सामुदायिक रसोई, स्वास्थ्य शिविर और नाव संचालन को लेकर दिए सख्त निर्देश
कटिहार,अंग भारत। गंगा, कोसी समेत जिले से होकर गुजरने वाली अन्य नदियों के जलस्तर में बढ़ोतरी के कारण कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति बनी हुई है। बाढ़ प्रभावित परिवारों को राहत पहुंचाने और उन्हें सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने को लेकर जिला प्रशासन ने अपनी तैयारियां तेज कर दी हैं। इसी क्रम में सोमवार को अमदाबाद प्रखंड सभागार में जिला पदाधिकारी आशुतोष द्विवेदी की अध्यक्षता में बाढ़ को लेकर समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में डीएम ने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिया कि राहत और बचाव कार्यों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी।
प्रभावित परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाएं
डीएम ने कहा कि बाढ़ की स्थिति को देखते हुए सबसे पहले लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित की जाए। जिन इलाकों में पानी बढ़ रहा है, वहां रहने वाले परिवारों को आवश्यकता के अनुसार सुरक्षित स्थानों, राहत शिविरों या ऊंचे स्थानों पर पहुंचाया जाए। उन्होंने अधिकारियों को लगातार क्षेत्र में निगरानी रखने और स्थानीय स्तर पर लोगों से संपर्क बनाए रखने का निर्देश दिया।उन्होंने विशेष रूप से गर्भवती महिलाओं, नवजात बच्चों, दिव्यांगों और बुजुर्गों को प्राथमिकता के आधार पर सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने को कहा। ऐसे लोगों को निकालने में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए।
सामुदायिक रसोई में दो वक्त मिले भोजन
बैठक में सामुदायिक रसोई की व्यवस्था की भी समीक्षा की गई। डीएम ने निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित लोगों को सुबह और शाम नियमित रूप से पका हुआ भोजन उपलब्ध कराया जाए। रसोई में आने वाले लाभुकों का पंजीकरण भी किया जाए, ताकि यह पता चल सके कि कितने लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।उन्होंने रसोई की साफ-सफाई और भोजन की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान देने को कहा। डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिया कि सामुदायिक रसोई में पूड़ी और अन्य तले हुए खाद्य पदार्थों की आपूर्ति नहीं की जाएगी। लोगों को साफ और पौष्टिक भोजन उपलब्ध कराने की व्यवस्था सुनिश्चित करने को कहा गया।
स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर विशेष तैयारी
बाढ़ के दौरान बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। इसे देखते हुए डीएम ने प्रभावित क्षेत्रों में नियमित स्वास्थ्य शिविर लगाने का निर्देश दिया। शिविरों में पर्याप्त मात्रा में जरूरी दवाएं उपलब्ध रखने को कहा गया है।इसके साथ ही ब्लीचिंग पाउडर, हैलोजन टैबलेट और अन्य जरूरी सामग्री की उपलब्धता सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। आपात स्थिति से निपटने के लिए एंबुलेंस और बोट एंबुलेंस की व्यवस्था भी दुरुस्त रखने को कहा गया, ताकि पानी से घिरे इलाकों से मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाया जा सके।
पशुओं के लिए भी चारा और इलाज की व्यवस्था
डीएम ने कहा कि बाढ़ के समय केवल लोगों की ही नहीं, बल्कि पशुओं की सुरक्षा भी जरूरी है। प्रभावित क्षेत्रों में पशु चिकित्सा शिविर लगाने और पशुओं के लिए पर्याप्त चारे की व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया।उन्होंने अधिकारियों को बाढ़ के कारण क्षतिग्रस्त हुई सड़कों की जानकारी जुटाकर आवश्यकतानुसार मरम्मत कराने को कहा। इसके अलावा खेतों में पानी भरने से होने वाली फसल क्षति का भी आकलन करने और पात्र किसानों को नियमानुसार मुआवजा उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू करने का निर्देश दिया गया।
नाव संचालन में सुरक्षा से समझौता नहीं
बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में आवागमन के लिए नाव और मोटरबोट का इस्तेमाल किया जा रहा है। डीएम ने इनके संचालन में विशेष सावधानी बरतने को कहा। उन्होंने स्पष्ट निर्देश दिया कि नावों में क्षमता से अधिक लोगों को बैठाने यानी ओवरलोडिंग की अनुमति नहीं दी जाएगी।अनिबंधित नावों के संचालन पर भी रोक लगाने को कहा गया। साथ ही सूर्यास्त के बाद नावों का परिचालन बंद रखने का निर्देश दिया गया, ताकि अंधेरे में किसी तरह की दुर्घटना की आशंका को कम किया जा सके। नावों के संचालन के दौरान सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन कराने की जिम्मेदारी संबंधित अधिकारियों को दी गई।
पात्र परिवारों को मिलेंगे सात हजार रुपये
डीएम ने बताया कि बाढ़ प्रभावित पात्र परिवारों को सरकार की ओर से 7,000 रुपये की आनुग्रहिक राहत राशि डीबीटी के माध्यम से उपलब्ध कराई जाएगी। उन्होंने अधिकारियों को लाभुकों की सूची तैयार करने में विशेष सावधानी बरतने को कहा।उन्होंने निर्देश दिया कि सूची में दोहरी या फर्जी प्रविष्टि किसी भी स्थिति में नहीं होनी चाहिए। साथ ही यह भी सुनिश्चित किया जाए कि बाढ़ से प्रभावित कोई भी पात्र परिवार राहत राशि से वंचित न रह जाए। इसके लिए स्थानीय स्तर पर सूची का सत्यापन करने और जरूरत के अनुसार सुधार करने पर जोर दिया गया।
जनप्रतिनिधियों से भी समन्वय का निर्देश
बैठक में अधिकारियों के साथ स्थानीय जनप्रतिनिधियों से भी बाढ़ की स्थिति और राहत कार्यों को लेकर जानकारी ली गई। डीएम ने कहा कि बाढ़ जैसी आपदा में प्रशासन और जनप्रतिनिधियों के बीच बेहतर समन्वय जरूरी है। स्थानीय स्तर पर मिलने वाली सूचनाओं पर तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए, ताकि प्रभावित लोगों को समय पर मदद मिल सके।बैठक में अपर समाहर्ता, अपर समाहर्ता (आपदा प्रबंधन), मनिहारी के एसडीओ, सिविल सर्जन, सीओ, बीडीओ सहित विभिन्न विभागों के पदाधिकारी, मुखिया और जिला पार्षद सदस्य मौजूद रहे। डीएम ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि बाढ़ की स्थिति पर लगातार नजर रखें और जरूरत के अनुसार तत्काल राहत एवं बचाव कार्य सुनिश्चित करें।







