गुवाहाटी, अंग भारत। असम में भारी और लगातार बारिश के कारण बाढ़ की स्थिति बेहद भयावह हो चुकी है, जिसके कारण राज्य के 11 जिलों में रहने वाली 7 लाख से अधिक की आबादी गंभीर रूप से प्रभावित हुई है। बीते 23 जुलाई को राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) ने चराईदेव और शिवसागर जिलों से 6 और शव बरामद होने की पुष्टि की है, जिससे इस आपदा में जान गवा चुके लोगों की कुल संख्या बढ़कर 47 हो गई है। वर्तमान में राज्य की प्रमुख नदियां खतरे के निशान से ऊपर बह रही हैं, जिससे सैकड़ों गांव पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं और जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है।
खतरे के निशान से ऊपर नदियां
राज्य की प्रमुख नदियां इस समय रौद्र रूप धारण किए हुए हैं। जलस्तर में आई इस बेतहाशा बढ़ोतरी ने तटबंधों को कमजोर कर दिया है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार, बुढ़ीदिहिंग नदी चेनिमारी और खोवांग में, दिसांग नदी नंगलामुराघाट में, दिखौ नदी शिवसागर में, धनसिरी नदी नुमालीगढ़ में और कुशियारा नदी श्रीभूमि में खतरे के निशान से काफी ऊपर बह रही है। इन इलाकों में नदियों का बहाव इतना तेज है कि किनारों पर रहने वाले परिवारों के लिए अपना घर छोड़ना ही एकमात्र विकल्प बचा है। मिट्टी के कटाव की घटनाएं भी लगातार बढ़ रही हैं, जिससे पक्के मकान और बुनियादी ढांचा ढहने का खतरा पैदा हो गया है।
गुवाहाटी में जलभराव संकट
बाढ़ की मार सिर्फ ग्रामीण अंचलों तक ही सीमित नहीं है। राज्य की राजधानी गुवाहाटी भी मूसलाधार बारिश के आगे बेबस नजर आई। गुरुवार रात हुई जोरदार बारिश ने शहर की ड्रेनेज प्रणाली की सच्चाई सबके सामने रख दी। निचले इलाकों में कई फीट पानी भर जाने से मुख्य सड़कें तालाब में तब्दील हो गईं, जहाँ लोग नावों का सहारा लेने को मजबूर दिखे। ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई और घंटों तक लोग अपनी गाड़ियों में फंसकर रह गए। शहर के कई पॉश इलाकों में भी अगले दिन तक जलजमाव बना रहा, जिससे कामकाजी वर्ग का जनजीवन ठप हो गया।
11 जिलों का हाल
वर्तमान में असम के 11 जिले इस प्राकृतिक आपदा से सबसे ज्यादा त्रस्त हैं। इन प्रभावित क्षेत्रों में गोलाघाट, होजई, कामरूप, चराइदेव, जोरहाट, डिब्रूगढ़, शिवसागर, नगांव, कामरूप (मेट्रो), कार्बी आंगलोंग और तिनसुकिया शामिल हैं। आंकड़ों पर नजर डालें तो 37 राजस्व मंडलों के अंतर्गत आने वाले 883 गांव बाढ़ की चपेट में आ चुके हैं। हज़ारों लोग अपने घर की छतों पर या ऊंचे स्थानों पर शरण लेने को मजबूर हैं।
खेती और भारी नुकसान
बाढ़ ने राज्य के कृषि आधारित परिवारों की आर्थिक कमर तोड़ दी है। रिपोर्ट के मुताबिक, लगभग 25,375.443 हेक्टेयर कृषि भूमि बाढ़ के पानी में समा गई है। धान की तैयार फसलें और मौसमी सब्जियां पूरी तरह बर्बाद हो चुकी हैं, जिससे किसानों के सामने आजीविका का संकट खड़ा हो गया है। फसलें सड़ने से दुर्गंध फैलने और बीमारियों का खतरा भी बढ़ गया है, जिससे किसानों का नुकसान दोहरा हो गया है।
राहत शिविर और प्रबंधन
प्रशासन ने विस्थापितों के लिए राहत शिविरों का जाल बिछाया है। वर्तमान में कुल 358 शिविरों के माध्यम से मदद पहुंचाई जा रही है।
- राहत शिविरों में शरणार्थी: 24,124 लोग इन कैंपों में रह रहे हैं।
- अन्य सहायता: 2,39,864 लोग वितरण केंद्रों के माध्यम से राशन ले रहे हैं।
शिविरों में स्वच्छ पेयजल, भोजन और दवाओं की निरंतर आपूर्ति सुनिश्चित करना प्रशासन की सबसे बड़ी प्राथमिकता है। आपदा प्रबंधन की टीमें इन केंद्रों पर नियमित मॉनिटरिंग कर रही हैं।
रेस्क्यू ऑपरेशन का विस्तार
बचाव कार्यों में एनडीआरएफ (NDRF), एसडीआरएफ (SDRF), डीडीआरएफ (DDRF) और स्थानीय पुलिस की संयुक्त टीमें तैनात हैं। करीब 80 नावें लगातार गश्त कर रही हैं। अब तक 4,455 लोगों को पानी के बीच से सुरक्षित निकाला गया है। सबसे गंभीर इलाकों के लिए हेलीकॉप्टर भी तैनात किए गए हैं। स्वास्थ्य विभाग की 173 मेडिकल टीमें बाढ़ जनित संक्रमण और बीमारियों को रोकने के लिए जगह-जगह शिविर लगा रही हैं।
राहत सामग्री का वितरण
पीड़ितों को भूखा न रहना पड़े, इसके लिए सरकार ने बड़े पैमाने पर अनाज और आवश्यक सामग्री की आपूर्ति की है। अब तक वितरित मुख्य राशन का विवरण इस प्रकार है:
- चावल: 2539.523 क्विंटल
- दाल: 551.383 क्विंटल
- नमक: 107.0165 क्विंटल
- सरसों का तेल: 8620.92 लीटर
पशुधन पर गंभीर संकट
बाढ़ का बुरा असर बेजुबान जानवरों पर भी पड़ा है। कुल 3,71,609 पशु और पोल्ट्री प्रभावित हैं। दुर्भाग्यवश, जोरहाट में 23 और चराईदेव में 131 सहित कुल 154 जानवर पानी में बह गए। प्रशासन ने पशुओं के चारे के लिए 2089.57 क्विंटल गेहूं का चोकर और 41.02 क्विंटल चावल का चोकर वितरित किया है, ताकि पशुपालक अपने मवेशियों को बचा सकें।
मुख्यमंत्री का धरातलीय दौरा
मुख्यमंत्री डॉ. हिमंत बिस्व सरमा व्यक्तिगत रूप से पूरी स्थिति की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। बुधवार को उन्होंने सबसे प्रभावित जिलों शिवसागर, चराईदेव और जोरहाट का हवाई और जमीनी दौरा किया। गुरुवार को वे गोलाघाट और डिब्रूगढ़ पहुंचे। इस दौरान कैबिनेट मंत्री बिमल बोरा, केशव महंत, अजंता नेओग, अतुल बोरा और स्थानीय विधायक राहत कार्यों की निगरानी करते हुए देखे गए। वे सीधे लोगों से मिलकर उनकी परेशानियां सुन रहे हैं ताकि सरकारी तंत्र में कहीं कोई कमी न रहे।
सदन में उठेगा मुद्दा
बाढ़ से हुए भारी इंफ्रास्ट्रक्चर नुकसान को लेकर विधानसभा में बहस तय है। पुल, सड़कें और सरकारी इमारतों के ढहने से हुए आर्थिक नुकसान पर विपक्षी दल सरकार को घेरने की तैयारी में हैं। विधानसभा अध्यक्ष रंजीत दास ने स्पष्ट किया है कि सदन की आगामी कार्यवाही के दौरान बाढ़ की भयावहता और इसके दीर्घकालिक समाधानों पर गंभीर चर्चा की जाएगी। सरकार अब इस आपदा को एक बड़ी चुनौती मानते हुए पुनर्निर्माण की कार्ययोजना पर विचार कर रही है।








