अंग भारत, नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने देश में सेमीकंडक्टर यानी चिप बनाने के काम को बढ़ावा देने के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये के बजट वाली ‘सेमीकॉन 2.0’ योजना को अधिसूचित कर दिया है। इस योजना को केंद्रीय मंत्रिमंडल ने जुलाई 2026 में मंजूरी दी थी। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने सोमवार को इसकी आधिकारिक गजट अधिसूचना जारी की।
चिप बनाने से लेकर टेस्टिंग तक पर जोर
सरकार का लक्ष्य देश में चिप से जुड़ी पूरी सप्लाई चेन तैयार करना है। इसमें चिप के डिजाइन से लेकर मशीन और कच्चा माल तैयार करने, चिप बनाने, उसकी पैकेजिंग और टेस्टिंग तक के काम को देश में बढ़ावा दिया जाएगा।इससे भारत को सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में दूसरे देशों पर निर्भरता कम करने और अपनी जरूरत के मुताबिक चिप तैयार करने में मदद मिलने की उम्मीद है।
योजना को छह हिस्सों में बांटा गया
‘सेमीकॉन 2.0’ को छह प्रमुख हिस्सों में बांटा गया है। इसमें भारतीय कंपनियों की ओर से चिप डिजाइन को बढ़ावा देना, चिप बनाने में इस्तेमाल होने वाले जरूरी उपकरण तैयार करने वाली इकाइयां लगाना, सेमीकंडक्टर का उत्पादन और चिप असेंबली शामिल है।इसके अलावा पैकेजिंग और टेस्टिंग के क्षेत्र पर भी योजना के तहत ध्यान दिया जाएगा। सरकार का मानना है कि इन सभी क्षेत्रों को एक साथ मजबूत करने से देश में सेमीकंडक्टर का पूरा माहौल तैयार किया जा सकेगा।
अश्विनी वैष्णव ने बताया भारत क्यों बन रहा पसंद
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि दुनिया की सेमीकंडक्टर कंपनियों के बीच यह भरोसा बढ़ रहा है कि आने वाले वर्षों में बड़े निवेश के लिए भारत एक अच्छा स्थान है।उन्होंने कहा कि ‘सेमीकॉन 1.0’ के तहत मंजूर की गई इकाइयों में जिस तेजी से काम आगे बढ़ा है, उससे भी यह भरोसा मजबूत हुआ है। कुछ मामलों में मंजूरी मिलने के बाद तेजी से काम शुरू हुआ और एक इकाई ने शिलान्यास के सिर्फ 13 महीने के भीतर व्यावसायिक उत्पादन भी शुरू कर दिया।
मंजूरी देने में भी तेजी
वैष्णव के मुताबिक, कई मामलों में परियोजनाओं को सभी जरूरी मंजूरियां 200 या 150 दिनों के भीतर मिल गईं। एक मामले में यह काम सिर्फ 90 दिनों में पूरा किया गया। उनके अनुसार, इस तरह की तेजी से दुनिया की सेमीकंडक्टर कंपनियों का भारत पर भरोसा बढ़ा है।उन्होंने कहा कि भारत में पूंजीगत निवेश के लिए मिलने वाली मदद, कुशल प्रतिभा, नीतियों में स्थिरता और कारोबार करने में आसानी जैसे कारण भी कंपनियों को यहां निवेश के लिए आकर्षित कर रहे हैं।
स्वदेशी तकनीक विकसित करने पर भी जोर
सरकार ने कहा है कि ‘सेमीकॉन 2.0’ के तहत चिप डिजाइन, उत्पादन और पैकेजिंग के साथ-साथ सेमीकंडक्टर से जुड़े दूसरे क्षेत्रों को भी आर्थिक मदद दी जाएगी।योजना में कंप्यूटिंग, मेमोरी, आरएफ, पावर, नेटवर्किंग और सेंसर जैसी अलग-अलग जरूरतों के लिए जरूरी तकनीक और मानक आईपी विकसित करने पर भी ध्यान दिया जाएगा।
रणनीतिक जरूरतों के लिए मजबूत चिप तैयार करने का लक्ष्य
सरकार का एक बड़ा लक्ष्य ऐसी स्वदेशी सेमीकंडक्टर तकनीक विकसित करना है, जो देश की रणनीतिक और महत्वपूर्ण जरूरतों में काम आ सके। इसके तहत मजबूत, भरोसेमंद और देश में तैयार की गई तकनीक को बढ़ावा दिया जाएगा।‘सेमीकॉन 2.0’ के जरिए सरकार चिप डिजाइन से लेकर उसके उत्पादन और बाजार तक पहुंचने की पूरी प्रक्रिया को देश में मजबूत करना चाहती है। इससे सेमीकंडक्टर उद्योग में निवेश, रोजगार और नई तकनीक के विकास को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।







