड़ों पर गौर करें तो मंगलवार सुबह 10 बजे बराज से कुल 91,945 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा था। यह आंकड़ा दोपहर 12 बजते-बजते बढ़कर 98,900 क्यूसेक तक जा पहुंचा। इसका सीधा मतलब है कि सिर्फ दो घंटे के भीतर जलप्रवाह में 6,955 क्यूसेक की वृद्धि हो गई, जो किसी भी सामान्य दिन के लिहाज से तेज बढ़ोतरी मानी जा रही है।
गौरतलब है कि फिलहाल पूर्वी कोसी मुख्य नहर (ईकेएमसी) और पश्चिमी कोसी मुख्य नहर (डब्ल्यूकेएमसी) में पानी का प्रवाह पूरी तरह शून्य बना हुआ है। ऐसे में बराज से छोड़ा जा रहा समूचा पानी सीधे डाउन स्ट्रीम की दिशा में बहाया जा रहा है, जिससे निचले इलाकों पर दबाव बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
पिछले साल के आंकड़ों से तुलना करें तो इस बार भी कोसी का जलस्तर ऊंचा बना हुआ है। पिछले वर्ष यानी 30 जून 2025 को सुबह 10 बजे कोसी बराज पर 80 हजार क्यूसेक और दोपहर 12 बजे 83,125 क्यूसेक पानी का डिस्चार्ज दर्ज हुआ था। इस लिहाज से इस साल समान समय पर जलप्रवाह क्रमशः करीब 12 हजार और 16 हजार क्यूसेक अधिक रहा, जो साफ संकेत देता है कि इस मानसून सीजन में नेपाल में बारिश की तीव्रता पिछले साल के मुकाबले ज्यादा है।
राहत की बात यह है कि वर्तमान डिस्चार्ज अब भी खतरे के स्तर से नीचे बना हुआ है। बावजूद इसके, नेपाल में भारी बारिश की चेतावनी जारी होने के मद्देनजर जल संसाधन विभाग पल-पल की स्थिति पर नजर बनाए हुए है। कोसी नदी के जलस्तर में हो रही इस बढ़ोतरी ने सीमांचल और कोसी क्षेत्र के निचले व तटवर्ती इलाकों में रहने वाले लोगों की धड़कनें भी बढ़ा दी हैं। प्रशासन ने नदी किनारे बसे लोगों से सतर्क रहने और प्रशासन की आधिकारिक सूचनाओं पर लगातार नजर रखने की अपील की है।
जल विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा करीब 99 हजार क्यूसेक का डिस्चार्ज तत्काल बाढ़ जैसे हालात पैदा करने की स्थिति में नहीं है। फिर भी अगर नेपाल में बारिश का यही सिलसिला आगे भी जारी रहा और जलप्रवाह में और इजाफा हुआ, तो सुपौल, सहरसा, मधेपुरा, अररिया और खगड़िया जिलों के निचले व तटवर्ती क्षेत्रों में नदी का जलस्तर और बढ़ सकता है। इससे कटाव प्रभावित इलाकों में दबाव बढ़ने, दियारा क्षेत्रों में पानी फैलने और निचले इलाकों में जलजमाव जैसी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं।
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि कोसी नदी के जलस्तर पर चौबीसों घंटे नजर रखी जा रही है। नदी किनारे और तटबंध के भीतर रहने वाले लोगों को एक बार फिर सतर्क रहने तथा जल संसाधन विभाग व जिला प्रशासन की ओर से जारी होने वाली हर आधिकारिक सूचना पर ध्यान देने की सलाह दी गई है।










