भागलपुर, अंग भारत। भागलपुर शहर की सांस्कृतिक पहचान रहे दीपप्रभा सिनेमा हॉल का अस्तित्व अब लगभग समाप्त हो चुका है। कभी हजारों दर्शकों की तालियों, सीटियों और सिनेमाई उत्साह से गूंजने वाला यह प्रतिष्ठित सिनेमा हॉल अब मलबे में तब्दील हो गया है। इसके ढहने के साथ ही शहर के सिनेमा प्रेमियों की अनगिनत यादें भी मानो इतिहास के पन्नों में दर्ज होकर रह गई हैं।दीपप्रभा सिनेमा हॉल केवल एक मनोरंजन केंद्र नहीं था, बल्कि भागलपुर की सांस्कृतिक विरासत का अहम हिस्सा माना जाता था। वर्षों तक यहां नई फिल्मों का प्रदर्शन होता रहा और हर वर्ग के लोग परिवार के साथ मनोरंजन के लिए यहां पहुंचते थे। अब इसका ढांचा पूरी तरह ध्वस्त किए जाने से शहर के लोगों में भावुकता भी देखने को मिल रही है।
‘आई मिलन की रात’ बनी थी पहली प्रदर्शित फिल्म
दीपप्रभा सिनेमा हॉल में प्रदर्शित पहली फिल्म वर्ष 1991 में रिलीज हुई हिंदी फिल्म ‘आई मिलन की रात’ थी। गुलशन कुमार द्वारा निर्मित इस फिल्म में अभिनेता अविनाश वाधवन और अभिनेत्री शाहीन मुख्य भूमिका में नजर आए थे। फिल्म के प्रदर्शन के साथ ही दीपप्रभा ने भागलपुर के मनोरंजन जगत में अपनी अलग पहचान बना ली थी।इसके बाद कई सुपरहिट हिंदी फिल्मों का प्रदर्शन यहां हुआ और यह सिनेमा हॉल लंबे समय तक शहर के लोगों का पसंदीदा मनोरंजन केंद्र बना रहा। छुट्टियों और त्योहारों के दौरान यहां दर्शकों की भारी भीड़ उमड़ती थी।
स्वतंत्रता सेनानी की स्मृति में हुआ था निर्माण
दीपप्रभा सिनेमा हॉल का निर्माण वर्ष 1992 में भारतीय स्वतंत्रता संग्राम सेनानी बाबू दीपनारायण सिंह और उनकी सुपुत्री प्रभावती देवी की स्मृति में कराया गया था। इसका निर्माण प्रभावती देवी की पुत्री इंदु देवी के पति जवाहर प्रसाद जायसवाल ने कराया था। उन्होंने इसे केवल व्यावसायिक उद्देश्य से नहीं, बल्कि शहर को एक आधुनिक और सांस्कृतिक पहचान देने के उद्देश्य से विकसित किया था।स्थानीय लोगों के अनुसार निर्माण के शुरुआती दिनों में जवाहर प्रसाद जायसवाल स्वयं नियमित रूप से निर्माण स्थल पर पहुंचते थे और सिनेमा हॉल के भविष्य तथा उसकी सुविधाओं को लेकर विस्तृत योजनाएं बनाते थे। बाद के वर्षों में उन्होंने दीपप्रभा सिनेमा हॉल को बेच दिया और कोलकाता जाकर बस गए।
एक दौर का अंत, यादें रहेंगी हमेशा जिंदा
समय के साथ मल्टीप्लेक्स संस्कृति, डिजिटल मनोरंजन और बदलती जीवनशैली के कारण पारंपरिक सिंगल स्क्रीन सिनेमाघरों का अस्तित्व धीरे-धीरे समाप्त होने लगा। दीपप्रभा सिनेमा हॉल भी इसी बदलाव का शिकार हुआ और आखिरकार इसका भवन ध्वस्त कर दिया गया।आज भले ही दीपप्रभा सिनेमा हॉल मलबे में तब्दील हो चुका हो, लेकिन भागलपुर के हजारों लोगों के लिए इससे जुड़ी यादें, पहली फिल्म देखने का रोमांच और परिवार व दोस्तों के साथ बिताए गए सुनहरे पल हमेशा जीवित रहेंगे। शहर की सांस्कृतिक विरासत के रूप में दीपप्रभा का नाम लंबे समय तक लोगों की स्मृतियों में दर्ज रहेगा।











