नई दिल्ली,अंग भारत। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, केंद्रीय गृह एवं सहकारितामंत्री अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन सहित कई नेताओं ने मंगलवार को अमर क्रांतिकारी शहीद खुदीराम बोस के बलिदान दिवस पर उन्हें श्रद्धा सुमन अर्पित किए। 19 साल की कम उम्र में देश की स्वतंत्रता के लिए हंसते-हंसते फांसी के फंदे पर झूल जाने वाले इस महान सपूत का बलिदान भारतीय इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है।
बलिदान और राष्ट्रवाद
शहीद खुदीराम बोस का नाम आते ही हर भारतीय का मस्तक गर्व से ऊंचा हो जाता है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने अपने आधिकारिक एक्स हैंडल पर उनके प्रति सम्मान व्यक्त करते हुए लिखा कि मातृभूमि के लिए हँसते-हँसते जीवन न्योछावर कर देने वाले इस वीर सपूत का त्याग देश की राष्ट्रीय चेतना को सदैव प्रेरित करता रहेगा। गृहमंत्री अमित शाह ने भी उनके योगदान को याद करते हुए कहा कि मात्र 18-19 वर्ष की अल्पायु में ही उन्होंने सशस्त्र क्रांति का बिगुल फूंक दिया था। उनके अदम्य साहस ने ब्रिटिश साम्राज्य की जड़ों को हिलाकर रख दिया था।
“भारत माता को गुलामी की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए अपने प्राणों की आहुति देने वाले खुदीराम बोस का अदम्य साहस और राष्ट्र के प्रति समर्पण सदैव स्मरणीय रहेगा।” – राजनाथ सिंह, रक्षामंत्री
क्रांतिकारी जीवन के तथ्य
खुदीराम बोस का जीवन अत्यंत प्रेरणादायक रहा है। उनके संघर्ष और विचारधारा से जुड़े कुछ प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं:
- उनका जन्म 3 दिसंबर 1889 को पश्चिम बंगाल के मिदनापुर जिले के हबीबपुर गांव में हुआ था।
- उन्होंने छोटी आयु में ही ब्रिटिश अत्याचारों के खिलाफ आवाज उठाई और अनुशीलन समिति से जुड़ गए।
- मुजफ्फरपुर बम कांड के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया था।
- 11 अगस्त 1908 को उन्हें मुजफ्फरपुर जेल में फांसी दी गई।
- फांसी के समय उनके चेहरे पर कोई शिकन नहीं थी, वे गीता हाथ में लेकर शहीद हुए थे।
नेताओं के विचार
भारतीय राजनीति के वरिष्ठ नेताओं ने खुदीराम बोस के व्यक्तित्व को युवाओं के लिए एक दिशा-निर्देश बताया है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि इतनी कम आयु में उन्होंने जिस निर्भीकता और दृढ़ संकल्प का परिचय दिया, वह आने वाली पीढ़ियों के लिए त्याग का बड़ा उदाहरण है। वहीं, केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने उनके ओजस्वी विचारों को याद करते हुए कहा कि उनका जीवन राष्ट्र सेवा हेतु युवाओं को हमेशा प्रेरणा देगा। इसके अतिरिक्त, केंद्रीय कपड़ा मंत्री गिरिराज सिंह ने भी अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि अमर बलिदानी खुदीराम बोस का राष्ट्रप्रेम देशवासियों के लिए एक धरोहर है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने उनके निर्भीक व्यक्तित्व को रेखांकित किया और बताया कि उनका अटूट संकल्प आज भी युवाओं में राष्ट्रप्रेम की भावना जागृत करता है। इतिहास के पन्नों में खुदीराम बोस का नाम केवल एक क्रांतिकारी के रूप में नहीं, बल्कि एक ऐसे प्रतीक के रूप में दर्ज है, जिसने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी। उनके बलिदान ने न केवल उस समय के युवाओं को झकझोर दिया था, बल्कि आज भी वे देशभक्ति की परिभाषा के तौर पर याद किए जाते हैं। उनके संघर्ष की कहानी हमें यह सिखाती है कि देश सेवा के लिए उम्र का कोई बंधन नहीं होता। मुजफ्फरपुर की जेल में दी गई उनकी शहादत ने भारत के स्वतंत्रता संग्राम की दिशा बदल दी थी। आज देश उन्हें कृतज्ञता के साथ याद कर रहा है। उनकी गौरव गाथा आने वाले कई दशकों तक भारत की नई पीढ़ियों को अपने देश के प्रति वफादार रहने के लिए प्रोत्साहित करती रहेगी।







