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राष्ट्रीय लोक अदालत में 1582 वादों का हुआ निष्पादन,3 करोड़ 64 लाख 38 हजार 224 रुपये का हुआ समझौता

सुपौल, अंग भारत। व्यवहार न्यायालय परिसर में आयोजित राष्ट्रीय लोक अदालत ने न्याय की एक नई मिसाल पेश की है। इस विशेष आयोजन में कुल 1582 वादों का सफल निष्पादन किया गया, जिसमें 3 करोड़ 64 लाख 38 हजार 224 रुपये का आपसी समझौता हुआ। जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सौजन्य से आयोजित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य आम लोगों को लंबे समय से चल रहे कानूनी विवादों से मुक्त करना और आपसी सहमति से न्याय प्रदान करना था।

न्याय का सफल आयोजन

शनिवार को संपन्न हुई इस लोक अदालत का उद्घाटन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकार अनंत सिंह, जिलाधिकारी सावन कुमार, और पुलिस अधीक्षक शरथ आरएस ने दीप प्रज्वलित कर किया। उनके साथ परिवार न्यायालय के प्रधान न्यायाधीश राहुल उपाध्याय, एडीजे चार विनय शंकर, एडीजे पंचम सुनील कुमार, जिला विधिक सेवा प्राधिकार के सचिव अफजल आलम, और बार एसोसिएशन के जिलाध्यक्ष नागेंद्र नारायण ठाकुर सहित कई न्यायिक पदाधिकारी मौजूद रहे।

14 बेंचों का गठन

प्रशासन ने मामलों के त्वरित निपटारे के लिए व्यापक तैयारियां की थीं। पूरे जिले में कुल 14 बेंचों का गठन किया गया था, जिनमें सुपौल व्यवहार न्यायालय में 11 बेंच और वीरपुर अनुमंडल न्यायालय में 03 बेंच शामिल थे। प्रत्येक बेंच पर एक न्यायिक पदाधिकारी तैनात थे ताकि आवेदकों को किसी भी प्रकार की परेशानी न हो। न्यायालय परिसर में एक हेल्प डेस्क भी बनाया गया था, जहाँ से लोगों को अपने मामले से संबंधित जानकारी मिल रही थी। इसके अलावा, स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए एक मेडिकल टीम की भी तैनाती की गई थी ताकि किसी भी आपात स्थिति से निपटा जा सके।

निष्पादन के आंकड़े

लोक अदालत का डेटा इसके महत्व को दर्शाता है। कुल 1582 मामलों का निपटारा हुआ, जिसे दो मुख्य श्रेणियों में बांटा गया था:

  • प्री-लिटिगेशन मामले: इसमें 1124 वादों का निपटारा किया गया, जिसमें कुल 2 करोड़ 92 लाख 58 हजार 240 रुपये का समझौता हुआ।
  • पोस्ट-लिटिगेशन मामले: न्यायालय में लंबित 458 वादों को सुलझाया गया, जिसमें 71 लाख 80 हजार रुपये की समझौता राशि तय हुई।

न्यायिक अधिकारियों का संदेश

प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश अनंत सिंह ने कहा कि न्यायालय आने वाला हर व्यक्ति एक उम्मीद के साथ आता है। उन्होंने न्यायाधीशों को निर्देश दिया कि वे निष्पक्ष होकर कार्य करें। उन्होंने बैंकों से विशेष आग्रह किया कि गरीब और जरूरतमंद लोगों के मामलों में लचीला रुख अपनाएं ताकि उनका कल्याण हो सके। वहीं, जिलाधिकारी सावन कुमार ने स्पष्ट किया कि लोक अदालत में मुकदमों को खत्म करना एक सुनहरा मौका है, क्योंकि यहाँ लिए गए फैसले को कहीं भी अपील नहीं किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि मुकदमों से मुक्त होकर लोग अपने जीवन की नई शुरुआत कर सकते हैं।

सुरक्षा और अन्य उपस्थिति

इस बड़े आयोजन के दौरान सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए थे। कार्यक्रम का संचालन मुंसिफ सुदीप पांडेय ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन सचिव अफजल आलम द्वारा किया गया। आयोजन स्थल पर मौजूद अन्य प्रमुख हस्तियों में विशेष न्यायाधीश उत्पाद वन अभिषेक कुमार मिश्रा, न्यायिक दंडाधिकारी प्रथम श्रेणी चेतन आनंद, साइबर डीएसपी गौरव कुमार गुप्ता, यातायात डीएसपी कमलेश कुमार, सर्वेश कुमार झा, दिनेश जायसवाल और संजय कुमार शामिल थे।

लोक अदालत की उपयोगिता

लोक अदालत की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह ‘नो विनर, नो लूजर’ के सिद्धांत पर आधारित है। यहां कोई पक्ष हारता नहीं है, बल्कि दोनों पक्षों की रजामंदी से झगड़े का हमेशा के लिए खात्मा होता है। अदालतों का खर्च बचता है और समय की भारी बचत होती है। इस अवसर पर न्यायालय परिसर में एक सेल्फी पॉइंट भी बनाया गया था, जो काफी चर्चा का विषय रहा। वहां उपस्थित लोगों को बताया गया कि छोटे-मोटे विवादों के लिए लंबी अदालती लड़ाई लड़ने के बजाय लोक अदालत एक किफायती और त्वरित समाधान है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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