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मतदाता सूची विवाद पर ममता बनर्जी लगातार दूसरे दिन धरने पर, भाजपा और चुनाव आयोग पर साधा निशाना

कोलकाता,अंग भारत। पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी मतदाता सूची पुनरीक्षण में कथित अनियमितताओं के विरोध में कोलकाता के धर्मतला में लगातार दूसरे दिन धरने पर बैठी हैं। उनका यह आंदोलन राज्य में आगामी विधानसभा चुनावों के लिए तैयार की जा रही मतदाता सूची में पारदर्शिता की कमी और मतदाताओं के नाम काटने की प्रक्रिया के खिलाफ एक सीधा और कड़ा विरोध प्रदर्शन है। ममता बनर्जी ने साफ तौर पर भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और चुनाव आयोग पर यह आरोप लगाया है कि वे एक सुनियोजित साजिश के तहत बंगाल के लाखों वैध मतदाताओं को उनके मताधिकार से वंचित करने का प्रयास कर रहे हैं।

धरने का मुख्य उद्देश्य

यह धरना प्रदर्शन चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ के प्रस्तावित कोलकाता दौरे से कुछ समय पहले शुरू किया गया है, जो एक रणनीतिक कदम माना जा रहा है। ममता बनर्जी का धरना प्रतिदिन सुबह 10 बजे से रात 8 बजे तक जारी रहता है। पार्टी का स्पष्ट कहना है कि 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले जो ‘विशेष गहन पुनरीक्षण’ प्रक्रिया चल रही है, वह बेहद जल्दबाजी और अव्यवस्थित तरीके से की जा रही है। तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य सत्ताधारी दल के खिलाफ वोट करने वाले लोगों को सूची से बाहर करना है।

आरोप और भाजपा की भूमिका

ममता बनर्जी ने मंच से जनता को संबोधित करते हुए कहा कि उनके अधिकारों की रक्षा के लिए वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं। उन्होंने दावा किया कि चुनाव आयोग और भाजपा मिलकर लोकतांत्रिक मूल्यों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। तृणमूल कांग्रेस के समर्थकों का तर्क है कि जिस तरह से नामों को हटाया जा रहा है, वह पूरी तरह से एकतरफा है। उनके अनुसार:

  • पुरानी और त्रुटिहीन सूचियों को बिना किसी ठोस कारण के बदला जा रहा है।
  • बड़ी संख्या में मतदाताओं को ‘निर्णयाधीन’ (Doubtful) श्रेणी में रखा जा रहा है।
  • आम नागरिकों को सूची में नाम जुड़वाने के लिए अत्यधिक जटिल प्रक्रियाओं का सामना करना पड़ रहा है।

अभिषेक बनर्जी का संबोधन

तृणमूल कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव अभिषेक बनर्जी ने भी इस विरोध प्रदर्शन में सक्रिय भूमिका निभाई है। उन्होंने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि मतदाता सूची से नाम हटाने की यह प्रक्रिया सिर्फ एक तकनीकी मुद्दा नहीं है, बल्कि यह एक राजनीतिक एजेंडा है। अभिषेक बनर्जी के अनुसार, यदि अंतिम सूची में लाखों नाम काट दिए जाते हैं, तो यह सीधे तौर पर आने वाले विधानसभा चुनावों की निष्पक्षता पर सवालिया निशान खड़ा करेगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि चुनाव आयोग को इस पूरे मामले में पूर्ण पारदर्शिता बरतनी चाहिए और मतदाताओं को अपनी बात रखने का अवसर देना चाहिए।

विपक्ष और बुद्धिजीवियों का समर्थन

धर्मतला का यह धरना स्थल केवल राजनीतिक नेताओं तक सीमित नहीं रहा है। इस मंच पर तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ-साथ राज्य के कई बुद्धिजीवी, कलाकार और विभिन्न सामाजिक क्षेत्रों के प्रतिनिधि भी देखे गए हैं। यह दर्शाता है कि मतदाता सूची का यह विवाद समाज के हर तबके के लिए चिंता का विषय बन चुका है। धरना स्थल पर मौजूद लोगों का कहना है कि मतदान का अधिकार ही लोकतंत्र की नींव है और यदि उसी में छेड़छाड़ की जाएगी, तो आम जनता की आवाज दब जाएगी।

चुनाव आयोग से क्या मांग?

तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग के सामने कई महत्वपूर्ण मांगें रखी हैं ताकि लोकतांत्रिक प्रक्रिया की पवित्रता बनी रहे:

मांग का विषय विवरण
पारदर्शिता नाम काटने या सूची से बाहर करने की पूरी प्रक्रिया का डेटा सार्वजनिक करना।
सुनवाई का मौका ‘निर्णयाधीन’ श्रेणी में रखे गए मतदाताओं को अपना पक्ष रखने का समय देना।
जवाबदेही स्थानीय स्तर के अधिकारियों की भूमिका की जांच करना जो गलत ढंग से नाम काट रहे हैं।

लोकतंत्र और भविष्य की चिंता

इस पूरे घटनाक्रम ने पश्चिम बंगाल की राजनीति को गरमा दिया है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का लगातार धरने पर बैठना यह संकेत देता है कि तृणमूल कांग्रेस इस मुद्दे को किसी भी स्थिति में नजरअंदाज नहीं करेगी। आने वाले दिनों में जब चुनाव आयोग की पूर्ण पीठ कोलकाता पहुंचेगी, तो यह विवाद और अधिक गहरा सकता है। चुनाव आयोग की प्रतिक्रिया पर ही यह निर्भर करेगा कि 2026 के विधानसभा चुनाव से पहले मतदाताओं का भरोसा बहाल हो पाता है या नहीं। आम जनता अब इस बात का इंतजार कर रही है कि क्या उनकी लोकतांत्रिक भागीदारी सुरक्षित रहेगी या फिर प्रशासनिक निर्णयों के कारण उन्हें अपने ही राज्य में मतदान से बाहर होना पड़ेगा।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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