काठमांडू,अंग भारत। नेपाल में भोटेकोशी और त्रिशूली नदियों में आई भीषण बाढ़ के तीन दिन बाद भी यह साफ नहीं हो पाया है कि आपदा से कुल कितने लोग प्रभावित हुए हैं और कितने लोग लापता हैं। हालांकि, सरकार के शुरुआती तकनीकी आकलन में करीब 5,000 लोगों के संपर्कविहीन होने की आशंका जताई गई है। संचार व्यवस्था ठप होने और कई इलाकों में पहुंचना मुश्किल होने के कारण सही आंकड़ा जुटाने में परेशानी हो रही है।
मोबाइल डेटा से सामने आया बड़ा आंकड़ा
नेपाल के गृह मंत्रालय के एक अधिकारी के मुताबिक, बाढ़ आने से पहले रसुवा के गोसाईंकुंड से लेकर नुवाकोट के देवीघाट तक के इलाके में करीब 5,000 मोबाइल उपयोगकर्ता सक्रिय थे। बाढ़ के बाद इन मोबाइल नंबरों से संपर्क नहीं हो सका है।अधिकारियों ने नेपाल टेलीकॉम और एनसेल से मिले आंकड़ों के आधार पर यह शुरुआती अनुमान लगाया है। हालांकि, संपर्क नहीं हो पाने का मतलब यह जरूरी नहीं है कि सभी लोग लापता हैं। बाढ़ और भूस्खलन के कारण मोबाइल नेटवर्क और बिजली व्यवस्था प्रभावित होने से भी लोगों से संपर्क टूट सकता है।फिलहाल सरकार इन आंकड़ों की मदद से प्रभावित इलाके और संभावित रूप से संपर्कविहीन लोगों की पहचान करने की कोशिश कर रही है।
1,924 लोगों के संपर्कविहीन होने की सूचना
राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के आंकड़ों के अनुसार, अब तक 1,924 लोगों के संपर्कविहीन होने की जानकारी सामने आई है। इनमें 933 लोग जलविद्युत परियोजनाओं में काम करने वाले कर्मचारी बताए जा रहे हैं।बाढ़ से प्रभावित इलाके में कई जलविद्युत परियोजनाएं मौजूद हैं। अचानक आई बाढ़ और भूस्खलन के कारण इन परियोजनाओं से जुड़े कई कर्मचारियों से संपर्क टूट गया है। राहत और बचाव दल इन इलाकों तक पहुंचने की कोशिश कर रहे हैं।
517 विदेशी नागरिक भी हो सकते हैं प्रभावित
बाढ़ और भूस्खलन के बाद संपर्कविहीन विदेशी नागरिकों की संख्या भी करीब 517 बताई जा रही है। इनमें पर्यटक और दूसरे काम से नेपाल पहुंचे विदेशी नागरिक शामिल हो सकते हैं।हालांकि, विदेशी नागरिकों से जुड़े आंकड़े भी अभी पूरी तरह स्पष्ट नहीं हैं। नेपाल सरकार को शुक्रवार शाम तक लापता या संपर्कविहीन लोगों के संबंध में करीब 2,000 आवेदन मिल चुके थे। इन शिकायतों की जांच की जा रही है, ताकि यह पता लगाया जा सके कि वास्तव में कितने लोग लापता हैं और कितने लोगों से केवल संचार संपर्क टूटा है।
पर्यटकों की सुरक्षा भी बनी चिंता
संपर्कविहीन लोगों में रसुवा और नुवाकोट के स्थानीय निवासियों के अलावा गोसाईंकुंड घूमने गए पर्यटकों के भी शामिल होने की जानकारी है। गोसाईंकुंड नेपाल का प्रमुख धार्मिक और पर्यटन स्थल है, जहां बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं।बाढ़ और भूस्खलन के कारण कई रास्ते प्रभावित हुए हैं। ऐसे में वहां मौजूद लोगों तक पहुंचना राहत दलों के लिए आसान नहीं है। प्रशासन को आशंका है कि कई लोग सुरक्षित स्थानों पर हो सकते हैं, लेकिन संचार व्यवस्था बाधित होने के कारण उनके बारे में जानकारी नहीं मिल पा रही है।
राहत और बचाव अभियान जारी
नेपाल सरकार और सुरक्षा एजेंसियों ने प्रभावित इलाकों में तलाश और बचाव अभियान तेज कर दिया है। सुरक्षा बलों की टीमें संपर्कविहीन लोगों की तलाश कर रही हैं और जहां संभव है, वहां फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया जा रहा है।प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती दूरदराज के इलाकों तक पहुंचना है। बाढ़ के साथ हुए भूस्खलन ने कई जगह सड़कों और दूसरे संपर्क मार्गों को नुकसान पहुंचाया है। इससे राहत दलों को प्रभावित क्षेत्रों तक पहुंचने में परेशानी हो रही है।
सही आंकड़े जुटाने में लग सकता है समय
अधिकारियों का कहना है कि अभी सामने आ रहे आंकड़े शुरुआती हैं और स्थिति पूरी तरह साफ होने में समय लग सकता है। मोबाइल डेटा के आधार पर करीब 5,000 लोगों के संपर्कविहीन होने का अनुमान लगाया गया है, जबकि आधिकारिक तौर पर 1,924 लोगों के संबंध में जानकारी सामने आई है।सरकार अब अलग-अलग स्रोतों से मिली जानकारी का मिलान कर रही है। स्थानीय प्रशासन, दूरसंचार कंपनियों और सुरक्षा एजेंसियों के सहयोग से लोगों की वास्तविक स्थिति पता लगाने की कोशिश की जा रही है।फिलहाल सरकार की प्राथमिकता संपर्कविहीन लोगों का पता लगाना, फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना और प्रभावित इलाकों में संचार व संपर्क व्यवस्था बहाल करना है। आने वाले दिनों में बचाव अभियान आगे बढ़ने के साथ लापता और प्रभावित लोगों की संख्या की अधिक स्पष्ट तस्वीर सामने आने की उम्मीद है।







