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सनसनीखेज खबरों पर लगाम, टीवी TRP रिपोर्टिंग बंद

नई दिल्ली,अंग भारत। पश्चिम एशिया में जारी तनावपूर्ण हालात के बीच केंद्र सरकार ने एक बार फिर टीवी समाचार चैनलों की टेलीविजन रेटिंग पॉइंट्स (टीआरपी) पर रोक को चार सप्ताह के लिए बढ़ाने का फैसला किया है। सरकार का यह कदम ऐसे समय में आया है जब इजराइल-ईरान संघर्ष को लेकर कई चैनलों पर सनसनीखेज और अपुष्ट खबरें प्रसारित होने की शिकायतें सामने आई थीं।

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सरकार का सख्त रुख, TRP रिपोर्टिंग पर रोक
सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने ब्रॉडकास्ट ऑडियंस रिसर्च काउंसिल (BARC) को निर्देश जारी करते हुए कहा है कि फिलहाल टीआरपी रिपोर्टिंग को स्थगित रखा जाए। मंत्रालय का मानना है कि मौजूदा परिस्थितियों में टीआरपी की होड़ के चलते कुछ चैनल खबरों को बढ़ा-चढ़ाकर पेश कर रहे हैं, जिससे जनता में भ्रम और डर का माहौल बन सकता है।

सनसनीखेज कवरेज पर चिंता जताई
मंत्रालय ने अपने आदेश में स्पष्ट कहा है कि कुछ समाचार चैनल युद्ध जैसी संवेदनशील स्थिति को अनावश्यक रूप से सनसनीखेज बना रहे हैं। इससे खासकर उन लोगों में चिंता बढ़ सकती है, जिनके परिजन प्रभावित क्षेत्रों में रहते हैं। सरकार का मानना है कि इस तरह की रिपोर्टिंग सामाजिक तनाव को भी बढ़ा सकती है।

पहले भी लग चुकी है रोक
उल्लेखनीय है कि इससे पहले 6 मार्च को भी सरकार ने इसी कारण से टीआरपी पर चार सप्ताह के लिए रोक लगाई थी। अब मौजूदा हालात को देखते हुए इस अवधि को आगे बढ़ा दिया गया है। इसका उद्देश्य मीडिया संस्थानों को जिम्मेदार और संतुलित रिपोर्टिंग के लिए प्रोत्साहित करना है।

चैनलों के प्रदर्शन का नहीं होगा मूल्यांकन
इस अवधि के दौरान समाचार चैनलों के प्रदर्शन का आकलन सामान्य प्रक्रिया के तहत नहीं किया जाएगा। यानी टीआरपी के आधार पर चैनलों की रैंकिंग या लोकप्रियता का कोई आधिकारिक डेटा जारी नहीं होगा। इससे चैनलों पर प्रतिस्पर्धा का दबाव कम होगा और वे बिना दबाव के तथ्यात्मक रिपोर्टिंग कर सकेंगे।

जनता में दहशत रोकना प्राथमिकता
सरकार का कहना है कि राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय संकट के समय मीडिया की जिम्मेदारी और बढ़ जाती है। ऐसे में अपुष्ट खबरों या अटकलों से जनता में भय और असुरक्षा का माहौल बन सकता है, जिसे रोकना जरूरी है।

जिम्मेदार पत्रकारिता पर जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि यह कदम मीडिया संस्थानों को यह संदेश देता है कि खबरों की प्रस्तुति में संतुलन और सटीकता बेहद जरूरी है। टीआरपी की होड़ से अलग हटकर यदि चैनल तथ्य आधारित रिपोर्टिंग पर ध्यान देंगे, तो इससे दर्शकों का भरोसा भी मजबूत होगा।कुल मिलाकर, सरकार का यह फैसला मौजूदा संवेदनशील अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों में मीडिया की भूमिका को अधिक जिम्मेदार बनाने की दिशा में उठाया गया एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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