नई दिल्ली, 24 जुलाई (हि.स.)। प्रसिद्ध पर्यावरणविद् और सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने सरकार और विभिन्न राजनीतिक दलों के 65 सांसदों से लिखित आश्वासन मिलने के बाद 26 दिनों से जारी अपना आमरण अनशन समाप्त कर दिया है। नीट (NEET) परीक्षा में धांधली, पेपर लीक और देश की परीक्षा व्यवस्था में सुधार की मांग को लेकर जंतर-मंतर पर शुरू हुआ यह आंदोलन अब एक बेहद महत्वपूर्ण मोड़ पर पहुंच गया है। सरकार ने लिखित रूप में आश्वासन दिया है कि संसद के भीतर परीक्षा प्रणाली में सुधार और जवाबदेही तय करने पर विस्तृत चर्चा कराई जाएगी। इसके साथ ही, नीट प्रश्नपत्र लीक के तनाव के चलते आत्महत्या करने वाले पीड़ित छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने और शांतिपूर्वक विरोध प्रदर्शन करने वाले किसी भी छात्र के खिलाफ पुलिस मुकदमा दर्ज न करने की बात भी मान ली गई है।
26 दिनों का अनशन समाप्त
सोनम वांगचुक का यह संघर्ष बेहद कठिन था। उन्होंने नीट परीक्षा विवाद को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) के जंतर-मंतर पर चल रहे आंदोलन को अपना समर्थन दिया और 28 जून से आमरण अनशन पर बैठ गए थे। अनशन के दौरान लगातार गिरते स्वास्थ्य के कारण उनकी स्थिति काफी नाजुक हो गई थी। बिगड़ते स्वास्थ्य को देखते हुए पहले उन्हें सफदरजंग अस्पताल ले जाया गया, लेकिन हालत गंभीर होने पर दिल्ली उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद उन्हें गुरुग्राम के मेदांता अस्पताल में भर्ती कराया गया। आखिरकार, अस्पताल के बिस्तर से ही सरकार के साथ बातचीत का रास्ता साफ हुआ।
लिखित आश्वासन की शर्तें
सोनम वांगचुक अपनी इस मांग पर अड़े हुए थे कि वे केवल मौखिक वादों के आधार पर अपना अनशन वापस नहीं लेंगे। उनका मानना था कि जब तक चीजें कागजों पर दर्ज नहीं होंगी, तब तक छात्रों के हितों की रक्षा नहीं की जा सकती। इसी वजह से उन्हें दो अतिरिक्त दिनों तक अनशन पर बैठे रहना पड़ा। सरकार द्वारा भेजे गए लिखित आश्वासन पत्र में मुख्य रूप से तीन बड़ी बातें शामिल थीं:
- मुकदमों से राहत: नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने वाले छात्रों और युवाओं के साथ-साथ 20 जुलाई के संसद मार्च में शामिल प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस कोई भी आपराधिक मामला या एफआईआर दर्ज नहीं करेगी।
- संसद में खुली चर्चा: परीक्षा प्रणाली की कमियों को दूर करने और प्रश्नपत्र लीक रोकने के उपायों पर संसद के पटल पर विस्तृत बहस कराई जाएगी।
- पीड़ितों को आर्थिक मदद: हाल ही में नीट पेपर लीक से आहत होकर जिन छात्रों ने आत्महत्या की है, उनके परिवारों को सरकार उचित मुआवजा देने पर सकारात्मक रूप से विचार करेगी।
छात्रों पर मुकदमे नहीं
सोनम वांगचुक ने अपने इस आंदोलन की सबसे बड़ी सफलता छात्रों को कानूनी झंझटों से बचाने को बताया है। उन्होंने अपने पुराने अनुभवों को साझा करते हुए कहा कि लद्दाख में उन्होंने बहुत करीब से देखा है कि किस तरह एक बार पुलिस केस दर्ज होने के बाद युवाओं का पूरा भविष्य तबाह हो जाता है। कोर्ट-कचहरी के चक्कर में उनकी पढ़ाई और सरकारी नौकरी के अवसर हमेशा के लिए खत्म हो जाते हैं। इसलिए, यह सुनिश्चित करना बेहद जरूरी था कि अपने हक की आवाज उठाने वाले किसी भी निर्दोष छात्र पर कोई मुकदमा दर्ज न हो।
शिक्षा मंत्री का इस्तीफा
आंदोलनकारियों की एक बड़ी मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की भी थी। हालांकि, सरकार की ओर से इस विषय पर कोई लिखित आश्वासन नहीं दिया गया। इस पर बात करते हुए वांगचुक ने स्पष्ट किया कि उनके सामने दो विकल्प थे। या तो वे इस एक मांग के लिए अपनी जान दांव पर लगाकर अनशन जारी रखते, या फिर उन व्यावहारिक मांगों को स्वीकार करते जिनका सीधा संबंध छात्रों की सुरक्षा और उनके भविष्य से था। उन्होंने कहा कि यदि सरकार शिक्षा मंत्री के इस्तीफे पर समय रहते फैसला नहीं करती है, तो इसका राजनीतिक नुकसान खुद सरकार को उठाना पड़ेगा, छात्रों का इससे कोई अहित नहीं होगा।
अस्पताल से सरकार तक
गुरुवार देर रात को केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और डॉ. जितेंद्र सिंह स्वयं मेदांता अस्पताल पहुंचे। उन्होंने सोनम वांगचुक से मुलाकात की और सरकार की ओर से तैयार किया गया आधिकारिक आश्वासन पत्र उन्हें पढ़कर सुनाया। इसके बाद मंत्रियों ने वांगचुक को तरल पदार्थ पिलाकर उनका 26 दिनों से जारी अनशन तुड़वाया। इस दौरान विभिन्न राजनीतिक दलों के करीब 65 सांसदों ने भी वांगचुक को अपना समर्थन पत्र भेजा, जिसमें उन्होंने संसद के भीतर देश की परीक्षा प्रणाली में सुधार के मुद्दे को पूरी ताकत से उठाने का संकल्प व्यक्त किया।
“भूख का अंत हुआ है, लेकिन देश की शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही तय करने की हमारी भूख अभी समाप्त नहीं हुई है। यह संघर्ष आगे भी जारी रहेगा।” – सोनम वांगचुक
भविष्य की नई राहें
अनशन समाप्त करने के बाद सोनम वांगचुक ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा, “भूख का अंत… जवाबदेही की शुरुआत।” इधर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस पूरे प्रकरण की गंभीरता को समझते हुए राष्ट्र के नाम वीडियो संदेश जारी किया। प्रधानमंत्री ने पेपर लीक की घटनाओं पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि सरकार पिछले ढाई महीनों से कड़े कदम उठा रही है और दोषियों को सलाखों के पीछे भेजा गया है। उन्होंने यह भी बताया कि परीक्षा प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी बनाने और पेपर लीक रोकने से संबंधित नया मसौदा केंद्रीय मंत्रिमंडल की बैठक में रखा जा रहा है। हालांकि, सीजेपी नेतृत्व अभी भी शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग पर अड़ा है और जंतर-मंतर पर उनका धरना फिलहाल जारी रहेगा।







