बिहार,अंग भारत। इंदौर के बंगाली चौराहे के पास स्थित ग्रेटर बृजेश्वरी कॉलोनी में बुधवार तड़के हुए एक भीषण अग्निकांड में बिहार के किशनगंज जिले के एक ही परिवार के 6 सदस्यों की जिंदा जलकर दर्दनाक मौत हो गई। इस हादसे में तीन अन्य लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं, जिन्हें नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां उनकी स्थिति नाजुक बनी हुई है। आग लगने की शुरुआत घर के बाहर चार्जिंग पर लगी इलेक्ट्रिक कार में हुए शॉर्ट सर्किट से हुई, जिसके बाद देखते ही देखते तीन मंजिला मकान पूरी तरह आग की लपटों में घिर गया और अंदर मौजूद गैस सिलेंडरों के फटने से स्थिति और भी भयावह हो गई।
हादसे का विवरण
यह दुखद घटना बुधवार सुबह लगभग 4 बजे हुई। उस समय घर में मौजूद सभी लोग गहरी नींद में थे। प्रारंभिक जांच में यह बात सामने आई है कि बाहर खड़ी इलेक्ट्रिक कार में शार्ट सर्किट हुआ, जिससे चिंगारी निकली और आग ने पल भर में विकराल रूप ले लिया। आग की लपटें इतनी तेज थीं कि वे मकान की ऊपरी मंजिलों तक पहुंच गईं। गैस सिलेंडर फटने के कारण मकान का एक बड़ा हिस्सा ढह गया, जिससे बाहर निकलने के तमाम रास्ते बंद हो गए।
मृतकों की पहचान
इस अग्निकांड में जान गंवाने वालों में किशनगंज टाउन थाना क्षेत्र के रहने वाले विजय सेठिया, छोटू सेठिया, सुमन, मनोज, सिमरन और राशि सेठिया शामिल हैं। ये सभी लोग एक ही परिवार से ताल्लुक रखते थे और किसी पारिवारिक काम या इलाज के सिलसिले में इंदौर में थे। स्थानीय निवासियों और परिजनों ने बताया कि विजय सेठिया अपने परिवार के साथ इंदौर अपनी बेटी और दामाद के घर आए हुए थे। वे यहां जबड़े के कैंसर के इलाज के लिए आए थे, लेकिन नियति को कुछ और ही मंजूर था।
इलेक्ट्रिक वाहन सुरक्षा
इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) की बढ़ती संख्या के बीच इस तरह के हादसे सुरक्षा मानकों पर गंभीर सवाल खड़े करते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि:
- रात के समय घर के अंदर या पास इलेक्ट्रिक गाड़ी को चार्ज पर छोड़ना खतरनाक हो सकता है।
- चार्जिंग पॉइंट पर शॉर्ट सर्किट से बचने के लिए गुणवत्तापूर्ण वायरिंग और ऑटो-कट ऑफ चार्जर का उपयोग अनिवार्य है।
- इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए बनाए गए डेडिकेटेड पार्किंग एरिया में फायर सेफ्टी के उपकरण होने चाहिए।
- बैटरी ओवरहीटिंग की स्थिति में गाड़ी से तुरंत दूर हट जाना चाहिए।
सिलेंडर विस्फोट का असर
आग लगने के बाद घर में रखे रसोई गैस सिलेंडरों में हुए सिलसिलेवार धमाकों ने बचाव कार्य को लगभग असंभव बना दिया। धमाकों की तीव्रता इतनी ज्यादा थी कि आस-पास की इमारतों में भी झटके महसूस किए गए। स्थानीय लोगों ने बताया कि जैसे ही पहला धमाका हुआ, अफरा-तफरी मच गई और किसी को भी घर के अंदर फंसे लोगों को निकालने का मौका नहीं मिल सका। फायर ब्रिगेड की गाड़ियों ने मौके पर पहुंचकर घंटों की मेहनत के बाद आग को बुझाया, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी।
पुलिस और प्रशासन
घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय पुलिस बल और दमकल विभाग की टीमें घटनास्थल पर पहुंचीं। पुलिस मामले की गहन जांच कर रही है और फॉरेंसिक विशेषज्ञों को भी मौके पर बुलाया गया है ताकि आग लगने के सटीक कारणों की पुष्टि हो सके। फिलहाल, घायलों का इलाज जारी है और पूरा इलाका इस हृदयविदारक घटना से सदमे में है। किशनगंज से मृतक के रिश्तेदार इंदौर के लिए रवाना हो गए हैं ताकि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद पार्थिव शरीरों को वापस घर लाया जा सके।
“यह हादसा बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है। पूरा किशनगंज इस वक्त गहरे शोक में डूबा है। परिवार के सदस्यों को यह यकीन करना मुश्किल हो रहा है कि हंसता-खेलता परिवार इस तरह एक पल में खत्म हो गया।”
यह घटना हमें याद दिलाती है कि घर के भीतर इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और इलेक्ट्रिक वाहनों की चार्जिंग को लेकर हमें कितनी अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है। आग लगने की स्थिति में सबसे महत्वपूर्ण है कि निकास द्वार खुले हों और आग बुझाने वाले यंत्र हर घर में आसानी से उपलब्ध हों।








