नई दिल्ली,अंग भारत। राष्ट्रमंडल खेल 2026 के नौवें दिन भारत ने खेल जगत में अपनी धमक मजबूत करते हुए कुल छह पदक (दो स्वर्ण, दो रजत और दो कांस्य) अपने नाम किए हैं, जिससे टीम इंडिया 23 पदकों (5 स्वर्ण, 12 रजत और 6 कांस्य) के साथ मेडल टैली में 10वें स्थान पर पहुंच गई है। यह छलांग सिर्फ अंकों की नहीं, बल्कि उन खेलों में भारतीय तिरंगे को ऊपर उठाने की है जहां कभी हमारी दावेदारी कमजोर मानी जाती थी। खासकर जूडो और एथलेटिक्स में आए इन पदकों ने साबित कर दिया है कि भारतीय एथलीट अब पारंपरिक खेलों के दायरे से बाहर निकलकर वैश्विक मंच पर हर चुनौती के लिए तैयार हैं।
जूडो में ऐतिहासिक सफलता
शुक्रवार का दिन भारतीय जूडो के इतिहास में सुनहरे अक्षरों में दर्ज हो गया। इसकी शुरुआत की अस्मिता डे ने, जिन्होंने महिलाओं के 48 किलोग्राम वर्ग में विपक्षी खिलाड़ियों को धूल चटाते हुए स्वर्ण पदक पर कब्जा किया। यह राष्ट्रमंडल खेलों के इतिहास में जूडो स्पर्धा के अंदर भारत का पहला स्वर्ण पदक है। इस जीत ने भारतीय खेमे में जबरदस्त जोश भर दिया।
अस्मिता की इस ऐतिहासिक जीत के कुछ ही देर बाद, पुरुषों के 60 किलोग्राम वर्ग में हर्ष सिंह ने मैट पर उतरकर अपनी ताकत का लोहा मनवाया। हर्ष ने फाइनल मुकाबले में सूझबूझ और फुर्ती का बेजोड़ नमूना पेश करते हुए दूसरा स्वर्ण पदक भारत की झोली में डाल दिया। इसी खेल में यामिनी ने भी शानदार प्रदर्शन किया और फाइनल तक का सफर तय कर देश के लिए रजत पदक पक्का किया। एक ही दिन में तीन बड़े पदक जीतकर जूडो टीम ने दिखा दिया कि भारतीय मार्शल आर्ट्स अब दुनिया पर राज करने के लिए तैयार है।
ट्रैक और फील्ड पर धमाका
सिर्फ मैट पर ही नहीं, बल्कि एथलेटिक्स ट्रैक और फील्ड पर भी भारतीय जांबाजों ने नया इतिहास लिखा। पुरुषों की बेहद कठिन मानी जाने वाली डेकाथलॉन स्पर्धा में तेजस्विन शंकर ने कांस्य पदक जीतकर कमाल कर दिया। डेकाथलॉन को एथलेटिक्स का सबसे कड़ा इम्तिहान माना जाता है क्योंकि इसमें खिलाड़ी को दस अलग-अलग स्पर्धाओं में अपनी ताकत, गति और सहनशक्ति को साबित करना होता है। तेजस्विन इस स्पर्धा में पदक जीतने वाले पहले भारतीय खिलाड़ी बन गए हैं, जो उनकी मेहनत और बहुमुखी प्रतिभा को दर्शाता है।
भाला फेंक में डबल पोडियम
इसके बाद मैदान पर वह नजारा देखने को मिला जिसका हर खेल प्रेमी को बेसब्री से इंतजार रहता है। पुरुषों की भाला फेंक (जैवलीन थ्रो) स्पर्धा में भारत ने एक नहीं बल्कि दो-दो पदक जीतकर इतिहास रच दिया। भारत के स्टार एथलीट नीरज चोपड़ा ने उम्मीद के मुताबिक बेहतरीन प्रदर्शन करते हुए रजत पदक अपने नाम किया।
वहीं, भारत के ही यशवीर सिंह ने हार न मानने का जज्बा दिखाया और अपने करियर का सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक हासिल किया। एक ही स्पर्धा के पोडियम पर दो भारतीय खिलाड़ियों का होना यह साफ करता है कि देश में भाला फेंक खेल की जड़ें कितनी गहरी हो चुकी हैं और अब हम सिर्फ एक स्टार खिलाड़ी के भरोसे नहीं बैठे हैं, बल्कि हमारी बेंच स्ट्रेंथ भी उतनी ही मजबूत हो चुकी है।
पदक तालिका का पूरा गणित
नौवें दिन के खेल खत्म होने के बाद वैश्विक स्तर पर स्थिति काफी दिलचस्प हो गई है। ऑस्ट्रेलिया अभी भी पदक तालिका में शीर्ष पर काबिज है, जबकि भारत धीरे-धीरे अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। नीचे दी गई तालिका से आप शीर्ष देशों की स्थिति को आसानी से समझ सकते हैं:
| स्थान | देश | स्वर्ण (Gold) | रजत (Silver) | कांस्य (Bronze) | कुल पदक |
|---|---|---|---|---|---|
| 1 | ऑस्ट्रेलिया | 55 | 30 | 43 | 128 |
| 2 | इंग्लैंड | 17 | 34 | 29 | 80 |
| 3 | कनाडा | 17 | 15 | 21 | 53 |
| 10 | भारत | 5 | 12 | 6 | 23 |
इस सफलता के गहरे मायने
भारत के लिए 10वें स्थान पर पहुंचना केवल एक आंकड़ा नहीं है। अगर हम गहराई से देखें, तो इन खेलों में भारत की विविधता खुलकर सामने आई है। आमतौर पर भारत कुश्ती या निशानेबाजी में पदक जीतने के लिए जाना जाता था। लेकिन 2026 के इन खेलों ने कहानी बदल दी है। जूडो में पहला स्वर्ण पदक मिलना और डेकाथलॉन जैसी थका देने वाली स्पर्धा में पोडियम तक पहुंचना यह बताता है कि भारतीय खेल प्रशासन और एथलीटों की तैयारी अब बिल्कुल सही दिशा में आगे बढ़ रही है।
“मैदान पर भारतीय खिलाड़ियों ने जो कर दिखाया, उसने साबित कर दिया है कि दृढ़ संकल्प और सही रणनीति से हम किसी भी खेल में दुनिया को टक्कर दे सकते हैं।”
नीरज चोपड़ा का रजत और यशवीर सिंह का कांस्य पदक यह दिखाता है कि युवाओं में एथलेटिक्स को लेकर नया जोश है। अब लड़ाई सिर्फ पदक जीतने की नहीं है, बल्कि दुनिया के सबसे बेहतरीन खिलाड़ियों को सीधी चुनौती देने की है। आने वाले दिनों में भारत के कुछ और मुख्य मुकाबले बचे हैं, और उम्मीद है कि मेडल की यह गिनती अभी और ऊपर जाएगी। खेल प्रेमियों की नजरें अब अगले मुकाबलों पर टिकी हैं जहां भारतीय खिलाड़ी नए कीर्तिमान स्थापित करने के इरादे से मैदान में उतरेंगे।







