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डिजिटल इंडिया के 11 साल: तकनीक बनी सुशासन और पारदर्शिता की ताकत

डिजिटल इंडिया के 11 साल की सफलता और देश में यूपीआई तथा डीबीटी के जरिए आए बड़े बदलाव को दर्शाता हुआ विशेष चित्र

नई दिल्ली,अंग भारत। डिजिटल इंडिया कार्यक्रम ने मंगलवार को अपनी स्थापना के 11 वर्ष पूरे कर लिए। इस अवसर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के अध्यक्ष नितिन नवीन ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में शुरू किया गया यह अभियान अब केवल तकनीकी सुविधा तक सीमित नहीं है, बल्कि सुशासन, पारदर्शिता और जनसशक्तिकरण का मजबूत आधार बन चुका है। उन्होंने कहा कि डिजिटल क्रांति ने देश की शासन व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और नागरिक-केंद्रित बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।नितिन नवीन ने कहा कि पिछले 11 वर्षों में डिजिटल इंडिया ने आम लोगों के जीवन को आसान बनाया है। सरकारी सेवाओं तक पहुंच पहले की तुलना में अधिक सरल और तेज हुई है, जिससे नागरिकों को कई सुविधाएं घर बैठे मिल रही हैं।

डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर बना भारत की नई पहचान

नितिन नवीन ने कहा कि डिजिटल पब्लिक इंफ्रास्ट्रक्चर (DPI) के क्षेत्र में भारत ने दुनिया के सामने समावेशी और तकनीक आधारित विकास का सफल मॉडल प्रस्तुत किया है। गांव से लेकर वैश्विक मंच तक भारत की डिजिटल क्षमता नवाचार और डिजिटल परिवर्तन की नई पहचान बनकर उभरी है।उन्होंने कहा कि डिजिटल इंडिया अभियान विकसित भारत के संकल्प को नई गति देने के साथ देश को वैश्विक डिजिटल नेतृत्व की दिशा में आगे बढ़ा रहा है।

UPI, DigiLocker और DBT से बदली सरकारी सेवाओं की तस्वीर

भाजपा अध्यक्ष ने कहा कि यूपीआई (UPI) के माध्यम से डिजिटल भुगतान व्यवस्था में क्रांतिकारी बदलाव आया है। आज देश में करोड़ों लोग कैशलेस लेनदेन कर रहे हैं। वहीं डिजिलॉकर (DigiLocker) ने कागजरहित सेवाओं को बढ़ावा देकर दस्तावेजों के सुरक्षित और आसान उपयोग का रास्ता तैयार किया है।उन्होंने कहा कि डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए सरकारी योजनाओं का लाभ बिना किसी बिचौलिए के सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों तक पहुंच रहा है। इससे पारदर्शिता बढ़ी है और सरकारी योजनाओं का लाभ समय पर लोगों तक पहुंच रहा है।

11 वर्षों में डिजिटल सेवाओं का तेजी से हुआ विस्तार

उल्लेखनीय है कि डिजिटल इंडिया कार्यक्रम की शुरुआत 1 जुलाई 2015 को की गई थी। इसका उद्देश्य देश में इंटरनेट की पहुंच बढ़ाना, सरकारी सेवाओं को ऑनलाइन उपलब्ध कराना और डिजिटल अंतर को कम करना था।आज स्वास्थ्य, शिक्षा, बैंकिंग और विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ करोड़ों लोग डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से प्राप्त कर रहे हैं। डिजिटल अवसंरचना में सरकारी निवेश से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों के बीच कनेक्टिविटी में भी उल्लेखनीय सुधार हुआ है। किफायती इंटरनेट और व्यापक डिजिटल पहुंच ने तकनीक के लोकतंत्रीकरण को मजबूत किया है।

डिजिटल अर्थव्यवस्था को मिली नई रफ्तार

पिछले एक दशक में डिजिटल इंडिया देश की डिजिटल अर्थव्यवस्था और डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना की मजबूत नींव बनकर उभरा है। भारत आज रियल-टाइम डिजिटल पेमेंट के क्षेत्र में दुनिया के अग्रणी देशों में शामिल है और यूपीआई के माध्यम से वैश्विक डिजिटल लेनदेन का लगभग 49 प्रतिशत हिस्सा संभाला जा रहा है।वर्तमान में डिजिटल अर्थव्यवस्था का देश के सकल घरेलू उत्पाद (GDP) में लगभग 12 से 14 प्रतिशत योगदान है, जो आने वाले वर्षों में बढ़कर लगभग 20 प्रतिशत तक पहुंचने का अनुमान है। इसके अलावा डिजिटल इंडिया ने स्टार्टअप इकोसिस्टम, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, क्लाउड कंप्यूटिंग, साइबर सुरक्षा और तकनीकी नवाचार को भी नई गति दी है। विकसित भारत 2047 के लक्ष्य की दिशा में यह अभियान देश में समावेशी विकास, तकनीकी आत्मनिर्भरता और नागरिक सशक्तिकरण का महत्वपूर्ण आधार बनता जा रहा है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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