तेहरान/वाशिंगटन,अंग भारत। मध्य-पूर्व में चल रहा तनाव एक बेहद खतरनाक मोड़ पर है, जहाँ ईरान ने अपने परमाणु ठिकानों पर हुए हमलों को स्वीकार करते हुए सीधे तौर पर अमेरिका और इजराइल को घेरे में लिया है। इस टकराव का सबसे डरावना पहलू ‘होर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को बंद करने की चेतावनी है। यदि ईरान वास्तव में इस समुद्री रास्ते को ब्लॉक करता है, तो दुनिया में तेल और गैस की कीमतों में आग लग जाएगी, जिससे वैश्विक अर्थव्यवस्था चरमरा सकती है। डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को बिजली संयंत्रों और बुनियादी ढांचे को तबाह करने की जो धमकी दी है, उसने इस आग में घी डालने का काम किया है।
परमाणु केंद्र पर हमला
ईरानी परमाणु ऊर्जा संगठन ने हाल ही में यज्द प्रांत के अर्दाकान स्थित ‘शाहिद रजाई नेजाद’ सुविधा पर हमले की पुष्टि की है। यह केंद्र केवल एक इमारत नहीं है, बल्कि यह ईरान के परमाणु कार्यक्रम की धड़कन है। यहाँ यूरेनियम अयस्क को ‘येलोकेक’ में बदला जाता है, जिसकी क्षमता लगभग 60 टन सालाना है। हमले के बाद ईरान ने इसे अंतरराष्ट्रीय कानूनों और शांतिपूर्ण परमाणु संस्थानों की सुरक्षा का खुला उल्लंघन करार दिया है।
होर्मुज की अहमियत
होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण ‘चोकपॉइंट’ है। दुनिया का करीब 20% तेल इसी संकरी समुद्री पट्टी से गुजरता है। ईरान की तरफ से इसे बंद करने की धमकी को हल्के में नहीं लिया जा सकता। इसके परिणाम सीधे तौर पर भारत सहित पूरी दुनिया पर होंगे:
- पेट्रोल और डीजल की कीमतों में अचानक भारी उछाल।
- कच्चे तेल की सप्लाई चेन का पूरी तरह बाधित होना।
- माल ढुलाई और वैश्विक व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा पर संकट।
इजराइल के हवाई हमले
इजराइल डिफेंस फोर्सेज (IDF) ने तेहरान, करज और मेहराबाद अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे के आसपास के इलाकों को निशाना बनाया है। इन हमलों में मिसाइल साइट्स और पेट्रोकेमिकल संयंत्रों को भारी नुकसान पहुँचा है। तेहरान के निवासियों ने तड़के जोरदार धमाकों की आवाजें सुनीं, जिससे पूरे ईरान में हड़कंप मच गया। सैन्य जानकारों का मानना है कि इजराइल की यह कार्रवाई ईरान की सामरिक शक्ति को कमजोर करने की एक सोची-समझी कोशिश है।
तनाव और सरकारी प्रतिक्रिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का रुख बेहद सख्त है। उन्होंने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान ने होर्मुज को नहीं खोला, तो उसके बिजली संयंत्र और महत्वपूर्ण पुल निशाना बनेंगे। दूसरी ओर, ईरान ने संघर्षविराम के किसी भी अस्थायी प्रस्ताव को खारिज कर दिया है। तेहरान का तर्क है कि उसे टुकड़े-टुकड़े में शांति नहीं, बल्कि एक स्थायी समाधान चाहिए।
आम लोगों पर असर
ईरान के भीतर डर और देशभक्ति का मिला-जुला माहौल है। सरकार ने युवाओं से अपील की है कि वे संभावित हमलों को रोकने के लिए बिजली संयंत्रों के आसपास ‘मानव श्रृंखला’ बनाएं। हालांकि, यह कदम कितना प्रभावी होगा, यह कहना मुश्किल है, लेकिन यह दर्शाता है कि ईरानी सरकार अब एक बड़े युद्ध की आशंका के लिए तैयारी कर रही है।
भविष्य का संकट
पश्चिम एशिया में स्थिति बेहद नाजुक है। इजराइल के हमले, अमेरिका की धमकियां और ईरान की जिद ने इस पूरे क्षेत्र को बारूद के ढेर पर खड़ा कर दिया है। 45 दिनों के संघर्षविराम प्रस्ताव को ठुकराकर ईरान ने संकेत दे दिया है कि वह झुकने वाला नहीं है। आने वाले कुछ दिन वैश्विक शांति और आर्थिक स्थिरता के लिए निर्णायक साबित होंगे। क्या दुनिया एक और बड़े तेल संकट की ओर बढ़ रही है? फिलहाल इसका जवाब किसी के पास नहीं है, लेकिन होर्मुज की घेराबंदी निश्चित रूप से तबाही का सबसे बड़ा कारण बन सकती है।








