सुपौल,अंग भारत। नेपाल के ऊपरी जलग्रहण क्षेत्रों में मूसलाधार बारिश ने कोसी नदी के रौद्र रूप को एक बार फिर चर्चा में ला दिया है। कोसी बराज पर जलप्रवाह में महज दो घंटों के भीतर 7,000 क्यूसेक का उछाल दर्ज किया गया है, जिसने सुपौल से लेकर खगड़िया तक के तटवर्ती इलाकों में प्रशासनिक हलचल बढ़ा दी है। फिलहाल नदी खतरे के निशान से नीचे है, लेकिन डिस्चार्ज की रफ्तार और नेपाल में जारी बारिश का पैटर्न आने वाले दिनों के लिए एक चेतावनी की घंटी है।
बराज पर बढ़ा दबाव
मंगलवार को कोसी बराज कंट्रोल रूम से मिले आंकड़ों ने स्थिति की गंभीरता को उजागर किया है। सुबह 10 बजे तक जो डिस्चार्ज 91,945 क्यूसेक था, वह दोपहर 12 बजे तक 98,900 क्यूसेक के स्तर को पार कर गया। जल संसाधन विभाग के अनुसार, पूर्वी कोसी मुख्य नहर (ईकेएमसी) और पश्चिमी कोसी मुख्य नहर (डब्ल्यूकेएमसी) में फिलहाल पानी का डिस्चार्ज पूरी तरह बंद है। इसका मतलब साफ है कि सारा पानी सीधे डाउनस्ट्रीम की तरफ छोड़ा जा रहा है, जिससे निचले इलाकों में नदी के वेग का दबाव सीधा बढ़ रहा है।
पिछले साल से तुलना
डेटा पर नजर डालें तो इस साल का मानसून पिछले वर्ष की तुलना में अधिक आक्रामक दिख रहा है। आइए पिछले वर्ष के आंकड़ों के साथ इसकी तुलना करें:
| समय | 30 जून 2024 डिस्चार्ज | मौजूदा स्थिति |
|---|---|---|
| सुबह 10 बजे | 80,000 क्यूसेक | 91,945 क्यूसेक |
| दोपहर 12 बजे | 83,125 क्यूसेक | 98,900 क्यूसेक |
साफ है कि पिछले वर्ष की तुलना में इस बार जलप्रवाह में 12 से 16 हजार क्यूसेक की अधिकता दर्ज की गई है। यह बढ़ोत्तरी बताती है कि नेपाल के पहाड़ी क्षेत्रों में इस बार मानसून का प्रभाव अधिक है।
इन जिलों पर खतरा
विशेषज्ञों का कहना है कि हालांकि 99 हजार क्यूसेक का डिस्चार्ज अभी नियंत्रण में है, लेकिन अगर यही रफ्तार बरकरार रही, तो कोसी अंचल के इन जिलों को सचेत रहने की जरूरत है:
- सुपौल और सहरसा: बराज के सबसे करीब होने के कारण तटबंधों पर पानी का दबाव बढ़ सकता है।
- मधेपुरा और अररिया: निचले इलाकों में जलजमाव की स्थिति पैदा हो सकती है।
- खगड़िया: नदी का बढ़ता डिस्चार्ज दियारा क्षेत्रों में कटाव को तेज कर सकता है।
प्रशासनिक सतर्कता जरूरी
प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि फिलहाल पैनिक होने की जरूरत नहीं है, लेकिन सावधानी बरतना हर हाल में जरूरी है। कोसी नदी अपनी धारा बदलने के लिए जानी जाती है, इसलिए तटबंधों की निगरानी 24 घंटे की जा रही है। अभियंताओं को संवेदनशील स्थानों पर गश्ती बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं।
आम लोगों के लिए सुझाव
जो लोग तटबंध के अंदर या नदी के निचले इलाकों में खेती करते हैं या बसते हैं, उन्हें स्थानीय प्रशासन की सूचनाओं का बेसब्री से इंतज़ार करने के बजाय, खुद सतर्क रहना चाहिए। अफवाहों पर ध्यान न दें और केवल आधिकारिक घोषणाओं को ही आधार मानें।
कटाव की आशंका
पानी का बहाव तेज होने पर सबसे बड़ी समस्या कटाव की आती है। जब नदी का डिस्चार्ज अचानक बढ़ता है, तो तटबंधों के कमजोर बिंदुओं पर मिट्टी का कटान तेज हो जाता है। जल संसाधन विभाग ने उन सभी पॉइंट की पहचान की है जहाँ पिछले वर्षों में कटाव की समस्या देखी गई थी। वर्तमान में विभाग वहां पत्थर और बालू भरी बोरियों का स्टॉक तैयार रख रहा है ताकि किसी भी आपातकालीन स्थिति का सामना तुरंत किया जा सके।
अंत में, मानसून का यह दौर अभी लंबा चलने वाला है। नेपाल में हो रही लगातार बारिश के कारण कोसी का जलस्तर कब बढ़ जाए, यह कहना मुश्किल है। इसलिए, स्थानीय निवासियों को अपनी दैनिक गतिविधियों में सतर्कता बरतते हुए नदी के मिजाज पर नजर रखनी होगी। प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर है और हर दो घंटे के डिस्चार्ज डेटा का विश्लेषण किया जा रहा है।








