गुवाहाटी,अंग भारत। असम में बाढ़ की विभीषिका ने आम जनजीवन को पूरी तरह से पंगु बना दिया है। ताजा आंकड़ों के अनुसार, राज्य में बाढ़ से प्रभावित लोगों की कुल संख्या 1,92,799 के खतरनाक स्तर को पार कर चुकी है। हाल ही में शिवसागर और चराईदेव जिलों से दो और शव बरामद किए गए हैं, जिसके बाद इस मानसून सीजन में असम में बाढ़ से मरने वालों की आधिकारिक संख्या 82 तक पहुंच गई है। असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (ASDMA) के अनुसार, शिवसागर, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव और चराईदेव जिले वर्तमान में सबसे अधिक संकट का सामना कर रहे हैं। हालांकि निचले इलाकों से पानी में कुछ गिरावट दर्ज की गई है, लेकिन हजारों लोग अभी भी सिर पर पक्की छत न होने के कारण प्लास्टिक के तंबुओं और राहत शिविरों में रहने को मजबूर हैं।
नेपाली खूंटी की तबाही
शिवसागर जिले का नेपाली खूंटी गांव इस समय बाढ़ की सबसे डरावनी तस्वीर पेश कर रहा है। कभी दुग्ध उत्पादन के लिए समृद्ध माना जाने वाला यह गांव अब पूरी तरह से वीरान हो चुका है। यहाँ की स्थिति का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि 100 से ज्यादा परिवार अपना सब कुछ खो चुके हैं। गांव के मुख्य व्यवसाय, यानी पशुपालन, का नामो-निशान तक मिट गया है क्योंकि मवेशी बाढ़ के पानी में बह गए या सुरक्षित स्थानों पर ले जाने पड़े। चूंकि यह इलाका भौगोलिक रूप से काफी दुर्गम है, इसलिए बचाव दलों को वहां तक पहुंचने और राहत सामग्री पहुंचाने में एड़ी-चोटी का जोर लगाना पड़ रहा है।
“गांव का मुख्य व्यवसाय पशुपालन था, लेकिन आज यहाँ एक भी मवेशी दिखाई नहीं दे रहा है। लोग ऊंचे स्थानों पर प्लास्टिक के तंबू तानकर रहने को मजबूर हैं।”
नदियों का रौद्र रूप
असम की जीवनरेखा कही जाने वाली नदियां इस समय तबाही मचा रही हैं। ASDMA की 31 जुलाई की रिपोर्ट के अनुसार, नुमलीगढ़ के पास धनसिरि नदी का जलस्तर खतरे के निशान के ऊपर बना हुआ है। तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों की रातों की नींद उड़ी हुई है। उन्हें हर पल इस बात का डर सता रहा है कि यदि ऊपरी हिस्सों में दोबारा मूसलाधार बारिश हुई, तो बची-खुची जमीन भी पानी में पूरी तरह समा जाएगी। नदी के इस रौद्र रूप ने तटबंधों को भी कमजोर कर दिया है, जिससे खतरा और भी बढ़ गया है।
तबाही के सरकारी आंकड़े
बाढ़ ने केवल घरों को ही नहीं, बल्कि असम की ग्रामीण अर्थव्यवस्था की नींव को भी हिलाकर रख दिया है। कृषि पर निर्भर परिवारों के लिए यह समय किसी गहरे संकट से कम नहीं है। नुकसान का ब्यौरा नीचे दिए गए बिंदुओं से समझा जा सकता है:
- प्रभावित जिले: शिवसागर, गोलाघाट, जोरहाट, नगांव और चराईदेव सबसे बुरी तरह प्रभावित हैं।
- प्रभावित गांव: 17 राजस्व मंडलों के अंतर्गत 379 गांव जलमग्न हैं।
- फसलों का नुकसान: लगभग 15,430 हेक्टेयर भूमि पर खड़ी फसलें बर्बाद हो चुकी हैं।
राहत शिविरों की स्थिति
सरकार की ओर से 80 राहत और वितरण केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। इन केंद्रों के माध्यम से बेघर हुए लोगों को भोजन, स्वच्छ पानी और चिकित्सा सहायता मुहैया कराई जा रही है, लेकिन भीड़ के कारण संसाधनों की कमी साफ महसूस की जा रही है।
| शिविर का प्रकार | संख्या | आश्रितों की संख्या |
|---|---|---|
| सक्रिय राहत शिविर | 54 | 12,994 |
| राहत वितरण केंद्र | 26 | 5,384 |
| कुल | 80 | 18,378 |
आवासीय ढांचे को क्षति
बाढ़ ने कच्चे और पक्के मकानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। शिवसागर और चराईदेव में हजारों घर या तो पूरी तरह ध्वस्त हो गए हैं या आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त हैं। कच्चे घरों में 879 मकान पूरी तरह से जमींदोज हो चुके हैं, जबकि 2,022 कच्चे घरों को आंशिक नुकसान हुआ है। पक्के मकानों की श्रेणी में भी 134 घर पूरी तरह नष्ट हो गए हैं और 547 घरों में दरारें आ गई हैं। इसके अलावा 180 झोपड़ियां भी बाढ़ में बह गई हैं, जिससे लोग खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं।
पशुधन पर संकट
इंसानों के अलावा बेजुबान जानवरों पर भी कहर टूटा है। बाढ़ से प्रभावित जानवरों की कुल संख्या 10,855 तक पहुंच गई है। इनमें 4,755 बड़े मवेशी और 4,629 छोटे जानवर शामिल हैं। शिवसागर जिले में अकेले 1,461 पशुओं के बहने की सूचना है। साथ ही, 3,885 गौशालाएं और पशु शेड नष्ट हो चुके हैं। सबसे बड़ी चिंता अब मवेशियों के चारे की कमी को लेकर है, जो आने वाले दिनों में पशुपालकों के लिए एक बहुत बड़ी चुनौती साबित होने वाली है।







