नई दिल्ली,अंग भारत। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की पहली वर्षगांठ के मौके पर भारतीय सशस्त्र बलों के अद्वितीय साहस और अदम्य वीरता को सलाम किया है। आज से एक वर्ष पूर्व, पहलगाम में निर्दोष नागरिकों पर हुए कायराना आतंकी हमले के बाद सेना ने जिस ततपरता से प्रतिशोध लिया, वह भारत की बदलती सामरिक नीति का एक स्पष्ट प्रमाण है। प्रधानमंत्री ने अपने संदेश में साफ किया कि यह ऑपरेशन महज एक सैन्य कार्रवाई नहीं, बल्कि देश की ‘जीरो टॉलरेंस’ नीति का जीवंत उदाहरण है, जो यह संदेश देता है कि भारत अपनी संप्रभुता पर चोट करने वाले हर आतंकी नेटवर्क को जड़ से उखाड़ने में सक्षम है।
सशस्त्र बलों का पराक्रम
पहलगाम की उस घटना ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया था, लेकिन भारतीय सेना ने संयम और शक्ति के साथ परिस्थितियों को संभाला। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान सेना, अर्धसैनिक बलों और स्थानीय प्रशासन के बीच जो समन्वय देखने को मिला, उसने दुनिया भर के रक्षा विशेषज्ञों को हैरान कर दिया।
- आतंकवाद के खिलाफ सटीक और त्वरित जवाबी कार्रवाई।
- नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए अपनाई गई विशेष रणनीति।
- दुश्मन के समर्थकों के नेटवर्क को ध्वस्त करने में मिली बड़ी सफलता।
आत्मनिर्भर भारत की भूमिका
ऑपरेशन सिंदूर की सफलता का एक बड़ा श्रेय स्वदेशी रक्षा उपकरणों को भी जाता है। प्रधानमंत्री ने विशेष रूप से रेखांकित किया कि कैसे ‘आत्मनिर्भर भारत’ का संकल्प धरातल पर उतर रहा है। भारतीय सेना द्वारा उपयोग किए गए आधुनिक स्वदेशी हथियार और उन्नत सर्विलांस सिस्टम ने इस मिशन में निर्णायक भूमिका निभाई।
यह अभियान इस बात का सबूत है कि अब भारत रक्षा जरूरतों के लिए दूसरे देशों पर निर्भर रहने के बजाय अपनी तकनीक पर भरोसा कर रहा है। जब हमारे जवानों के हाथ में स्वदेशी तकनीक का दम होता है, तो उनकी लड़ने की क्षमता कई गुना बढ़ जाती है।
विजय का संस्कृत मंत्र
प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संदेश में सेना का मनोबल बढ़ाते हुए एक प्राचीन संस्कृत श्लोक का उल्लेख किया: “उदीर्णमनसो योधा वाहनानि च भारत। यस्यां भवन्ति सेनायां ध्रुवं तस्यां जयं वदेत्।”
इसका सरल अर्थ है कि जिस सेना के सैनिक उत्साह और आत्मविश्वास से भरे होते हैं, और जिनके पास अत्याधुनिक सैन्य वाहन और संसाधन होते हैं, उस सेना की जीत निश्चित है।
यह श्लोक न केवल हमारे सैनिकों के गौरव को बढ़ाता है, बल्कि यह भी याद दिलाता है कि साहस के साथ संसाधनों का मेल ही विजय सुनिश्चित करता है।
एकता का प्रदर्शन
इस वर्षगांठ को एक राष्ट्रीय पर्व की तरह मनाने के लिए प्रधानमंत्री ने देशवासियों से खास अपील की है। उन्होंने सोशल मीडिया के माध्यम से लोगों से आग्रह किया है कि वे अपने प्रोफाइल फोटो (DP) को बदलकर ऑपरेशन सिंदूर की यादों और भारतीय सेना के प्रति सम्मान को साझा करें। यह छोटी सी पहल देश की एकता और सुरक्षाबलों के प्रति अटूट विश्वास का प्रतीक है।
राष्ट्रीय सुरक्षा प्राथमिकता
ऑपरेशन सिंदूर का संदेश स्पष्ट है: भारत अब कोई भी हमला चुपचाप बर्दाश्त नहीं करेगा। यह ऑपरेशन आने वाले वर्षों में भारतीय सेना की कार्यशैली के लिए एक ‘बेंचमार्क’ की तरह काम करेगा। पहलगाम से शुरू हुई यह गाथा आज भारत की सुरक्षा नीतियों में एक मजबूत स्तम्भ बन चुकी है। देश का हर नागरिक अपने सैनिकों के बलिदान का ऋणी है, और इस वर्षगांठ पर उन्हें याद करना एक राष्ट्र के रूप में हमारा कर्तव्य है।








