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आपदा जोखिम न्यूनीकरण में अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी: सीएम मोहन माझी

भुवनेश्वर,अंग भारत। ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने हाल ही में पुरी में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) डिजास्टर रिस्क रिडक्शन वर्किंग ग्रुप की बैठक का उद्घाटन करते हुए यह स्पष्ट किया कि भविष्य की प्राकृतिक आपदाओं से निपटने का एकमात्र कारगर रास्ता अंतरराष्ट्रीय सहयोग और आपसी तकनीकी साझाकरण है। आज के दौर में जलवायु परिवर्तन केवल एक पर्यावरणीय मुद्दा नहीं, बल्कि यह वैश्विक अर्थव्यवस्था और मानवीय सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती बन चुका है। सीएम माझी का मानना है कि आपदाओं को रोकने के लिए अब हमें केवल बचाव तक सीमित नहीं रहना होगा, बल्कि जोखिम को कम करने वाली सटीक तकनीकों पर जोर देना होगा।

आपदा प्रबंधन वैश्विक प्राथमिकता

बैठक में ब्रिक्स देशों के प्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि आपदाएं अब किसी सीमा या क्षेत्र तक सीमित नहीं हैं। जब कोई बड़ी आपदा आती है, तो उसका असर पूरी वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला (supply chain) और आर्थिक स्थिरता पर पड़ता है। इसलिए, सदस्य देशों के बीच एक मजबूत समन्वय तंत्र होना समय की सबसे बड़ी मांग है। उन्होंने आपदा जोखिम न्यूनीकरण को सतत विकास का आधार स्तंभ बताया और कहा कि बिना तैयारी के विकास के सपने देखना जोखिम भरा है।

ओडिशा का सफल मॉडल

ओडिशा ने पिछले कुछ वर्षों में आपदा प्रबंधन में दुनिया भर में अपनी एक अलग पहचान बनाई है। मुख्यमंत्री ने विशेष रूप से ओडिशा के ‘जीरो डेथ’ (Zero Casualty) मिशन का जिक्र किया। इस मॉडल की सफलता के पीछे मुख्य स्तंभ ये हैं:

  • उन्नत पूर्व चेतावनी प्रणाली: आपदा आने से घंटों पहले सटीक जानकारी लोगों तक पहुंचाना।
  • समुदाय की भागीदारी: केवल प्रशासन नहीं, बल्कि स्थानीय लोगों को आपदा के दौरान निपटने के लिए प्रशिक्षित करना।
  • मजबूत बुनियादी ढांचा: चक्रवात रोधी आश्रय स्थल (Cyclone Shelters) और सुरक्षित आवास का निर्माण।
  • वैज्ञानिक योजना: आपदा के पैटर्न को समझने के लिए डाटा का उपयोग करना।

जलवायु और आपदा चुनौतियां

बढ़ते शहरीकरण और जंगलों के घटने के कारण आपदाओं की आवृत्ति यानी बार-बार होने की दर में इजाफा हुआ है। सीएम माझी ने बताया कि ओडिशा जैसे राज्य, जो तटीय सीमा पर स्थित हैं, वहां चक्रवात, लू और बिजली गिरने की घटनाएं अक्सर चिंता का विषय रहती हैं। इन चुनौतियों का सामना करने के लिए अब पुरानी नीतियों से हटकर आधुनिक और जोखिम-आधारित विकास मॉडल को अपनाना पड़ रहा है, ताकि नुकसान को न्यूनतम रखा जा सके।

नई बुनियादी ढांचा परियोजनाएं

ओडिशा सरकार आपदा से बचाव के लिए बड़े पैमाने पर इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स पर निवेश कर रही है। मुख्यमंत्री ने कुछ प्रमुख परियोजनाओं का उल्लेख किया जो आपदा प्रबंधन में मील का पत्थर साबित होंगी:

  • ग्रीनफील्ड कोस्टल हाईवे: 160 किलोमीटर लंबा यह हाईवे न केवल व्यापार बढ़ाएगा बल्कि आपदा के समय राहत और बचाव कार्य में तेजी लाएगा।
  • कैपिटल रीजन रिंग रोड: यह शहरी क्षेत्र में यातायात के दबाव और निकासी व्यवस्था को बेहतर बनाएगा।
  • भुवनेश्वर-कटक-पुरी-पारादीप आर्थिक गलियारा: यह क्षेत्र के आर्थिक विकास के साथ-साथ आपदा के प्रति लचीला (Disaster Resilient) ढांचा प्रदान करेगा।

पीएम मोदी का 10-सूत्रीय एजेंडा

सीएम माझी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा आपदा प्रबंधन के लिए दिए गए 10-सूत्रीय एजेंडा की जमकर सराहना की। उन्होंने कहा कि यह एजेंडा वैश्विक स्तर पर आपदा जोखिम कम करने के लिए एक ‘ब्लूप्रिंट’ की तरह काम कर रहा है। इसमें तकनीक का उपयोग, अंतरराष्ट्रीय सहयोग, और जोखिम को पहले ही भांपने की रणनीति पर विशेष जोर दिया गया है। भारत आज इस दिशा में दुनिया का नेतृत्व कर रहा है।

1999 महाचक्रवात से सीख

राजस्व एवं आपदा प्रबंधन मंत्री सुरेश पुजारी ने याद दिलाया कि 1999 के ओडिशा महाचक्रवात ने प्रदेश को झकझोर कर रख दिया था। उस भीषण त्रासदी ने यह सिखाया कि यदि सिस्टम तैयार नहीं है, तो जीवन की भारी क्षति हो सकती है। उसी सीख का परिणाम है कि आज ओडिशा में ‘लास्ट माइल कनेक्टिविटी’ यानी सूचना को गांव के आखिरी छोर तक पहुंचाने की एक अचूक व्यवस्था विकसित हो चुकी है। अब राज्य में आपदा आने पर घबराने के बजाय, उसे नियंत्रित करने का साहस दिखाई देता है, जो इस बैठक के माध्यम से अन्य देशों के साथ भी साझा किया जा रहा है।

“आपदा जोखिम न्यूनीकरण अब कोई विकल्प नहीं, बल्कि एक अनिवार्य जीवन रक्षा प्रणाली बन चुकी है। ब्रिक्स देशों का यह मंच एक ऐसी सुरक्षा ढाल तैयार करेगा, जिससे भविष्य की अनिश्चितताओं से सुरक्षित रहा जा सके।” – मोहन चरण माझी, मुख्यमंत्री, ओडिशा।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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