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छात्रों पर लाठीचार्ज के विरोध में सुपौल में युवा कांग्रेस का कैंडल मार्च

सुपौल में दिल्ली में छात्रों पर लाठीचार्ज के खिलाफ युवा कांग्रेस के कैंडल मार्च में मोमबत्तियां और सरकार विरोधी पोस्टर थामे प्रदर्शनकारी छात्र और नेता।

सुपौल,अंग भारत। दिल्ली में पढ़ाई कर रहे छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और कांग्रेस नेता राहुल गांधी के साथ की गई कथित बदसलूकी के खिलाफ बिहार के सुपौल जिले में भारी आक्रोश देखने को मिला। गुरुवार की रात करीब आठ बजे युवा कांग्रेस के बिहार प्रदेश सचिव लक्ष्मण कुमार झा की अगुवाई में युवाओं और छात्रों ने सड़कों पर उतरकर एक जोरदार कैंडल मार्च निकाला। इस आंदोलन के जरिए प्रदर्शनकारियों ने केंद्र सरकार के रवैये पर कड़ा ऐतराज जताया और मांग की कि छात्रों पर दर्ज मुकदमों को तुरंत वापस लिया जाए। अंबेडकर चौक से शुरू हुआ यह मार्च पूरे शहर में चर्चा का विषय बना रहा, जहां लोग सरकार विरोधी नारों के साथ आगे बढ़ रहे थे।

दिल्ली में हुए इस घटनाक्रम की गूंज अब बिहार के छोटे-छोटे शहरों और कस्बों में भी साफ सुनाई देने लगी है। सुपौल में आयोजित इस मार्च में शामिल लोगों का मानना था कि जब देश के कोने-कोने से छात्र अपनी जायज मांगों को लेकर राष्ट्रीय राजधानी पहुंचते हैं, तो उन पर बल प्रयोग करना किसी भी लोकतांत्रिक समाज में सही नहीं ठहराया जा सकता। राजनीति के जानकार मानते हैं कि छात्र राजनीति और युवाओं के मुद्दों को लेकर बिहार हमेशा से बेहद संवेदनशील रहा है। यही कारण है कि दिल्ली की घटना का असर सुपौल की सड़कों पर तुरंत देखने को मिला, जहां युवा बेहद गुस्से में थे।

विरोध की मुख्य वजहें

इस कैंडल मार्च का आयोजन अचानक नहीं हुआ, बल्कि इसके पीछे छात्रों और युवा नेताओं का लंबा आक्रोश काम कर रहा था। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार युवाओं की आवाज सुनने के बजाय उन्हें पुलिस के दम पर चुप कराना चाहती है। युवा कांग्रेस के नेताओं ने इस दौरान कई गंभीर आरोप लगाए। उनके अनुसार, राहुल गांधी के साथ किया गया व्यवहार पूरी तरह से अनुचित था। प्रदर्शनकारियों का दावा है कि विपक्ष और हक की आवाज उठाने वाले छात्रों को निशाना बनाकर उनके लोकतांत्रिक अधिकारों को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है।

आंदोलनकारियों की प्रमुख मांगें

सुपौल के इस प्रदर्शन में युवा कांग्रेस ने अपनी मांगों को बेहद स्पष्ट तरीके से प्रशासन और सरकार के सामने रखा। इन मांगों को पूरा न करने पर आंदोलन को राष्ट्रव्यापी बनाने की चेतावनी दी गई है:

  • धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा: केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए तुरंत अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए।
  • मुकदमे वापस हों: दिल्ली में आंदोलन के दौरान जिन भी बेकसूर छात्रों पर पुलिस ने मुकदमे दर्ज किए हैं, उन्हें बिना किसी शर्त के तुरंत वापस लिया जाए।
  • सार्वजनिक माफी की मांग: केंद्र सरकार देश के तमाम युवाओं, छात्रों और कांग्रेस नेता राहुल गांधी से अपने किए व्यवहार के लिए सार्वजनिक रूप से माफी मांगे।
  • उत्पीड़न पर रोक: भविष्य में देश के किसी भी हिस्से में शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे छात्रों और युवाओं का मानसिक व शारीरिक उत्पीड़न बंद हो।

“छात्रों पर लाठियां बरसाना और उनके खिलाफ झूठे मुकदमे दर्ज करना सीधे तौर पर हमारे लोकतांत्रिक ढांचे पर हमला है। केंद्र सरकार के इशारे पर यह सब किया जा रहा है ताकि कोई भी सरकार की कमियों पर उंगली न उठा सके।”
लक्ष्मण कुमार झा, प्रदेश सचिव, बिहार युवा कांग्रेस

मार्च का पूरा रूट

यह कैंडल मार्च रात आठ बजे शहर के ऐतिहासिक अंबेडकर चौक से शुरू हुआ। मोमबत्तियों की रोशनी और युवाओं के हाथों में थमे पोस्टरों के साथ यह काफिला धीरे-धीरे आगे बढ़ा। मार्च शहर के कई प्रमुख और व्यस्त मार्गों से गुजरा। रास्ते भर आम लोग भी इस मार्च को देखते रहे और कई जगहों पर युवाओं ने इसका समर्थन किया। अंत में यह पूरा जत्था महावीर चौक पर आकर समाप्त हुआ। महावीर चौक पर पहुंचकर कार्यकर्ताओं ने एक संक्षिप्त सभा की, जहां आगे की रणनीति पर चर्चा की गई। नेताओं ने चेतावनी दी कि अगर उनकी मांगें जल्द नहीं मानी गईं, तो यह आंदोलन सुपौल से निकलकर पूरे बिहार के हर जिले और प्रखंड तक फैलेगा।

शामिल प्रमुख चेहरे

इस विशाल कैंडल मार्च को सफल बनाने के लिए स्थानीय नेताओं और समाजसेवियों ने पूरी ताकत झोंक दी थी। मार्च में लक्ष्मण कुमार झा के अलावा कई जाने-माने चेहरे शामिल हुए, जिन्होंने अपनी बात रखी:

  • रितु रंजन (समाजसेवी): इन्होंने युवाओं के हक की लड़ाई में हमेशा साथ रहने और उनके लोकतांत्रिक अधिकारों की रक्षा करने की बात कही।
  • रंजीत कुमार यादव: इन्होंने सरकार की छात्र विरोधी नीतियों की कड़े शब्दों में निंदा की।
  • मोहम्मद तौसीफ और उज्ज्वल: इन्होंने स्थानीय युवाओं और छात्रों को इस आंदोलन से जोड़ने में मुख्य भूमिका निभाई।

इनके अलावा सैकड़ों की संख्या में आम छात्र, स्थानीय नागरिक और युवा कांग्रेस के निष्ठावान कार्यकर्ता भी इस शांतिपूर्ण प्रदर्शन का हिस्सा बने और अपनी आवाज बुलंद की।

प्रशासन का कड़ा पहरा

शहर में किसी भी तरह की अप्रिय घटना को रोकने और कानून व्यवस्था को बनाए रखने के लिए स्थानीय प्रशासन पहले से ही पूरी तरह सतर्क था। कैंडल मार्च की संवेदनशीलता को देखते हुए पूरे शहर में भारी सुरक्षा बल तैनात किया गया था। अनुमंडल पदाधिकारी (SDM) और सदर अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) राजीव रंजन खुद सुरक्षा व्यवस्था की कमान संभाले हुए थे। सदर थाना प्रभारी और यातायात पुलिस के अधिकारी अपने दलबल के साथ शहर के कोने-कोने में लगातार गश्त कर रहे थे। प्रशासन ने यह सुनिश्चित किया कि मार्च पूरी तरह शांतिपूर्ण तरीके से संपन्न हो और आम राहगीरों को किसी तरह की असुविधा न हो। प्रमुख चौराहों पर पुलिस की तैनाती के चलते पूरा कार्यक्रम बिना किसी व्यवधान के खत्म हुआ।

आगे की रणनीति

सुपौल में हुआ यह प्रदर्शन सिर्फ एक सांकेतिक विरोध नहीं था, बल्कि यह आने वाले समय में एक बड़े आंदोलन की नींव रख चुका है। युवा कांग्रेस के कार्यकर्ताओं का साफ कहना है कि जब तक छात्रों को इंसाफ नहीं मिल जाता और दर्ज मुकदमे वापस नहीं होते, तब तक वे चुप नहीं बैठेंगे। आने वाले दिनों में तहसील और ब्लॉक स्तर पर भी इसी तरह के प्रदर्शन करने की तैयारी की जा रही है ताकि ग्रामीण इलाकों के युवाओं को भी इस मुहिम का हिस्सा बनाया जा सके और सरकार की जनविरोधी नीतियों को उजागर किया जा सके।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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