कोलकाता,अंग भारत। आरजी कर मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल की महिला चिकित्सक की संदिग्ध मौत के मामले में सबूतों को नष्ट करने और आपराधिक साजिश रचने के आरोपों के तहत एक नई प्राथमिकी (FIR) दर्ज की गई है। मृतका के पिता ने बैरकपुर पुलिस आयुक्तालय में लिखित शिकायत देकर पूर्व विधायक निर्मल घोष समेत तीन लोगों के खिलाफ गंभीर शिकायत दर्ज कराई है। यह पूरी कानूनी कार्रवाई मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी के सीधे निर्देश के बाद शुरू हुई है। बैरकपुर पुलिस कमिश्नरेट ने मंगलवार सुबह इस नए मामले की पुष्टि करते हुए विस्तृत जांच शुरू कर दी है। राजनीतिक सत्ता में बदलाव के बाद आरजी कर प्रकरण की पुरानी फाइलों को फिर से खोला जा रहा है ताकि दबे हुए तथ्यों को सामने लाया जा सके।
श्मशान की संदिग्ध गतिविधियां
उत्तर 24 परगना के घोला थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले नाटागढ़ कदमतला श्मशान घाट पर मृतका के अंतिम संस्कार के दौरान नियमों को ताक पर रखने का आरोप लगा है। मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने खुले तौर पर इस श्मशान घाट पर की गई जल्दबाजी और नियमों की अनदेखी पर तीखे सवाल उठाए हैं। उनके अनुसार, शवदाह गृह की आधिकारिक सूची में मृतका का शव अंतिम संस्कार के लिए तीसरे स्थान पर दर्ज था। इसके बावजूद, प्रशासनिक मिलीभगत से इस क्रम संख्या को अचानक बदलकर पहला नंबर कर दिया गया। इस बदलाव के बाद रात के अंधेरे में ही बेहद जल्दबाजी में शव का दाह संस्कार कर दिया गया। इस जल्दबाजी के पीछे किसी गहरे राज को छिपाने की आशंका व्यक्त की जा रही है। इस पूरी प्रक्रिया में कई कानूनी और सामान्य प्रक्रियाओं की अनदेखी की गई, जो सामान्य परिस्थितियों में आवश्यक होती हैं। इस संदिग्ध अंतिम संस्कार को लेकर पुलिस प्रशासन ने जांच के लिए निम्नलिखित बिंदुओं को अपनी प्राथमिकी का आधार बनाया है:
- प्राथमिकता सूची में बदलाव: शवदाह के लिए तय क्रम संख्या को अचानक तीन से बदलकर एक क्यों किया गया?
- अनिवार्य हस्ताक्षरों का अभाव: अंतिम संस्कार के सरकारी दस्तावेजों पर मृतका के किसी भी करीबी या सगे-संबंधी के हस्ताक्षर क्यों नहीं लिए गए?
- शुल्क भुगतान की पहेली: श्मशान घाट पर दाह संस्कार के लिए निर्धारित शुल्क मृतका के परिवार से क्यों नहीं लिया गया?
- भुगतान का स्रोत: यदि परिवार ने भुगतान नहीं किया, तो श्मशान घाट के शुल्कों का भुगतान किसने और किस खाते से किया?
रसूखदारों पर कसता शिकंजा
इस मामले में नामजद आरोपियों में तत्कालीन पानीहाटी तृणमूल कांग्रेस विधायक निर्मल घोष, सोमनाथ दे और संजीव मुखर्जी शामिल हैं। इन तीनों व्यक्तियों पर श्मशान घाट की पूरी प्रक्रिया को प्रभावित करने और साक्ष्यों को नष्ट करने में सहयोग करने का सीधा आरोप है। पुलिस अब इन तीनों आरोपियों के कॉल रिकॉर्ड्स, श्मशान घाट पर उनकी मौजूदगी और उनके द्वारा दिए गए निर्देशों की बारीकी से जांच कर रही है।
“मृतका के पिता ने अपनी शिकायत में साफ तौर पर कहा है कि उनकी बेटी को न्याय दिलाने के मार्ग में प्रभावशाली लोगों ने जानबूझकर बाधाएं खड़ी की थीं। श्मशान घाट पर बिना किसी वैध प्रक्रिया के अंतिम संस्कार करना इसी बड़ी साजिश का एक हिस्सा था।”
इस जांच के दायरे में केवल ये तीन नामजद आरोपी ही नहीं हैं, बल्कि उनके साथ उस रात श्मशान घाट पर मौजूद अन्य स्थानीय लोग और श्मशान कर्मी भी शामिल हैं। पुलिस उन गवाहों के बयान दर्ज कर रही है जो उस समय वहां मौजूद थे और जिन्होंने इस पूरी प्रक्रिया को अपनी आंखों से देखा था।
पुलिस अधिकारियों पर कार्रवाई
मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए राज्य प्रशासन ने पहले ही अपनी आंतरिक जांच के बाद कर्तव्य में लापरवाही बरतने के आरोप में तीन वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को सस्पेंड कर दिया है। इन अधिकारियों पर आरोप है कि उन्होंने घटना के शुरुआती घंटों में न केवल सबूतों की सुरक्षा में कोताही बरती, बल्कि श्मशान घाट पर नियमों के उल्लंघन को मूकदर्शक बनकर देखते रहे। उत्तर 24 परगना के पानीहाटी स्थित लोकसंस्कृति भवन में मृतका की दूसरी बरसी पर एक श्रद्धांजलि सभा आयोजित की गई थी। इस सभा में मुख्यमंत्री शुभेन्दु अधिकारी ने घोषणा की कि बैरकपुर के पुलिस आयुक्त के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया जाएगा। यह जांच टीम केंद्रीय जांच एजेंसियों द्वारा की जा रही जांच के समानांतर काम करेगी। राज्य पुलिस का मुख्य ध्यान इस बात पर केंद्रित रहेगा कि श्मशान घाट की घटना में किन लोगों ने प्रत्यक्ष या परोक्ष रूप से साक्ष्य मिटाने में मदद की। इस मामले में आपराधिक साजिश और साक्ष्य नष्ट करने की धाराओं के तहत मामला दर्ज किया गया है। आने वाले दिनों में पुलिस फाइलों और दस्तावेजों के फोरेंसिक विश्लेषण से कई नए खुलासे होने की संभावना है।







