अमरपुर/बांका, अंगभारत। अमरपुर अंचल कार्यालय के सभागार कक्ष में शनिवार को जनता दरबार का आयोजन किया गया। जमीन से जुड़े विवादों को लेकर हर शनिवार की तरह इस बार भी कई गांवों से लोग अपनी फरियाद लेकर पहुंचे थे। अंचल निरीक्षक राजेश कुमार झा ने सभी मामलों की सुनवाई की।
तीन पुराने विवादों का मौके पर निपटारा -: जनता दरबार में सबसे बड़ी बात रही कि तीन मामलों का मौके पर ही निष्पादन कर दिया गया। इसमें पवई गांव की समता देवी, चिरैया गांव की बीबी नुरैशा और मनसारपुर गांव की प्रमिला देवी के मामले शामिल हैं।तीनों महिलाओं का अपने-अपने गांव में जमीन को लेकर लंबे समय से विवाद चल रहा था। कभी खतियान में नाम को लेकर तो कभी बंटवारे को लेकर पेच फंसा हुआ था। शनिवार को दोनों पक्षों को आमने-सामने बैठाया गया। कागजात देखे गए और आपसी सहमति से मामला खत्म कर दिया गया। फैसला होते ही तीनों परिवारों ने राहत की सांस ली।
दो पुराने और तीन नए आवेदन आए -: सीआई राजेश कुमार झा ने बताया कि इस बार जनता दरबार में पहले से दो आवेदन लंबित थे। वहीं शनिवार को तीन नए आवेदन और आए। इस तरह कुल पांच मामलों की सुनवाई हुई।जो लोग पहले से नोटिस पाकर आए थे, उन्होंने अपने केवाला, खतियान, रसीद और दाखिल-खारिज के कागजात दिखाए। सीआई ने एक-एक कागज को बारीकी से देखा। जिनके कागजात पूरे थे, उनका निपटारा कर दिया गया।
अधूरे कागजात वालों को अगली तारीख मिली -: दो मामलों में कागजात अधूरे मिले। दोनों पक्षों में से एक पक्ष मूल दस्तावेज नहीं लाया था। ऐसे में सीआई ने उन्हें सख्त निर्देश दिया कि अगले शनिवार को सभी जरूरी दस्तावेज के साथ हाजिर हों।उन्होंने कहा कि बिना कागजात देखे कोई फैसला नहीं किया जा सकता। इसलिए फरियादी अपने जमीन से जुड़े सभी कागजात जैसे जमाबंदी, रसीद, परिमार्जन की कॉपी जरूर लेकर आएं। ताकि बार-बार दौड़ना न पड़े।
हर शनिवार लगता है जनता दरबार -: बता दें कि सरकार के आदेश पर हर शनिवार अंचल स्तर पर जनता दरबार लगाया जा रहा है। इसका मकसद है कि लोगों को छोटे-छोटे जमीन विवाद के लिए थाना और कोर्ट न जाना पड़े। गांव में ही मामला सुलझ जाए।इस दरबार में दाखिल-खारिज, जमाबंदी सुधार, बंटवारा, अतिक्रमण और परिमार्जन से जुड़े मामलों की सुनवाई हो रही है। जो मामला अंचल स्तर पर खत्म होने लायक होता है, उसे वहीं खत्म कर दिया जाता है।
फरियादियों ने की पहल की सराहना -: जनता दरबार में राजस्व कर्मचारी कैसर आलम, दलपति अविनाश कुमार सिंह समेत कई पंचायतों के फरियादी मौजूद थे। ग्रामीणों का कहना है कि इस पहल से काफी सुविधा हुई है। पहले एक छोटी गलती सुधारने के लिए भी महीनों चक्कर लगाना पड़ता था। अब शनिवार को एक ही जगह पर अधिकारी मिल जाते हैं और बात सुन लेते हैं।बांका में जमीन विवाद के मामले वैसे भी ज्यादा हैं। कई बार मामूली झगड़ा बड़ी घटना में बदल जाता है। प्रशासन की कोशिश है कि ऐसे विवादों को शुरू में ही खत्म कर दिया जाए, ताकि गांव में शांति बनी रहे।







