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खरगे के बयान पर BJP का हमला, मांगी सार्वजनिक माफी

नई दिल्ली,अंग भारत। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे द्वारा गुजरात पर की गई विवादास्पद टिप्पणी ने भारतीय राजनीति में उबाल ला दिया है। भाजपा ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए खरगे से तत्काल सार्वजनिक माफी की मांग की है। भाजपा के वरिष्ठ नेता और सांसद रविशंकर प्रसाद ने पार्टी मुख्यालय में आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में इस बयान को न केवल अपमानजनक बताया, बल्कि इसे गुजरात की गौरवशाली विरासत और वहां की जनता का सीधा अपमान करार दिया।

विवाद की असली जड़

मामला तब गरमाया जब कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने गुजरात को लेकर कुछ ऐसी बातें कहीं जिन्हें भाजपा ने ‘असहनीय’ करार दिया। रविशंकर प्रसाद के अनुसार, किसी राष्ट्रीय दल के शीर्ष नेता का एक पूरे प्रदेश की जनता के बारे में इस तरह की भाषा का उपयोग करना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के दायरे से बाहर है। भाजपा का मानना है कि यह बयान राजनीतिक मतभेद से ऊपर उठकर एक पूरे राज्य की अस्मिता पर हमला है।

गुजरात की विकास यात्रा

भाजपा ने पलटवार करते हुए गुजरात के विकास मॉडल को सामने रखा है। रविशंकर प्रसाद ने आंकड़ों का हवाला देते हुए बताया कि:

  • गुजरात की साक्षरता दर लगभग 82 प्रतिशत है, जो इसे देश के सबसे शिक्षित राज्यों में से एक बनाती है।
  • प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में राज्य ने शिक्षा, बुनियादी ढांचे और औद्योगिक विकास में लंबी छलांग लगाई है।
  • राज्य ने आर्थिक सूचकांकों पर लगातार बेहतर प्रदर्शन कर देश की जीडीपी में बड़ा योगदान दिया है।

महान हस्तियों का अपमान

भाजपा ने इस बयान को केवल एक राजनीतिक टिप्पणी नहीं, बल्कि गुजरात की माटी से उपजे महापुरुषों का अपमान बताया है। गुजरात वह पावन भूमि है जिसने भारत को ऐसे महान व्यक्तित्व दिए जिन्होंने राष्ट्र निर्माण में अपनी पूरी ऊर्जा लगा दी। भाजपा ने विशेष रूप से इन नामों पर जोर दिया:

  • महात्मा गांधी (राष्ट्रपिता)
  • सरदार वल्लभभाई पटेल (लौह पुरुष)
  • विक्रम साराभाई (अंतरिक्ष विज्ञान के जनक)
  • मोरारजी देसाई (पूर्व प्रधानमंत्री)

रविशंकर प्रसाद ने सवाल किया कि क्या ऐसे महान सपूतों की जन्मभूमि को अपमानित करना कांग्रेस की नई रणनीति है?

गांधी परिवार की चुप्पी

भाजपा ने इस विवाद को कांग्रेस के शीर्ष नेतृत्व तक खींच लिया है। रविशंकर प्रसाद ने स्पष्ट शब्दों में सोनिया गांधी और प्रियंका गांधी वाड्रा से जवाब मांगा है। उन्होंने पूछा कि क्या कांग्रेस आलाकमान खरगे के इस बयान का समर्थन करता है? भाजपा का आरोप है कि कांग्रेस का शीर्ष नेतृत्व मौन रहकर इस तरह की बयानबाजी को बढ़ावा दे रहा है, जो देश की सामाजिक समरसता के लिए खतरनाक है।

असम का भी जिक्र

विवाद केवल गुजरात तक सीमित नहीं रहा। भाजपा ने खरगे द्वारा असम में दिए गए बयानों पर भी कड़ी आपत्ति दर्ज की। प्रसाद का मानना है कि खरगे की भाषा से समाज में सांप्रदायिक तनाव बढ़ने की आशंका है। भाजपा के मुताबिक, कांग्रेस ‘बांटो और राज करो’ की पुरानी नीति पर चल रही है, जिससे देश की एकता और अखंडता पर प्रतिकूल असर पड़ सकता है।

क्या है आगे की राह?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह मुद्दा आने वाले दिनों में और अधिक तूल पकड़ेगा। भाजपा इसे चुनावी मुद्दा बनाने की तैयारी में है, वहीं कांग्रेस अभी तक किसी स्पष्ट आधिकारिक प्रतिक्रिया से बच रही है।

“लोकतंत्र में आलोचना स्वीकार्य है, लेकिन किसी प्रदेश की अस्मिता पर चोट करना और महापुरुषों की कर्मभूमि को अपमानित करना अक्षम्य है।” – रविशंकर प्रसाद, वरिष्ठ भाजपा नेता।

कुल मिलाकर, इस बयान ने राजनीतिक गलियारों में गरमाहट पैदा कर दी है। अब सबकी नजरें इस पर टिकी हैं कि क्या कांग्रेस अध्यक्ष अपनी बात वापस लेंगे या यह विवाद और गहराता जाएगा। भाजपा का रुख साफ है—बिना माफी के इस मामले पर कोई समझौता नहीं होगा।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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