निर्मली/सुपौल/अंग भारत। विश्व पर्यावरण दिवस के मौके पर शुक्रवार को निर्मली अनुमंडल परिसर में एक बड़ा वृक्षारोपण अभियान चलाया गया, जिसका मुख्य उद्देश्य बिगड़ते पर्यावरण को बचाना और आने वाली पीढ़ी के लिए हरियाली सुरक्षित करना था। अनुमंडल पदाधिकारी धीरज कुमार सिन्हा के नेतृत्व में प्रशासनिक अधिकारियों, वकीलों और स्थानीय नागरिकों ने बड़ी संख्या में पौधे रोपे और पर्यावरण संरक्षण का कड़ा संकल्प लिया। यह आयोजन महज रस्म अदायगी नहीं था, बल्कि बढ़ती गर्मी और जलवायु संकट के बीच एक सक्रिय कदम के रूप में देखा गया।
पेड़ ही जीवन का आधार
आज के दौर में जब हर साल तापमान पिछले रिकॉर्ड तोड़ रहा है, निर्मली के अधिकारियों ने इस संकट की गंभीरता को समझते हुए अनुमंडल परिसर को हरा-भरा बनाने का बीड़ा उठाया। कार्यक्रम में एसडीएम धीरज कुमार सिन्हा, एसडीपीओ अनुपेश नारायण, भूमि सुधार उप समाहर्ता साहेब रसूल और अन्य प्रशासनिक अधिकारियों ने सक्रिय भागीदारी निभाई। उन्होंने न केवल पौधे लगाए, बल्कि लोगों को यह भी समझाया कि पेड़ लगाना एक जिम्मेदारी है, जिसे हमें साल भर निभाना चाहिए।
जलवायु परिवर्तन एक खतरा
समारोह के दौरान एसडीएम धीरज कुमार सिन्हा ने स्पष्ट किया कि अब पर्यावरण के साथ छेड़छाड़ करना भारी पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि:
- पेड़ों की कटाई से ग्लोबल वार्मिंग तेजी से बढ़ रही है।
- मिट्टी की नमी कम होने से खेती पर बुरा असर पड़ रहा है।
- प्राकृतिक संतुलन को बनाए रखना अब हमारी मजबूरी बन चुका है।
उनका संदेश साफ था—पेड़ लगाना आसान है, लेकिन उसे बड़ा करना असली उपलब्धि है। उन्होंने वहां मौजूद लोगों से अपील की कि वे अपने लगाए हुए पौधों की तब तक देखभाल करें जब तक वे खुद जीवित रहने में सक्षम न हो जाएं।
हर व्यक्ति का संकल्प
एसडीपीओ अनुपेश नारायण ने जन भागीदारी पर जोर देते हुए एक व्यावहारिक सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि अगर देश का हर नागरिक साल में सिर्फ एक पौधा भी पूरी ईमानदारी से बड़ा कर ले, तो कुछ ही सालों में भारत का जंगल कवर कई गुना बढ़ जाएगा। यह छोटा सा व्यक्तिगत प्रयास ही बड़े राष्ट्रीय बदलाव की नींव रखता है। उन्होंने पर्यावरण को शुद्ध वायु का इकलौता कारखाना बताया।
आयोजनों में जोड़ें पौधे
अनुमंडल निर्वाचन पदाधिकारी मनोज कुमार ने पौधारोपण को उत्सव से जोड़ने की अनूठी अपील की। उन्होंने कहा कि हम अपने जीवन के विशेष दिनों को कैसे मनाते हैं, यह हमारी संस्कृति तय करती है। यदि हम इसे एक चलन बना लें, तो यह क्रांति बन सकती है:
- बच्चों के जन्मदिन पर एक पौधा लगाएं।
- शादी की सालगिरह को वृक्षारोपण के नाम करें।
- सफलता मिलने पर स्मृति के तौर पर पेड़ रोपें।
जागरूकता का प्रभाव
भूमि सुधार उप समाहर्ता साहेब रसूल ने माना कि विश्व पर्यावरण दिवस का अर्थ केवल चर्चा करना नहीं है, बल्कि लोगों के व्यवहार में बदलाव लाना है। जब प्रशासनिक अधिकारी खुद मिट्टी में उतरकर काम करते हैं, तो आम जनता भी प्रेरित होती है। निर्मली में हुआ यह कार्यक्रम इसी सोच का नतीजा है कि सरकारी दफ्तर अब केवल फाइलें निपटाने की जगह नहीं, बल्कि समाज को रास्ता दिखाने के केंद्र भी हैं।
भविष्य की सुरक्षित दिशा
विधिज्ञ संघ के संयुक्त सचिव मुकेश कुमार नाहर ने कानून और पर्यावरण के अंतर्संबंधों पर बात की। उन्होंने जोर देकर कहा कि स्वस्थ जीवन जीने का अधिकार एक मूल अधिकार जैसा है, और स्वच्छ हवा-पानी के बिना यह संभव नहीं है। उनके अनुसार, आने वाली पीढ़ियां हमें हमारे आज के कार्यों के लिए ही याद रखेंगी। कार्यक्रम का समापन सामूहिक संकल्प के साथ हुआ, जिसमें सभी ने वादा किया कि वे अपने परिवेश को हरा-भरा रखने के लिए पूरी कोशिश करेंगे।
“वृक्षारोपण एक ऐसा निवेश है जिसका मुनाफा आने वाली सदियां उठाएंगी। आज का एक पौधा कल की जीवन रक्षक औषधि है।”
यह आयोजन दिखाता है कि छोटे कस्बों में भी पर्यावरण के प्रति जागरूकता का स्तर काफी ऊंचा उठ चुका है। निर्मली का यह हरित संकल्प अन्य क्षेत्रों के लिए भी एक बेहतरीन उदाहरण है कि कैसे प्रशासनिक नेतृत्व और जन भागीदारी मिलकर बदलाव ला सकते हैं।








