भागलपुर, अंग भारत। भागलपुर में कोरोना का एक नया संदिग्ध मामला सामने आने से स्थानीय स्वास्थ्य महकमे में हलचल तेज हो गई है; यहाँ एक बुजुर्ग मरीज की निजी लैब की आरटी-पीसीआर रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद उन्हें जवाहरलाल नेहरू चिकित्सा महाविद्यालय अस्पताल (मायागंज अस्पताल) के आईसीयू में भर्ती कराया गया है। हालांकि, स्वास्थ्य विभाग ने साफ किया है कि यह केवल एक शुरुआती रिपोर्ट है और आधिकारिक पुष्टि के लिए सरकारी लैब की जांच रिपोर्ट का इंतजार किया जा रहा है, इसलिए लोगों को घबराने के बजाय सिर्फ सतर्क रहने की जरूरत है।
कैसे बिगड़ी मरीज की तबीयत
पीड़ित बुजुर्ग पिछले करीब एक हफ्ते से लगातार तेज बुखार, सूखी खांसी और बदन दर्द से परेशान थे। उन्होंने पहले शहर के ही एक निजी डॉक्टर से परामर्श लिया और दवाइयां शुरू कीं। जब तीन-चार दिनों तक उनकी सेहत में कोई सुधार नहीं हुआ और सांस लेने में हल्की तकलीफ होने लगी, तो डॉक्टरों को शक हुआ। इसके बाद उन्हें कोविड-19 की आरटी-पीसीआर जांच कराने की सलाह दी गई। निजी पैथोलॉजी लैब से आई जांच रिपोर्ट में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद बिना देरी किए मरीज को मायागंज अस्पताल के विशेष वार्ड में शिफ्ट कर दिया गया।
सरकारी पुष्टि का इंतजार
इस पूरे मामले पर मायागंज अस्पताल के मेडिसिन विभाग के अध्यक्ष डॉ. राजकमल चौधरी ने स्थिति स्पष्ट की है। उनका कहना है कि निजी लैब की रिपोर्ट को हम शुरुआती संकेत मान सकते हैं, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के नियमों के अनुसार जब तक सरकारी आरटी-पीसीआर जांच में इसकी पुष्टि नहीं होती, तब तक इसे आधिकारिक तौर पर कोरोना का सक्रिय मामला नहीं माना जाएगा। सरकारी स्तर पर मरीज के सैंपल दोबारा जांच के लिए भेजे गए हैं, जिसकी रिपोर्ट जल्द ही आने की उम्मीद है। तब तक मरीज को पूरी तरह आइसोलेशन में रखकर कोविड प्रोटोकॉल के तहत इलाज दिया जा रहा है।
अस्पताल की जमीनी तैयारी
मायागंज अस्पताल प्रशासन का दावा है कि वे किसी भी तरह की स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार हैं। अस्पताल के आईसीयू में वेंटिलेटर, ऑक्सीजन सपोर्ट और जरूरी दवाइयों का स्टॉक दुरुस्त कर लिया गया है। डॉक्टरों की एक विशेष टीम चौबीसों घंटे मरीज की सेहत की निगरानी कर रही है। परिजनों के अनुसार, अस्पताल में भर्ती होने के बाद मरीज की हालत स्थिर है और उन्हें सांस लेने में पहले से कम दिक्कत हो रही है।
मौसम या कोरोना का असर
इस समय बिहार और खासकर भागलपुर के मौसम में तेजी से उतार-चढ़ाव आ रहा है। दिन में धूप और रात में हल्की ठंड के कारण लोगों में वायरल फीवर, सर्दी-जुकाम और सांस की बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक, हर सर्दी-खांसी कोरोना नहीं होती, लेकिन इस समय लापरवाही बरतना भारी पड़ सकता है। नीचे दिए गए चार्ट से आप सामान्य फ्लू और कोरोना के लक्षणों में अंतर समझ सकते हैं:
| लक्षण (Symptoms) | सामान्य वायरल फ्लू | कोविड-19 संक्रमण |
|---|---|---|
| बुखार की अवधि | 2 से 3 दिन | 5 दिन या उससे अधिक |
| सांस फूलना | बहुत कम मामलों में | मध्यम से गंभीर मामलों में |
| स्वाद और गंध जाना | नहीं के बराबर | अक्सर देखा जाता है |
| गले में खराश | शुरुआती दिनों में | लगातार बनी रहती है |
बचाव के व्यावहारिक तरीके
कोरोना वायरस के नए वेरिएंट्स से बचने के लिए पैनिक होने के बजाय अपनी दैनिक दिनचर्या में कुछ छोटे बदलाव करना सबसे बेहतर उपाय है। डॉक्टरों ने आम जनता के लिए कुछ बुनियादी दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका पालन कर आप खुद को और अपने परिवार को सुरक्षित रख सकते हैं:
- भीड़भाड़ से बचें: बाजार या सार्वजनिक वाहनों में जाते समय चेहरे पर मास्क का उपयोग जरूर करें, खासकर बुजुर्ग और बच्चे।
- हाथों की सफाई: बाहर से घर लौटने पर कम से कम 20 सेकंड तक साबुन से हाथ धोएं या सैनिटाइजर का प्रयोग करें।
- दूरी बनाए रखें: यदि आपके आसपास किसी को लगातार खांसी या छींक आ रही है, तो उनसे कम से कम दो गज की दूरी बनाकर रखें।
- खुद से दवा न लें: बुखार या सर्दी होने पर खुद डॉक्टर न बनें। बिना चिकित्सकीय सलाह के एंटीबायोटिक दवाएं लेने से बचें।
घबराएं नहीं सजग रहें
भागलपुर के सिविल सर्जन कार्यालय ने भी इस मामले पर नजर बना रखी है। स्वास्थ्य विभाग का कहना है कि जिले में दवाइयों और ऑक्सीजन की कोई कमी नहीं है। लोगों को सोशल मीडिया पर फैलने वाली अफवाहों पर ध्यान नहीं देना चाहिए। यदि आपको या आपके परिवार में किसी को तीन दिन से ज्यादा समय तक तेज बुखार रहता है, तो तुरंत अपने नजदीकी सरकारी अस्पताल में जाकर जांच करवाएं। सही समय पर पहचान और इलाज ही इस वायरस को फैलने से रोकने का एकमात्र जरिया है।








