सीसीटीवी, तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर जांच को बताया मजबूत, मीडिया से तथ्यपरक रिपोर्टिंग की अपील
भागलपुर,अंग भारत। बजरंग कुमार हत्याकांड को लेकर कुछ मीडिया रिपोर्ट्स में उठाए गए सवालों पर भागलपुर पुलिस ने कड़ा रुख अपनाते हुए शनिवार को स्पष्टीकरण जारी किया है। एसएसपी कार्यालय की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि सोशल मीडिया और कुछ समाचार माध्यमों में ऐसी भ्रामक खबरें प्रसारित की जा रही हैं, जिनमें अभियुक्त सीमा कुमारी की शारीरिक बनावट के आधार पर पुलिस जांच पर सवाल उठाए गए हैं। पुलिस ने इन दावों को पूरी तरह निराधार बताया है।पुलिस का कहना है कि इस तरह की रिपोर्टिंग से न केवल जांच प्रक्रिया पर अनावश्यक संदेह पैदा होता है, बल्कि आम जनता के बीच भ्रम की स्थिति भी बनती है।
12 घंटे के भीतर हुआ था मामले का खुलासा
भागलपुर पुलिस ने स्पष्ट किया है कि बजरंग कुमार हत्याकांड का उद्भेदन महज 12 घंटे के भीतर कर लिया गया था। यह जांच किसी अनुमान या धारणा पर नहीं, बल्कि ठोस साक्ष्यों के आधार पर की गई है।पुलिस के अनुसार, मामले की जांच में सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्य, वैज्ञानिक विश्लेषण और अन्य विधिसम्मत सबूतों का सहारा लिया गया, जिनके आधार पर अभियुक्त की भूमिका स्पष्ट हुई।
सीसीटीवी फुटेज से मिले अहम संकेत
प्रेस विज्ञप्ति में बताया गया है कि घटनास्थल से प्राप्त सीसीटीवी फुटेज में यह स्पष्ट रूप से देखा गया कि घटना से पहले और बाद के लगभग 24 घंटे की अवधि में संबंधित कार्यालय में केवल अभियुक्त सीमा कुमारी का ही प्रवेश और निकास दर्ज हुआ।इसके अलावा फुटेज में यह भी दिखा कि अभियुक्त कार्यालय में ताला लगाकर बाहर जाती हुई नजर आई। पुलिस का कहना है कि ये महत्वपूर्ण साक्ष्य जांच में निर्णायक साबित हुए हैं।
तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों से पुष्टि
पुलिस ने यह भी कहा कि जांच के दौरान अन्य तकनीकी और वैज्ञानिक साक्ष्यों ने भी अभियुक्त की संलिप्तता की पुष्टि की है। इन सबूतों के आधार पर ही पूरी जांच प्रक्रिया को आगे बढ़ाया गया और निष्कर्ष तक पहुंचा गया।अधिकारियों ने यह साफ किया कि किसी भी अपराध की जांच में किसी व्यक्ति की शारीरिक बनावट या कद-काठी को आधार नहीं बनाया जाता, बल्कि पूरा निर्णय उपलब्ध साक्ष्यों और वैज्ञानिक तथ्यों के आधार पर होता है।
अटकलों पर आधारित रिपोर्टिंग से बचने की अपील
भागलपुर पुलिस ने मीडिया संस्थानों और पत्रकारों से अपील की है कि हत्या जैसे संवेदनशील मामलों में केवल सत्यापित और तथ्यपरक जानकारी ही प्रकाशित की जाए। पुलिस का कहना है कि अपुष्ट खबरें और व्यक्तिगत अटकलें जनता के बीच भ्रम पैदा कर सकती हैं और जांच की निष्पक्षता को भी प्रभावित कर सकती हैं।पुलिस ने यह भी दोहराया कि समय-समय पर प्रेस विज्ञप्तियों और वरिष्ठ अधिकारियों की प्रेस वार्ताओं के माध्यम से सभी आवश्यक जानकारी साझा की जाती है, ताकि किसी प्रकार की गलतफहमी न रहे।
पारदर्शी जांच पर जोर
एसएसपी कार्यालय ने कहा कि भागलपुर पुलिस हर गंभीर मामले में पारदर्शिता और कानूनी प्रक्रिया का पालन करते हुए जांच करती है। ऐसे में बिना तथ्यों की पुष्टि किए किसी भी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं है।पुलिस ने अंत में कहा कि जनहित और कानून-व्यवस्था की दृष्टि से जिम्मेदार पत्रकारिता बेहद जरूरी है, ताकि समाज में किसी तरह का भ्रम या अविश्वास न फैले और जांच प्रक्रिया सुचारू रूप से आगे बढ़ सके।











