रांची, अंग भारत। झारखंड विधानसभा बजट सत्र के 12 वें दिन गुरुवार को डुमरी विधायक जयराम महतो ने सदन में बिजली आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं का मुद्दा उठाते हुए सरकार को कटघरे में खड़ा किया। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि राज्य के कई ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में ट्रांसफार्मर जलने या बिजली के तार खराब होने के बाद बिजली बहाल होने में हफ्तों लग जाते हैं, जिससे आम जनता का जीवन बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। उन्होंने सरकार से सवाल किया कि बिजली संबंधी शिकायतों के लिए कोई ठोस व्यवस्था क्यों नहीं है और यदि निर्धारित समय सीमा के भीतर अधिकारी काम नहीं करते, तो उन पर क्या दंडात्मक कार्रवाई की जाती है।
बिजली व्यवस्था की चुनौतियां
सदन में चर्चा के दौरान विधायक जयराम महतो ने इस बात पर जोर दिया कि उपभोक्ताओं को यह पता ही नहीं होता कि तकनीकी खराबी आने पर उन्हें किसके पास जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बिजली विभाग की कार्यप्रणाली में पारदर्शिता का भारी अभाव है। इस मुद्दे का समर्थन करते हुए हटिया विधायक नवीन जायसवाल ने कहा कि बिजली कोई खैरात नहीं है, बल्कि उपभोक्ता इसके लिए बिल का भुगतान करते हैं। उन्होंने साफ किया कि ट्रांसफार्मर जलने की स्थिति में इसे अधिकतम 24 घंटे के भीतर बदला जाना चाहिए, क्योंकि यह उपभोक्ता का बुनियादी अधिकार है।
“बिजली विभाग की जवाबदेही तय होनी चाहिए। यदि उपभोक्ता समय पर बिल भरता है, तो उसे निर्बाध बिजली सेवा मिलना उसका हक है।” – नवीन जायसवाल, विधायक।
इस पूरी स्थिति पर ऊर्जा मंत्री योगेंद्र प्रसाद ने अपनी सफाई देते हुए कहा कि ट्रांसफार्मर की उपलब्धता में आ रही कमी के कारण कई बार देरी हो जाती है। हालांकि, मंत्री ने आश्वासन दिया कि गर्मी के मौसम को देखते हुए सरकार जल्द ही एक डेडिकेटेड टोल-फ्री नंबर जारी करेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि वर्तमान में कोई भी उपभोक्ता अपने संबंधित डिवीजन कार्यालय में जाकर एग्जीक्यूटिव इंजीनियर से अपनी शिकायत दर्ज करवा सकता है।
कृषि उत्पादों की समस्या
विधानसभा के सत्र के दौरान विधायक कल्पना मुर्मू सोरेन ने भी एक अत्यंत गंभीर मुद्दा उठाया। उन्होंने राज्य में कृषि और वन उत्पादों के लिए मानक गुणवत्ता प्रयोगशाला (Quality Testing Lab) की कमी पर चिंता व्यक्त की। कल्पना मुर्मू सोरेन ने बताया कि झारखंड में अदरक, महुआ, कटहल और टमाटर जैसी फसलों का विपुल उत्पादन होता है, लेकिन टेस्टिंग लैब न होने की वजह से किसान इन्हें अंतरराष्ट्रीय मानकों पर खरा नहीं उतार पाते।
कल्पना मुर्मू सोरेन द्वारा दिए गए सुझावों और वर्तमान स्थिति की तुलना नीचे दी गई तालिका में देखी जा सकती है:
| विषय | वर्तमान स्थिति | प्रस्तावित समाधान |
|---|---|---|
| गुणवत्ता परीक्षण | कोई मानक प्रयोगशाला नहीं | रांची और देवघर हवाई अड्डे पर लैब स्थापना |
| बाजार पहुंच | केवल स्थानीय बाजार तक सीमित | वैश्विक बाजार के लिए मैपिंग और एक्सपोर्ट |
इस विषय पर प्रतिक्रिया देते हुए कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने सदन को सूचित किया कि राज्य सरकार ने कृषि उत्पादों की गुणवत्ता जांच के लिए केंद्र सरकार को एक औपचारिक प्रस्ताव भेजा है। उन्होंने माना कि भविष्य में निर्यात बढ़ाने के लिए इस प्रकार की प्रयोगशालाएं मील का पत्थर साबित होंगी। शिल्पी नेहा तिर्की ने भरोसा दिलाया कि राज्य सरकार इस संबंध में हर संभव कदम उठाएगी ताकि झारखंड के किसानों को उनके उत्पादों का उचित दाम मिल सके और वे सीधे वैश्विक बाजारों से जुड़ सकें।
- बिजली के ट्रांसफार्मर 24 घंटे के भीतर बदलने का लक्ष्य रखा गया है।
- उपभोक्ताओं के लिए जल्द ही एक नया हेल्पलाइन नंबर शुरू होगा।
- रांची और देवघर में कृषि लैब खोलने का प्रस्ताव विचाराधीन है।
- किसानों के लिए कृषि उत्पादों की मैपिंग की प्रक्रिया शुरू होगी।
झारखंड विधानसभा के इस सत्र में बिजली और कृषि जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर हुई यह चर्चा स्पष्ट करती है कि राज्य के विकास के लिए बुनियादी ढांचे और आधुनिक तकनीक के समावेश की कितनी आवश्यकता है। अब जनता को इंतजार है कि कब ये घोषणाएं जमीनी हकीकत में बदलेंगी।








