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बालिका शिक्षा को लेकर कार्यशाला का शुभारंभ, बिहार-झारखंड की 50 से अधिक महिला आचार्य शामिल

पटना,अंग भारत। बालिका शिक्षा के माध्यम से सशक्त, स्वावलंबी, संस्कारित और विकसित राष्ट्र के निर्माण के उद्देश्य से सर्व शिक्षा सेवा न्यास की ओर से आयोजित तीन दिवसीय बालिका शिक्षा कार्यशाला का शनिवार को पटना में शुभारंभ हुआ। कार्यशाला का आयोजन विद्या भारती, बिहार के तत्वावधान में किया जा रहा है। उद्घाटन सत्र में वैदिक मंत्रोच्चार और दीप प्रज्ज्वलन के साथ कार्यक्रम की विधिवत शुरुआत हुई।कार्यशाला में बिहार और झारखंड के विभिन्न जिलों से आए सरस्वती विद्या मंदिरों में कार्यरत 50 से अधिक महिला आचार्य हिस्सा ले रही हैं। तीन दिनों तक चलने वाली इस कार्यशाला में बालिका शिक्षा के वर्तमान परिदृश्य, चुनौतियों और भविष्य की कार्ययोजना पर गहन विमर्श होगा।कार्यक्रम के उद्घाटन सत्र में अखिल भारतीय बालिका शिक्षा प्रमुख रेखा चूड़ासामा, बालिका शिक्षा के मार्गदर्शक अवनीश भटनागर और विद्या भारती के क्षेत्रीय संगठन मंत्री ख्याली राम बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित रहे। कार्यक्रम की अध्यक्षता विद्या भारती बिहार की वरिष्ठ कार्यकर्ता डॉ. रूबी ने की।

बिहार-झारखंड के विद्या मंदिरों की भागीदारी -: कार्यशाला में पटना, गया, मुजफ्फरपुर, भागलपुर, दरभंगा, पूर्णिया, रांची, जमशेदपुर, धनबाद, बोकारो समेत कई जिलों के सरस्वती शिशु मंदिर और विद्या मंदिरों से महिला आचार्य पहुंची हैं। इनमें अधिकांश लंबे समय से बालिका शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रही हैं।आयोजकों के अनुसार, इस कार्यशाला का मुख्य उद्देश्य जमीनी स्तर पर काम कर रही आचार्यों के अनुभवों को साझा करना और एक समान कार्यपद्धति विकसित करना है। विद्या मंदिरों में पढ़ने वाली बालिकाओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, ऐसे में उनकी विशेष शैक्षिक और सामाजिक जरूरतों को समझना जरूरी हो गया है।सर्व शिक्षा सेवा न्यास पिछले कई वर्षों से शिक्षा के क्षेत्र में काम कर रहा है। विद्या भारती के साथ मिलकर न्यास ने बालिका शिक्षा को एक अलग और महत्वपूर्ण आयाम के रूप में स्थापित करने का प्रयास शुरू किया है।

शिक्षा का अर्थ केवल साक्षरता नहीं -: कार्यशाला के उद्घाटन सत्र को संबोधित करते हुए बालिका शिक्षा के मार्गदर्शक अवनीश भटनागर ने कहा कि बालिका शिक्षा को केवल किताबी ज्ञान या परीक्षा में प्राप्त अंकों तक सीमित नहीं रखा जा सकता।उन्होंने कहा, “बालिका शिक्षा का वास्तविक अर्थ है बालिकाओं के व्यक्तित्व का समग्र विकास। उनकी अंतर्निहित प्रतिभा को पहचानना, उसे निखारना और जीवन-मूल्यों के साथ जोड़ना। शिक्षा ऐसी होनी चाहिए जो उन्हें परिवार, समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों को समझने और निभाने के योग्य बनाए।”भटनागर ने कहा कि आज की बालिका कल की माँ, शिक्षिका, समाजसेविका और राष्ट्र निर्माता है। इसलिए उसे शारीरिक रूप से स्वस्थ, मानसिक रूप से सशक्त और भावनात्मक रूप से संतुलित बनाने की जरूरत है।

शिक्षित बालिका से समाज में सकारात्मक बदलाव -: अखिल भारतीय बालिका शिक्षा प्रमुख रेखा चूड़ासामा ने अपने संबोधन में कहा कि जब एक बालिका शिक्षित होती है तो केवल एक व्यक्ति शिक्षित नहीं होता, बल्कि पूरा परिवार शिक्षित होता है।उन्होंने कहा कि शिक्षित, समर्थ और संस्कारित बालिका न केवल अपने परिवार को सही दिशा देती है, बल्कि समाज में सकारात्मक बदलाव की वाहक भी बनती है। बालिका जब आत्मनिर्भर बनती है तो वह दूसरों के लिए प्रेरणा बनती है।चूड़ासामा ने कहा कि बालिका शिक्षा को राष्ट्र निर्माण की दीर्घकालिक प्रक्रिया के रूप में देखना आवश्यक है। यह निवेश भविष्य के लिए है। यदि हम विकसित भारत का सपना देख रहे हैं तो उसमें बालिकाओं की भूमिका को केंद्र में रखना होगा। उन्होंने विद्या मंदिरों में बालिकाओं के लिए चलाए जा रहे संस्कार केंद्र, आत्मरक्षा प्रशिक्षण और नेतृत्व विकास के कार्यक्रमों का भी उल्लेख किया।

भारतीय दृष्टिकोण पर आधारित शिक्षा पर जोर -: कार्यशाला की अध्यक्षता कर रहीं डॉ. रूबी ने कहा कि आज बालिकाओं की शैक्षिक और सामाजिक आवश्यकताएं तेजी से बदल रही हैं। उन्हें आधुनिक शिक्षा के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और मूल्यों से जोड़ना समय की मांग है।उन्होंने कहा कि कार्यशाला में भारतीय दृष्टिकोण पर आधारित शिक्षा, व्यक्तित्व विकास, जीवन-कौशल, आत्मरक्षा, नेतृत्व क्षमता और सामाजिक सहभागिता जैसे विषयों पर विशेष चर्चा की जाएगी।डॉ. रूबी ने बताया कि कई जगहों पर बालिकाएं आज भी संकोच, असुरक्षा और आत्मविश्वास की कमी से जूझती हैं। विद्यालय स्तर पर ही यदि उन्हें मंच, जिम्मेदारी और मार्गदर्शन दिया जाए तो उनमें नेतृत्व क्षमता विकसित होती है। इस दिशा में महिला आचार्यों की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है क्योंकि बालिकाएं अपनी शिक्षिका को ही अपना आदर्श मानती हैं।

नई कार्ययोजना पर होगा मंथन -: तीन दिवसीय कार्यशाला के दौरान अलग-अलग सत्रों में समूह चर्चा, अनुभव साझा करने और कार्ययोजना निर्माण का कार्यक्रम रखा गया है। इसमें बालिकाओं के लिए स्वास्थ्य, स्वच्छता, किशोरावस्था की चुनौतियां, करियर मार्गदर्शन और सामाजिक कुरीतियों के खिलाफ जागरूकता जैसे विषयों पर भी बात होगी।आयोजकों ने विश्वास जताया कि इस कार्यशाला में साझा किए गए विचार और जमीनी अनुभव बालिका शिक्षा के क्षेत्र में नई दृष्टि और ऊर्जा देंगे। इससे बिहार-झारखंड में विद्या मंदिरों में बालिकाओं के सर्वांगीण विकास के लिए एक प्रभावी और व्यावहारिक कार्ययोजना तैयार करने में मदद मिलेगी।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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