वॉशिंगटन,अंग भारत। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने स्पष्ट कर दिया है कि अमेरिका ने यूक्रेन को अपनी अत्याधुनिक पैट्रियट मिसाइल टेक्नोलॉजी सौंपने या उसके निर्माण का लाइसेंस देने पर कोई अंतिम सहमति नहीं दी है। कैंप डेविड में पत्रकारों से बातचीत के दौरान ट्रंप ने साफ लफ्जों में कहा कि इस तरह की बेहद संवेदनशील सैन्य तकनीक का हस्तांतरण शायद कभी नहीं होगा। ट्रंप का यह ताजा बयान यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की के उस दावे को सीधे तौर पर खारिज करता है, जिसमें उन्होंने कहा था कि अमेरिका इस घातक एयर डिफेंस सिस्टम को यूक्रेन में ही बनाने की अनुमति देने पर सहमत हो गया है। ट्रंप के इस सख्त रुख से साफ है कि अमेरिका अपनी सबसे संवेदनशील सैन्य तकनीक की सुरक्षा को लेकर कोई भी जोखिम मोल लेने के मूड में नहीं है।
ट्रंप का कड़ा रुख
मैरीलैंड स्थित कैंप डेविड में कैबिनेट बैठक के दौरान पत्रकारों ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से इस मुद्दे पर सीधे सवाल पूछे। तुर्किए की सरकारी समाचार एजेंसी अनाडोलू के मुताबिक, ट्रंप से पूछा गया कि क्या यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की को पैट्रियट मिसाइल निर्माण का लाइसेंस मिलने से पहले किसी तरह की अतिरिक्त शर्तें पूरी करनी होंगी।
इस पर डोनाल्ड ट्रंप ने बिना किसी संकोच के कहा:
“ये हथियार बेहद उन्नत हैं। हमें इस बात को लेकर बहुत सावधान रहना होगा कि इन्हें कोई और न बनाए। हमने अभी तक इसकी मंजूरी नहीं दी है। इस पर बातचीत चल रही है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि ऐसी टेक्नोलॉजी दी जाएगी। मुझे नहीं लगता कि ऐसा कभी होगा।”
ट्रंप के इस बेबाक बयान ने यह साफ कर दिया है कि बातचीत के स्तर पर भले ही कुछ भी कहा जा रहा हो, लेकिन धरातल पर अमेरिका अपनी रक्षा तकनीक को लेकर बेहद सतर्क है।
ज़ेलेंस्की का दावा
दरअसल, इस विवाद की जड़ें इस सप्ताह की शुरुआत में हुई एक उच्च स्तरीय बैठक से जुड़ी हैं। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर ज़ेलेंस्की ने वॉशिंगटन डीसी में डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की थी। इस बैठक के तुरंत बाद ज़ेलेंस्की ने एक इंटरव्यू में बड़ा दावा करते हुए कहा था कि ट्रंप यूक्रेन को पैट्रियट मिसाइल सिस्टम के निर्माण का लाइसेंस देने के लिए राजी हो गए हैं। इस दावे से ऐसा लगा था कि यूक्रेन जल्द ही अमेरिकी मदद से अपने पैर पर खड़ा हो जाएगा। लेकिन ट्रंप के ताजा बयान ने ज़ेलेंस्की के दावों पर पानी फेर दिया है। इससे पहले भी ट्रंप ने अपने एक इंटरव्यू में कहा था कि वह यूक्रेन को पैट्रियट मिसाइल बनाने की अनुमति देने के विचार से पूरी तरह सहमत नहीं हैं।
पैट्रियट सिस्टम क्या है?
पैट्रियट मिसाइल डिफेंस सिस्टम दुनिया की सबसे एडवांस और भरोसेमंद हवाई रक्षा प्रणालियों में से एक है। इसे अमेरिकी रक्षा कंपनी रेथियॉन द्वारा बनाया जाता है। यह सिस्टम दुश्मन की आने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों, क्रूज मिसाइलों और आधुनिक लड़ाकू विमानों को हवा में ही ट्रैक करके नष्ट करने की क्षमता रखता है। यूक्रेन युद्ध में इस सिस्टम ने रूसी हवाई हमलों से यूक्रेनी शहरों और बुनियादी ढांचे को बचाने में बेहद अहम भूमिका निभाई है। यही वजह है कि यूक्रेन इस तकनीक को खुद हासिल करना चाहता है ताकि वह युद्ध के मैदान में आत्मनिर्भर बन सके।
तकनीक ट्रांसफर के खतरे
अमेरिका अपनी संवेदनशील सैन्य तकनीकों को किसी भी बाहरी देश को सौंपने से हमेशा बचता है। इसके पीछे कई गंभीर रणनीतिक कारण हैं:
- रूसी कब्जे का खतरा: युद्ध के मैदान में अगर पैट्रियट मिसाइल बनाने वाली फैक्ट्री या उसकी तकनीक रूस के हाथ लग जाती है, तो अमेरिका की पूरी हवाई सुरक्षा प्रणाली खतरे में पड़ सकती है।
- रिवर्स इंजीनियरिंग का डर: दुश्मन देश इस तकनीक की नकल करके अपनी खुद की डिफेंस सिस्टम को अपग्रेड कर सकते हैं।
- गोपनीयता का हनन: सैन्य तकनीकों का सह-उत्पादन केवल उन्हीं देशों के साथ किया जाता है जो अमेरिका के बेहद पुराने और संधि-बद्ध सहयोगी हैं।
कूटनीतिक असर क्या होगा?
डोनाल्ड ट्रंप के इस बयान से कीव और वॉशिंगटन के बीच आने वाले दिनों में कूटनीतिक खिंचाव बढ़ सकता है। ज़ेलेंस्की लगातार अपने घरेलू मोर्चे पर यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि उन्हें अमेरिकी प्रशासन का पूरा और बिना शर्त समर्थन हासिल है। ट्रंप के इस रुख से साफ है कि अमेरिका अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा और अपनी सैन्य तकनीक की गोपनीयता को यूक्रेन की मदद करने से ऊपर रखता है। यूक्रेन को अब अपनी रक्षा जरूरतों के लिए केवल अमेरिकी हथियारों की आपूर्ति पर ही निर्भर रहना होगा, क्योंकि खुद हथियार बनाने का उसका सपना फिलहाल साकार होता नहीं दिख रहा है।







