पटना,अंग भारत। बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने मंगलवार को शहीद दिवस के पावन अवसर पर राजधानी पटना के ऐतिहासिक सचिवालय स्थित शहीद स्मारक परिसर में पहुंचकर अमर स्वतंत्रता सेनानियों को भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस राजकीय समारोह के दौरान मुख्यमंत्री ने देश की आजादी के आंदोलन में अपने प्राणों का बलिदान देने वाले वीर सपूतों की प्रतिमाओं पर माल्यार्पण किया। उन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए हंसते-हंसते प्राण न्यौछावर करने वाले इन अमर शहीदों के अदम्य साहस और शौर्य को नमन करते हुए उनके प्रति अपनी गहरी कृतज्ञता प्रकट की। यह समारोह उन सात महान छात्रों के सम्मान में आयोजित किया गया था, जिन्होंने भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान तिरंगा फहराने के प्रयास में ब्रिटिश पुलिस की गोलियों का सामना किया था।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
11 अगस्त 1942 का दिन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है। महात्मा गांधी के ‘भारत छोड़ो’ आंदोलन के आह्वान पर पूरे देश में क्रांति की लहर दौड़ गई थी। इसी आंदोलन के तहत पटना के कुछ युवा और साहसी छात्रों ने अंग्रेजी हुकूमत की परवाह न करते हुए पटना सचिवालय के पूर्वी गेट पर तिरंगा झंडा फहराने का फैसला लिया। तत्कालीन ब्रिटिश जिला मजिस्ट्रेट डब्ल्यू. जी. आर्चर के आदेश पर पुलिस ने इन निहत्थे छात्रों पर अंधाधुंध गोलियां बरसाईं। इस बर्बर कार्रवाई में सात छात्रों की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। इन जांबाज युवाओं के इस महान बलिदान ने पूरे बिहार और देश में स्वतंत्रता की ज्वाला को और अधिक प्रज्वलित कर दिया।
शहीद स्मारक उन सात अमर सेनानियों की याद दिलाता है जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपनी जान दी:
- उमाकांत प्रसाद सिंह: सारण जिले के नरेंद्रपुर गांव के रहने वाले थे और राम मोहन राय सेमिनरी स्कूल के छात्र थे।
- रामानंद सिंह: पटना जिले के शहादतपुर गांव के निवासी और राम मोहन राय सेमिनरी स्कूल के ही छात्र थे।
- सतीश प्रसाद झा: भागलपुर जिले के खडहरा गांव के थे और पटना कॉलेजिएट स्कूल में पढ़ते थे।
- जगतपति कुमार: औरंगाबाद जिले के खराटी गांव के निवासी और बिहार नेशनल कॉलेज के छात्र थे।
- देवीपद चौधरी: इनका जन्म सिलहट में हुआ था और ये पटना के मिलर हाई स्कूल के छात्र थे।
- राजेंद्र सिंह: सारण जिले के पिपरा गांव के रहने वाले थे और पटना हाई स्कूल में अध्ययनरत थे।
- राम गोविंद सिंह: पटना जिले के दशरथा गांव के निवासी और पुनपुन हाई स्कूल के छात्र थे।
शहीदों का विवरण
इन सात वीर जवानों के संक्षिप्त परिचय और उनके शैक्षणिक संस्थानों की जानकारी नीचे दी गई तालिका में देखी जा सकती है:
| शहीद का नाम | शैक्षणिक संस्थान | मूल जिला |
|---|---|---|
| उमाकांत प्रसाद सिंह | राम मोहन राय सेमिनरी, पटना | सारण |
| रामानंद सिंह | राम मोहन राय सेमिनरी, पटना | पटना |
| सतीश प्रसाद झा | पटना कॉलेजिएट स्कूल | भागलपुर |
| जगतपति कुमार | बिहार नेशनल कॉलेज, पटना | औरंगाबाद |
| देवीपद चौधरी | मिलर हाई स्कूल, पटना | सिलहट (अब बांग्लादेश) |
| राजेंद्र सिंह | पटना हाई स्कूल | सारण |
| राम गोविंद सिंह | पुनपुन हाई स्कूल, पटना | पटना |
समारोह में भागीदारी
इस गरिमामयी राजकीय समारोह में राज्य सरकार के कई वरिष्ठ मंत्रियों, विधायकों और विभिन्न प्रशासनिक अधिकारियों ने हिस्सा लिया। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के साथ बिहार के उप मुख्यमंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने भी शहीदों की प्रतिमाओं पर पुष्पांजलि अर्पित की। इनके साथ ही बिहार विधान परिषद के सभापति अवधेश नारायण सिंह और बिहार विधानसभा के उपाध्यक्ष नरेंद्र नारायण यादव ने भी अमर सेनानियों को नमन किया।
समारोह में उपस्थित अन्य प्रमुख गणमान्य व्यक्तियों में शामिल थे:
- भवन निर्माण मंत्री लेशी सिंह
- खाद्य एवं उपभोक्ता संरक्षण मंत्री अशोक चौधरी
- विज्ञान, प्रावैधिकी एवं तकनीकी शिक्षा मंत्री शीला कुमारी
- सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव
- विधायक श्याम रजक
इन सभी नेताओं और जनप्रतिनिधियों ने देश की आजादी में बिहार के योगदान को याद किया। उपस्थित वक्ताओं ने अपने विचार साझा करते हुए कहा कि इन सात छात्रों का बलिदान आने वाली पीढ़ियों को हमेशा राष्ट्र सेवा और देशभक्ति के मार्ग पर चलने के लिए प्रेरित करता रहेगा।
अमर ज्योति पर अंजलि
सचिवालय स्थित शहीद स्मारक पर माल्यार्पण करने के उपरांत मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और अन्य गणमान्य लोग बिहार विधानमंडल परिसर पहुंचे। वहां स्थित शहीद पार्क में उन्होंने स्थापित अमर ज्योति के समक्ष गहरी श्रद्धा के साथ पुष्पचक्र अर्पित किया। इस दौरान सुरक्षा बलों की टुकड़ी ने शहीदों के सम्मान में शस्त्र उल्टे कर सलामी दी और शोक धुन बजाई। वहां मौजूद सभी लोगों ने देश की स्वतंत्रता और अखंडता की रक्षा के लिए दो मिनट का मौन रखकर वीर जवानों के संघर्ष और उनके अतुलनीय राष्ट्रप्रेम को याद किया।
बिहार सरकार हर साल इस दिन को राजकीय समारोह के रूप में मनाकर युवा पीढ़ी को अपने इतिहास से जोड़ने का प्रयास करती है। इन सात छात्रों की वीरता की गाथा आज भी पटना की दीवारों और लोगों के दिलों में जीवित है। पटना सचिवालय के सामने खड़ा यह विशाल कांस्य स्मारक हमें याद दिलाता है कि आजादी की कीमत कितनी भारी थी और इसे अक्षुण्ण रखना हर नागरिक का परम कर्तव्य है।







