रांची, अंग भारत। झारखंड की हेमंत सोरेन सरकार पर भारतीय जनता पार्टी ने एक अत्यंत गंभीर आरोप लगाते हुए राज्य के ट्रेजरी विभाग में करीब 10 हजार करोड़ रुपये के बड़े घोटाले को दबाने का दावा किया है। पार्टी का स्पष्ट कहना है कि सरकार इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने के बजाय केवल लीपापोती कर रही है, ताकि असली दोषियों और बड़े अधिकारियों को बचाया जा सके। भाजपा के प्रदेश प्रवक्ता प्रतुल शाहदेव ने इस पूरे मामले को “मदर ऑफ स्कैम” करार दिया है और मांग की है कि इस धांधली की सच्चाई सामने लाने के लिए सीबीआई और ईडी जैसी केंद्रीय जांच एजेंसियों का हस्तक्षेप अनिवार्य है।
तबादलों की असल सच्चाई
भाजपा ने आरोप लगाया कि वित्त विभाग द्वारा हाल ही में की गई प्रशासनिक कार्रवाई केवल आंखों में धूल झोंकने के समान है। राज्य सरकार ने केवल उन क्लर्कों और निचले स्तर के कर्मचारियों का तबादला किया है जो एक ही सीट पर तीन साल से जमे थे। सवाल यह उठता है कि जिन पुलिस अधीक्षक (एसपी), पुलिस उपाधीक्षक (डीएसपी) और ट्रेजरी के शीर्ष अधिकारियों की नाक के नीचे यह पूरा खेल हुआ, उन पर कोई आंच क्यों नहीं आई? उन्हें उनके पदों पर बनाए रखना यह संकेत देता है कि सरकार जांच को प्रभावित करना चाहती है।
जांच टीम की संदिग्ध संरचना
विशेष जांच टीम (एसआईटी) के गठन और उसकी कार्यप्रणाली पर भी भाजपा ने बड़े सवाल खड़े किए हैं:
- एसआईटी का नेतृत्व कर रहे अधिकारियों का उन जिलों में कार्यकाल रहा है जहां से सबसे पहले गड़बड़ियों की सूचना मिली थी।
- जांच के दायरे को पहले 2020 से रखा गया था, लेकिन महालेखा परीक्षक की आपत्ति के बाद इसे 2011 तक ले जाया गया, जिसे साक्ष्यों को उलझाने की चाल माना जा रहा है।
- सीआईडी के वर्तमान आईजी को जांच से दूर रखना और मानवाधिकार विंग के अधिकारियों को जिम्मेदारी देना जांच की नीयत पर संदेह पैदा करता है।
बोकारो ट्रेजरी का सोना
प्रेस वार्ता के दौरान भाजपा ने बोकारो ट्रेजरी के स्ट्रांग रूम को लेकर एक सनसनीखेज दावा किया। प्रतुल शाहदेव ने कहा कि वहां करीब 12 से 14 किलो सोना जमा है, जिसकी स्थिति बेहद संदिग्ध है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस सोने का भौतिक सत्यापन (Physical Verification) बेहद जरूरी है। यदि सरकार इसमें देरी कर रही है, तो यह स्पष्ट है कि ट्रेजरी के अंदर कुछ तो ऐसा है जिसे जनता की नजरों से छिपाया जा रहा है।
एजी रिपोर्ट की हैरान करने वाली आंकड़े
प्रिंसिपल एजी की रिपोर्ट (2 अप्रैल 2026) ने सरकारी दावों की हवा निकाल दी है। इस रिपोर्ट में दी गई जानकारियों को अगर देखा जाए, तो यह किसी बड़े संगठित अपराध की ओर इशारा करती हैं:
- महंगाई भत्ता (DA): इसमें 58 प्रतिशत की असामान्य और चौंकाने वाली वृद्धि दर्ज की गई है।
- तिथि में छेड़छाड़: 2175 मामलों में जन्मतिथि में बदलाव किया गया है, जो सीधे तौर पर पेंशन और रिटायरमेंट लाभों में घोटाले की ओर इशारा करता है।
- पैन कार्ड घोटाला: लगभग 2890 पैन नंबरों के डेटा में गड़बड़ी पाई गई है।
- जॉइनिंग डेटा: 5037 कर्मचारियों की जॉइनिंग तिथि में हेराफेरी की गई है, ताकि गलत तरीके से वेतन भुगतान किया जा सके।
विपक्ष का रुख और चेतावनी
भाजपा ने चेतावनी दी है कि यदि इस 10 हजार करोड़ रुपये के घोटाले की निष्पक्ष जांच केंद्रीय एजेंसियों (ED/CBI) से नहीं करवाई गई, तो पार्टी इसे चुपचाप नहीं देखेगी। भाजपा नेताओं का मानना है कि राज्य की मशीनरी खुद ही इस मामले में आरोपित है, इसलिए वे निष्पक्ष जांच की उम्मीद नहीं कर सकते। सरकार की ओर से इस पूरे मामले पर चुप्पी या टालमटोल भरा रवैया राज्य की जनता के पैसे के साथ खिलवाड़ जैसा है।
आने वाले दिनों में यह मुद्दा झारखंड की राजनीति में और भी अधिक तूल पकड़ सकता है। जब तक सरकार एजी रिपोर्ट में उठाए गए बिंदुओं का बिंदुवार जवाब नहीं देती और जवाबदेह अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं करती, तब तक यह घोटाला राज्य सरकार के लिए बड़ी राजनीतिक मुसीबत बना रहेगा।








