बौंसी,बांका,अंग भारत| श्रावणी मेला के नजदीक आते ही भागलपुर से हंसडीहा मुख्य मार्ग होकर भलजोर तक जाने वाला कांवरिया पथ बदहाली की मार झेल रहा है, जहां सड़कों पर फैले गहरे गड्ढे और रोशनी का घोर अभाव श्रद्धालुओं के लिए किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं है। इस प्रमुख मार्ग पर सरकारी दावों के बावजूद धरातल पर सुविधाओं का भारी टोटा है, जिससे हर साल बाबा बासुकीनाथ धाम जाने वाले लाखों शिवभक्तों की सुरक्षा खतरे में पड़ गई है। प्रशासन की ओर से अब तक युद्धस्तर पर मरम्मत या प्रकाश की व्यवस्था न करना न केवल प्रशासनिक लापरवाही को दर्शाता है, बल्कि यह कांवरियों की आस्था के साथ खिलवाड़ जैसा है।
सड़क की बदहाल स्थिति
बौंसी से लेकर भलजोर तक का सड़क मार्ग इन दिनों अपनी जर्जर अवस्था पर आंसू बहा रहा है। मुख्य सड़क पर जगह-जगह बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं, जो पैदल चलने वाले कांवरियों के पैरों में चोट का कारण बन रहे हैं। स्थिति तब और भी भयावह हो जाती है जब भारी संख्या में मोटरसाइकिल सवार कांवरिया और डाक बम इसी मार्ग से गुजरते हैं।
- सड़क के गड्ढे गहरी दुर्घटनाओं को सीधा न्योता दे रहे हैं।
- बारिश के बाद इन गड्ढों में पानी भर जाने से बाइक चालकों के लिए संतुलन बनाना दूभर हो गया है।
- भारी वाहनों और कांवरियों की भीड़ के कारण अक्सर जाम की स्थिति बनी रहती है।
रोशनी का अभाव
श्रावणी मेला के दौरान लाखों श्रद्धालु रात के सन्नाटे में भी अपनी पदयात्रा जारी रखते हैं। ऐसे में रोशनी की व्यवस्था सबसे अनिवार्य जरूरत है। दुर्भाग्यवश, भलजोर तक जाने वाले मार्ग पर स्थित अधिकांश बिजली के खंभे शोपीस बनकर रह गए हैं।
अंधेरे का आलम यह है कि सड़क किनारे पैदल चलने वाले कांवरियों को वाहन चालकों द्वारा देख पाना मुश्किल हो जाता है। स्थानीय निवासियों के अनुसार, रात के समय रोशनी न होने की वजह से कई बाइक सवार गिरकर चोटिल हो चुके हैं। प्रशासन द्वारा करोड़ों रुपये के बजट की घोषणाएं तो की जाती हैं, लेकिन इस मार्ग पर एक अदद स्ट्रीट लाइट या हाई-मास्ट लाइट न लगा पाना प्रबंधन पर बड़े सवाल खड़े करता है।
निजी शिविरों का सहारा
सरकारी मदद नदारद होने के कारण, इस रास्ते पर गुजरने वाले शिवभक्त पूरी तरह से स्थानीय लोगों और स्वयंसेवी संस्थाओं द्वारा लगाए गए निजी शिविरों पर निर्भर हैं। ये सेवादार अपने स्तर पर पानी, प्राथमिक उपचार और विश्राम की व्यवस्था तो कर रहे हैं, लेकिन सुरक्षा और मूलभूत सड़क सुविधाओं की जिम्मेदारी प्रशासन की ही होती है।
वास्तविक स्थिति यह है कि कांवरिया अपनी जान हथेली पर रखकर इस दुर्गम रास्ते से गुजर रहे हैं, जबकि सरकारी तंत्र अभी भी फाइलों के दावों से बाहर नहीं निकल पाया है।
प्रशासनिक आश्वासन और उम्मीद
इस गंभीर समस्या को देखते हुए अनुमंडल पदाधिकारी (SDO) राजकुमार ने आश्वासन दिया है कि बिजली और सड़क मरम्मत का कार्य प्राथमिकता के आधार पर जल्द पूरा कर लिया जाएगा। श्रद्धालुओं को उम्मीद है कि मेला शुरू होने से पहले इन खोखले दावों को हकीकत में बदला जाएगा।
क्या होनी चाहिए प्राथमिकता?
- तत्काल पैचवर्क: सड़क के गहरे गड्ढों को मिट्टी या गिट्टी से तुरंत भरना।
- प्रकाश व्यवस्था: सभी खराब बल्बों को बदलना और मुख्य जंक्शनों पर अतिरिक्त रोशनी की व्यवस्था करना।
- सफाई अभियान: कांवरिया पथ पर जमा कचरे को हटाकर स्वच्छता सुनिश्चित करना।
- सुरक्षा चौकियों की स्थापना: आपातकालीन स्थिति के लिए जगह-जगह हेल्प डेस्क और चिकित्सा केंद्र बनाना।
आने वाले कुछ ही दिनों में लाखों भक्तों का सैलाब इस मार्ग से होकर गुजरेगा। यदि प्रशासन ने समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए, तो यह धार्मिक यात्रा खुशियों के बजाय दुर्घटनाओं का पर्याय बन सकती है। अब गेंद पूरी तरह से जिला प्रशासन और संबंधित विभागों के पाले में है कि वे अपनी कार्यक्षमता को सिद्ध करें या फिर कांवरियों की नाराजगी का सामना करने के लिए तैयार रहें।







