सुपौल, अंग भारत। जिला मुख्यालय स्थित समाहरणालय के लहटन चौधरी सभागार में शुक्रवार को आयोजित जिला जनता दरबार में जिलाधिकारी सावन कुमार ने समाज के सबसे निचले तबके से आए 65 लोगों की गंभीर समस्याएं खुद सुनीं और उनके तुरंत निपटारे के सख्त निर्देश दिए। इस साप्ताहिक जनता दरबार का प्राथमिक लक्ष्य प्रशासनिक बाधाओं, जमीनी विवादों और सरकारी योजनाओं के क्रियान्वयन में हो रही देरी को जड़ से खत्म करना है। जिलाधिकारी ने जिस तरह से एक-एक आवेदक की बात को धैर्यपूर्वक सुना और संबंधित विभागों के अफसरों को कड़ी चेतावनी दी, उससे यह साफ हो गया कि जिले में अब सरकारी फाइलों पर कुंडली मारकर बैठने की पुरानी आदत को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
जनता की प्रमुख समस्याएं
जनता दरबार में आए आवेदनों का विश्लेषण करने पर ग्रामीण सुपौल की जमीनी सच्चाइयां उभरकर सामने आती हैं। इन 65 शिकायतों में से अधिकतर मामले नीचे दी गई श्रेणियों में विभाजित थे:
- भूमि विवाद: गांव-देहात में जमीन की पैमाइश, अवैध कब्जा और म्यूटेशन में हो रही देरी सबसे बड़ा सिरदर्द बनी हुई है।
- सामाजिक सुरक्षा: बुजुर्गों की पेंशन न आना और राशन कार्ड में नाम जुड़वाने के लिए दफ्तरों के चक्कर लगाना आम बात रही।
- आवास योजना: प्रधानमंत्री आवास योजना की किस्तें रुकने और अपात्र लोगों को लाभ मिलने की शिकायतें।
- बुनियादी सुविधाएं: बिजली की अघोषित कटौती, टूटी सड़कें और नल-जल योजना के तहत पेयजल की किल्लत।
अधिकारियों पर सख्त रुख
डीएम सावन कुमार ने दरबार के दौरान अधिकारियों से सीधा सवाल किया कि जो शिकायतें ब्लॉक या अंचल स्तर पर सुलझाई जा सकती हैं, उनके लिए आम जनता को जिला मुख्यालय तक क्यों आना पड़ रहा है? उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि अधिकारियों को केवल दफ्तर में बैठकर फाइलें नहीं चलानी हैं, बल्कि खुद मौके पर जाकर विवादों की जांच करनी होगी। अगर कोई अधिकारी शिकायतकर्ता को बिना ठोस वजह के वापस लौटाता है या मामले को लटकाता है, तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने साफ कहा कि “जनता की संतुष्टि ही प्रशासन की असली रिपोर्ट कार्ड है।”
शिकायत ट्रैकिंग व्यवस्था
अब किसी भी शिकायत को ठंडे बस्ते में डालना मुमकिन नहीं होगा। जिलाधिकारी ने एक नई जवाबदेही प्रणाली लागू की है:
| प्रक्रिया | विवरण |
|---|---|
| ऑनलाइन दर्ज | सभी 65 शिकायतों को डिजिटल पोर्टल पर अपलोड किया गया। |
| समय-सीमा | हर विभाग को 15 दिन के भीतर कार्रवाई की रिपोर्ट देनी होगी। |
| निगरानी | जिलाधिकारी कार्यालय खुद प्रत्येक फाइल की स्थिति की मॉनिटरिंग करेगा। |
प्रशासनिक टीम की भूमिका
जनता दरबार को सफल बनाने के लिए जिले का पूरा प्रशासनिक ढांचा एक साथ काम कर रहा था। उप विकास आयुक्त (DDC) इन्द्रवीर कुमार ने ग्रामीण विकास योजनाओं की समीक्षा की, वहीं जिला पंचायत राज पदाधिकारी गयानंद यादव ने पंचायतों में हो रहे कामों की फाइलें देखीं। निदेशक एनईपी अनित कुमार के साथ-साथ गोपनीय शाखा के विकास कुमार कर्ण और मुकेश कुमार ने आवेदकों के दस्तावेजों को तुरंत फॉरवर्ड किया। इस तरह की संयुक्त उपस्थिति से यह फायदा हुआ कि अलग-अलग विभागों से जुड़े जटिल तकनीकी मामलों पर मौके पर ही समाधान निकल आया, जिससे फरियादियों को बार-बार दौड़ने से मुक्ति मिल गई।
सुशासन और भरोसा
किसी भी जिला प्रशासन की सफलता इस बात से मापी जाती है कि सबसे अंतिम पंक्ति में खड़ा व्यक्ति अपनी बात कितनी बेबाकी से कह सकता है। जनता दरबार केवल एक बैठक नहीं, बल्कि शासन और जनता के बीच का एक विश्वास सेतु है। जब आम ग्रामीण दलालों और बिचौलियों के जाल से बाहर निकलकर सीधे जिले के शीर्ष अधिकारी से मिलता है, तो सिस्टम में उसका भरोसा दोबारा पैदा होता है। सावन कुमार की इस पहल से सुपौल में न केवल प्रशासन चुस्त हुआ है, बल्कि निचले स्तर पर व्याप्त भ्रष्टाचार को भी एक बड़ा झटका लगा है। आने वाले समय में, यह मॉडल अन्य जिलों के लिए भी एक उदाहरण बन सकता है।







