पूर्वी सिहभूम,अंग भारत। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव का सीधा असर अब पूर्वी सिहभूम (जमशेदपुर) के आम निवासियों की रसोई पर पड़ने लगा है, जहां रसोई गैस की आपूर्ति बाधित होने और कालाबाजारी की शिकायतों ने हड़कंप मचा दिया है। स्थिति इतनी गंभीर हो गई है कि लोग घंटों गैस एजेंसियों के बाहर कतार में खड़े रहने को मजबूर हैं। आम जनता का मानना है कि वैश्विक अस्थिरता के कारण ईंधन की कीमतों में उछाल और आपूर्ति श्रृंखला प्रभावित हुई है, जिसका खामियाजा सीधे तौर पर घरेलू उपभोक्ताओं को भुगतना पड़ रहा है।
आपूर्ति में बाधा
शहर के जुगसलाई इलाके में स्थित काबरा गैस एजेंसी पर बुधवार को भारी भीड़ उमड़ पड़ी। लोग केवल सिलेंडर प्राप्त करने के लिए नहीं, बल्कि बुकिग से जुड़ी अनिश्चितताओं का समाधान खोजने के लिए वहां पहुंचे थे। आशा पांडेय और संत बेहरा जैसे कई ग्राहकों ने स्पष्ट किया कि पिछले तीन-चार दिनों से ऑनलाइन माध्यम पूरी तरह से ठप पड़ा था। बार-बार प्रयास करने के बाद भी बुकिग सफल नहीं हो पा रही थी, जिसके परिणामस्वरूप उन्हें अपनी दैनिक दिनचर्या छोड़कर एजेंसी के चक्कर लगाने पड़े।
लोगों का आरोप है कि इस संकट का फायदा उठाते हुए कुछ तत्व सिलेंडर की जमाखोरी में लगे हैं, जिससे बाजार में कृत्रिम कमी पैदा हो गई है।
कालाबाजारी का संकट
बाजार में बढ़ती अफवाहों और आपूर्ति में देरी ने कालाबाजारी को हवा दी है। उपभोक्ताओं की ओर से मिल रही शिकायतों के अनुसार, जिन घरेलू गैस सिलेंडरों की निर्धारित सरकारी कीमत लगभग एक हजार रुपये के आसपास है, उन्हें कुछ स्थानों पर 1800 से 2000 रुपये तक में बेचा जा रहा है। यह स्थिति आम आदमी के बजट से बाहर है और निम्न व मध्यम वर्गीय परिवारों के सामने भोजन पकाने का बड़ा संकट खड़ा हो गया है। प्रशासन को इस संबंध में सख्त कदम उठाने की जरूरत है ताकि जमाखोरों पर नकेल कसी जा सके।
एजेंसी का पक्ष
दूसरी ओर, काबरा गैस एजेंसी के संचालकों ने गैस की किसी भी तरह की कमी से पूरी तरह इनकार किया है। उनके अनुसार:
- गैस की आपूर्ति पूरी तरह सामान्य है और स्टॉक में कमी नहीं है।
- ऑनलाइन सिस्टम में आई तकनीकी खराबी को पूरी तरह ठीक कर दिया गया है।
- उपभोक्ता अनावश्यक रूप से भयभीत होकर जरूरत से अधिक गैस बुक कराने का प्रयास कर रहे हैं।
- वितरण प्रणाली में देरी का मुख्य कारण ग्राहकों का अचानक भारी दबाव है।
स्थानीय निवासी अब प्रशासन से मांग कर रहे हैं कि वे केवल दावों पर भरोसा न करें, बल्कि जमीनी स्तर पर निगरानी बढ़ाएं। जब तक कालाबाजारी बंद नहीं होगी और पारदर्शिता नहीं आएगी, तब तक आम उपभोक्ताओं के मन से यह डर दूर नहीं होगा। अंतरराष्ट्रीय राजनीति की आंच जमशेदपुर की रसोई तक पहुंच चुकी है, और अब जिला प्रशासन की त्वरित प्रतिक्रिया ही इस तनावपूर्ण स्थिति को सामान्य कर सकती है। सुरक्षा के लिहाज से लोगों को सलाह दी जा रही है कि वे केवल अपनी जरूरत के अनुसार ही सिलेंडर बुक करें ताकि बाजार में संतुलन बना रहे।








