भागलपुर,अंग भारत। तिलकामांझी भागलपुर विश्वविद्यालय और इसके अधीन आने वाले सभी अंगीभूत और संबद्ध कॉलेजों में कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा है। वेतन में भारी कटौती और प्रमोशन में देरी को लेकर कर्मचारियों ने बुधवार को विश्वविद्यालय परिसर सहित सभी कॉलेजों को बंद करा दिया और प्रशासनिक भवनों में तालाबंदी कर दी।
तीन महीने से 60 प्रतिशत वेतन कटौती का आरोप -: बिहार राज्य विश्वविद्यालय एवं महाविद्यालय कर्मचारी महासंघ के बैनर तले कर्मचारी आंदोलन कर रहे हैं। कर्मचारियों का आरोप है कि पिछले तीन महीनों से बिना किसी पूर्व सूचना के उनके वेतन में लगभग 60 प्रतिशत की कटौती की जा रही है। इसके अलावा लंबित प्रमोशन समेत आठ सूत्री मांगों को लेकर महासंघ ने 28 अक्टूबर से 31 अक्टूबर 2026 तक प्रशासनिक और शैक्षणिक कामकाज को पूरी तरह ठप रखने का ऐलान किया है।
सुबह से ही तालाबंदी, परीक्षा विभाग भी बंद -: सुबह से ही प्रदर्शनकारी कर्मचारियों ने एकजुट होकर विवि के प्रशासनिक भवन, परीक्षा विभाग और सभी कॉलेज परिसरों में तालाबंदी कर दी। आंदोलन के कारण विश्वविद्यालय का पूरा कामकाज ठप हो गया। कर्मचारी नेताओं का कहना है कि बाढ़ आपदा के दौरान भी जिन कर्मियों ने लगातार सेवाएं दीं, उनका भी बिना किसी जांच के एकतरफा वेतन काट लिया गया।कर्मचारियों ने बताया कि इस कटौती को लेकर पूर्व में एक जांच समिति गठित की गई थी। समिति ने कटौती को वापस लेने की अनुशंसा भी की थी, लेकिन विश्वविद्यालय प्रशासन ने उस पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं की। इससे कर्मचारियों में और अधिक आक्रोश है।
कर्मचारी संघ ने कहा – पेट पर लात मार रहा प्रशासन -: आंदोलन का नेतृत्व कर रहे कर्मचारी महासंघ के क्षेत्रीय सचिव मुकेश कुमार और गैर-शिक्षक कर्मचारी संघ के अध्यक्ष राजेश कुमार ने संयुक्त बयान में कहा कि विश्वविद्यालय प्रशासन कर्मचारियों के पेट पर लात मार रहा है। बिना किसी ठोस कारण के तीन महीने से वेतन का बड़ा हिस्सा काटा जा रहा है, जिससे कर्मियों के सामने भुखमरी की नौबत आ गई है। त्योहारों का सीजन सामने है और प्रशासन उनकी जायज मांगों को अनसुना कर रहा है। उन्होंने चेतावनी दी कि जब तक काटी गई राशि वापस नहीं होती, तब तक आंदोलन जारी रहेगा।
कुलपति ने वार्ता की अपील की -: मामले की गंभीरता को देखते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन ने कर्मचारियों से आंदोलन का रास्ता छोड़ वार्ता की टेबल पर आने की अपील की है। कुलपति ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि वेतन में की गई कटौती नियमों के तहत और राजभवन के दिशा-निर्देशों के आलोक में हुई है। विश्वविद्यालय प्रशासन किसी भी कर्मचारी का हक मारना नहीं चाहता। तालाबंदी से छात्रों का भविष्य और शैक्षणिक सत्र प्रभावित हो रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशासन इस मुद्दे के शांतिपूर्ण समाधान के लिए कर्मचारी संघ के प्रतिनिधियों के साथ उच्च स्तरीय बैठक करने को तैयार है, बशर्ते वे तुरंत काम पर लौटें।
छात्रों को हुई भारी परेशानी -: अचानक हुई तालाबंदी और हड़ताल के कारण सुदूर क्षेत्रों से आए सैकड़ों छात्र-छात्राओं और उनके अभिभावकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। परीक्षा फॉर्म जमा करने, डिग्री और अंकपत्र लेने और नामांकन संबंधी जरूरी कार्यों के लिए आए छात्र प्रशासनिक भवनों के गेट पर लटके ताले देखकर बैरंग लौटने को मजबूर हो गए।कर्मचारी महासंघ ने स्पष्ट कर दिया है कि जब तक उनकी मांगों पर लिखित समझौता नहीं होता, तब तक उनका चरणबद्ध आंदोलन इसी तरह जारी रहेगा।







