पटना,अंग भारत। बिहार में सरकारी नौकरियों की मांग को लेकर छात्रों का आंदोलन मंगलवार को उस समय उग्र हो गया, जब गर्दनीबाग से मुख्यमंत्री आवास की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों ने जेपी गोलंबर पर बैरिकेडिंग तोड़ दी। छात्रों को रोकने के लिए पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों की बड़ी संख्या में तैनाती की गई थी। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस ने वाटर कैनन का इस्तेमाल कर प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया।गर्दनीबाग में छात्र 18 अगस्त से अपनी विभिन्न मांगों को लेकर धरने पर बैठे हैं। मंगलवार को ऑल बिहार स्टूडेंट यूनियन (एबीएसयू) के अमन गुट के नेतृत्व में छात्रों ने मुख्यमंत्री आवास का घेराव करने के लिए मार्च निकाला। मार्च जैसे ही जेपी गोलंबर के पास पहुंचा, पुलिस ने उन्हें रोकने के लिए बैरिकेडिंग कर दी।
बैरिकेडिंग तोड़कर आगे बढ़े छात्र
पुलिस की ओर से रोके जाने के बाद प्रदर्शनकारी छात्र बैरिकेडिंग हटाकर आगे बढ़ने की कोशिश करने लगे। देखते ही देखते छात्रों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई। छात्रों ने बैरिकेडिंग तोड़ दी और डाकबंगला की ओर जाने का प्रयास किया।स्थिति को देखते हुए पुलिस और सीआरपीएफ के जवानों ने मोर्चा संभाल लिया। गांधी मैदान से लेकर इनकम टैक्स गोलंबर तक कई जगहों पर पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच धक्का-मुक्की और तनाव की स्थिति बनने की सूचना है। छात्रों को आगे बढ़ने से रोकने के लिए पुलिस ने वाटर कैनन चलाया।
कई प्रमुख रास्तों पर यातायात प्रभावित
प्रदर्शन के कारण पटना के कई प्रमुख मार्गों पर आवाजाही प्रभावित हुई। जेपी गोलंबर, गांधी मैदान, डाकबंगला और इनकम टैक्स गोलंबर के आसपास बड़ी संख्या में पुलिस बल तैनात रहा। सुरक्षा व्यवस्था को देखते हुए प्रशासन ने प्रमुख रास्तों पर निगरानी बढ़ा दी।प्रदर्शन के कारण सड़क पर वाहनों की रफ्तार भी प्रभावित हुई और कई जगह जाम जैसी स्थिति बनी। पुलिस लगातार छात्रों को शांत रहने और निर्धारित स्थान पर प्रदर्शन करने की अपील करती रही।
टीआरई-4 भर्ती प्रक्रिया में बदलाव की मांग
आंदोलन कर रहे छात्रों की प्रमुख मांग बीपीएससी टीआरई-4 शिक्षक भर्ती परीक्षा की प्रक्रिया को सरल और स्पष्ट करने की है। छात्रों का कहना है कि टीआरई-4 में प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा की अलग-अलग प्रक्रिया के बजाय एक ही परीक्षा के माध्यम से चयन प्रक्रिया पूरी की जानी चाहिए।छात्रों का तर्क है कि बार-बार अलग-अलग परीक्षाओं में शामिल होने से अभ्यर्थियों का समय और पैसा दोनों खर्च होता है। साथ ही लंबी भर्ती प्रक्रिया के कारण मानसिक दबाव भी बढ़ता है। छात्रों ने टीआरई-4 में नेगेटिव मार्किंग खत्म करने की मांग भी रखी है।
सरकारी नौकरियों में 100 प्रतिशत डोमिसाइल की मांग
प्रदर्शनकारियों की एक बड़ी मांग बिहार की सरकारी नौकरियों में 100 प्रतिशत डोमिसाइल नीति लागू करने की है। छात्रों का कहना है कि राज्य की सरकारी नौकरियों में बिहार के स्थानीय युवाओं को प्राथमिकता मिलनी चाहिए।इसके अलावा छात्रों ने बीएसएससी से जुड़ी भर्ती प्रक्रियाओं में भी बदलाव की मांग उठाई है। इनमें संविदा कर्मचारियों को मिलने वाले वेटेज को समाप्त करने की मांग शामिल है।
परीक्षा की तारीख और कैलेंडर जारी करने की मांग
छात्रों ने बीएसएससी सीजीएल-4, बीएसओ और एईडीओ सहित विभिन्न परीक्षाओं की तारीख जल्द घोषित करने की मांग की है। उनका कहना है कि परीक्षा की तारीख और भर्ती कैलेंडर को लेकर स्पष्टता नहीं होने से अभ्यर्थियों को लगातार परेशानी होती है।इसके अलावा लाइब्रेरियन और बिहार पात्रता परीक्षा से जुड़ी भर्ती प्रक्रिया शुरू करने तथा सरकारी विभागों में लंबे समय से खाली पड़े पदों को जल्द भरने की मांग भी छात्रों ने उठाई है।
उम्र सीमा में छूट देने की मांग
आंदोलनकारी अभ्यर्थियों ने सरकारी भर्ती परीक्षाओं में उम्र सीमा में छूट देने की भी मांग की है। छात्रों का कहना है कि नियमित रूप से भर्ती नहीं निकलने के कारण कई ऐसे अभ्यर्थी हैं, जो वर्षों से सरकारी नौकरी की तैयारी कर रहे हैं और अब उम्र सीमा पार करने के कगार पर पहुंच गए हैं।छात्रों का कहना है कि भर्ती प्रक्रिया में देरी का सीधा असर अभ्यर्थियों के भविष्य पर पड़ रहा है। ऐसे युवाओं को राहत देने के लिए उम्र सीमा में उचित छूट दी जानी चाहिए।
पारदर्शी और समयबद्ध भर्ती की मांग
छात्रों ने दरोगा, सिपाही, बीएसएससी और बीपीएससी समेत सभी सरकारी भर्ती परीक्षाओं में पारदर्शिता की मांग की है। उनका कहना है कि परीक्षा से लेकर परिणाम और नियुक्ति तक हर चरण के लिए स्पष्ट समयसीमा तय होनी चाहिए।प्रदर्शनकारी छात्रों के अनुसार भर्ती प्रक्रिया जितनी लंबी खिंचती है, अभ्यर्थियों की परेशानी उतनी ही बढ़ती जाती है। इसलिए सरकार को परीक्षा कैलेंडर जारी कर सभी भर्तियों को तय समय के भीतर पूरा करना चाहिए।
मांगें पूरी होने तक आंदोलन जारी रखने की चेतावनी
मंगलवार को छात्र लगातार डाकबंगला की ओर बढ़ने की कोशिश करते रहे, जबकि पुलिस और सीआरपीएफ के जवान उन्हें रोकने में जुटे रहे। बैरिकेडिंग टूटने और वाटर कैनन के इस्तेमाल के बाद कई जगह तनाव की स्थिति बनी रही।प्रदर्शनकारी छात्रों ने कहा कि जब तक सरकार की ओर से उनकी भर्ती संबंधी मांगों पर ठोस आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। छात्रों का कहना है कि वे सरकारी नौकरियों की भर्ती प्रक्रिया में तेजी, पारदर्शिता और स्पष्ट नियम चाहते हैं।


