लखनऊ,अंग भारत। योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में सोमवार को हुई उत्तर प्रदेश कैबिनेट बैठक में 12 अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। इनमें सबसे बड़ा फैसला प्रदेश में 2400 मेगावाट क्षमता वाली नई तापीय ऊर्जा परियोजना को लेकर लिया गया। सरकार का दावा है कि इस परियोजना से आने वाले समय में प्रदेश के लोगों को सस्ती और निर्बाध बिजली उपलब्ध कराने में बड़ी मदद मिलेगी।
Read more………यूपी में बारिश और बिजली गिरने पर योगी सरकार अलर्ट मोड में
38 हजार करोड़ की लागत से बनेगी नई तापीय परियोजना
कैबिनेट ने 3×800 मेगावाट क्षमता की नई तापीय ऊर्जा परियोजना को मंजूरी दी है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना पर लगभग 38,358 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। परियोजना को प्रदेश सरकार और NTPC के संयुक्त उपक्रम के जरिए स्थापित और संचालित किया जाएगा।सरकार के मुताबिक यह परियोजना उत्तर प्रदेश को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होगी। ऊर्जा क्षेत्र में बढ़ती मांग को देखते हुए सरकार लगातार उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर जोर दे रही है।
पंचायत चुनाव और मेट्रो विस्तार पर भी बड़ा फैसला
कैबिनेट बैठक में केवल ऊर्जा क्षेत्र ही नहीं, बल्कि पंचायत चुनाव और शहरी विकास से जुड़े महत्वपूर्ण प्रस्तावों पर भी मुहर लगी। सरकार ने पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण तय करने के लिए नए आयोग के गठन को मंजूरी दी है। इसके साथ ही समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग बनाने का भी फैसला लिया गया।इसके अलावा लखनऊ मेट्रो के विस्तार को लेकर चारबाग-बसंतकुंज मेट्रो कॉरिडोर परियोजना को भी हरी झंडी दी गई है। माना जा रहा है कि इससे राजधानी में ट्रैफिक व्यवस्था को बेहतर बनाने में मदद मिलेगी।
ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर तेजी से बढ़ रहा यूपी
नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री एके शर्मा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की प्रेरणा और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश ऊर्जा आत्मनिर्भरता की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।उन्होंने बताया कि पिछले चार वर्षों में प्रदेश में लगभग 4000 मेगावाट नई तापीय ऊर्जा क्षमता जोड़ी गई है। इससे राज्य की कुल तापीय ऊर्जा क्षमता लगभग दोगुनी हो चुकी है। अब सरकार इसे तीन गुना करने के लक्ष्य पर काम कर रही है।
उद्योग, किसानों और आम जनता को मिलेगा फायदा
ऊर्जा मंत्री ने कहा कि वर्ष 2023 के ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट के दौरान इस परियोजना के लिए एनटीपीसी के साथ समझौता किया गया था। अब कैबिनेट से मंजूरी मिलने के बाद परियोजना को जमीन पर उतारने की प्रक्रिया तेज होगी।सरकार का मानना है कि परियोजना शुरू होने के बाद उद्योगों, किसानों, व्यापारियों और आम नागरिकों को पर्याप्त बिजली मिल सकेगी। इससे प्रदेश में रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे और आर्थिक गतिविधियों को नई रफ्तार मिलेगी।सरकार ने साफ किया है कि उसका लक्ष्य प्रदेश के हर गांव, हर घर और हर उद्योग तक गुणवत्तापूर्ण बिजली पहुंचाना है।










