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संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण आज से, लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ पेश होगा अविश्वास प्रस्ताव

नई दिल्ली। सोमवार 9 मार्च से भारतीय संसद के बजट सत्र का दूसरा चरण शुरू हो रहा है, जो 2 अप्रैल तक चलेगा। इस सत्र के शुरू होते ही सबसे बड़ा सियासी घमासान लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के खिलाफ विपक्ष द्वारा लाए जा रहे अविश्वास प्रस्ताव पर देखने को मिलेगा। विपक्षी सांसद मोहम्मद जावेद, के. सुरेश और डॉ. मल्लू रवि आज सदन के पटल पर इस प्रस्ताव को पेश करेंगे। इस बड़े राजनीतिक टकराव को देखते हुए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने अपने सांसदों के लिए 9 और 10 मार्च का व्हिप जारी किया है, जबकि कांग्रेस ने अपने सभी सांसदों को 9 से 11 मार्च तक सदन में अनिवार्य रूप से उपस्थित रहने के लिए तीन दिनों का कड़ा व्हिप जारी किया है।

सदन संचालन के नियम

जब लोकसभा अध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा होगी, तो संसदीय नियमों और स्थापित प्रक्रियाओं के मुताबिक ओम बिरला अध्यक्षीय आसन पर नहीं बैठेंगे। वे सत्तापक्ष के सदस्यों के साथ नीचे सदन में मौजूद रहेंगे। वहां से वे अपने ऊपर लगे आरोपों पर अपना पक्ष रख सकेंगे और जवाब दे सकेंगे। सामान्य तौर पर अध्यक्ष की अनुपस्थिति में लोकसभा उपाध्यक्ष सदन की कार्यवाही का संचालन करते हैं। हालांकि, मौजूदा लोकसभा में उपाध्यक्ष का पद खाली पड़ा है। ऐसी स्थिति में सदन की कार्यवाही का संचालन ‘पैनल ऑफ चेयरपर्सन’ (सभापतियों की तालिका) में शामिल सदस्य करेंगे। यह एक अनोखी स्थिति होगी जब स्वयं अध्यक्ष ही सदन में एक सदस्य के रूप में अपनी बात रखेंगे।

विपक्ष के गंभीर आरोप

इस अविश्वास प्रस्ताव की पृष्ठभूमि पिछले महीने बजट सत्र के पहले चरण के दौरान ही तैयार हो गई थी। विपक्ष ने लोकसभा के महासचिव को इस संबंध में एक लिखित नोटिस सौंपा था। विपक्षी दलों का आरोप है कि लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला निष्पक्ष होकर काम नहीं कर रहे हैं और उनके फैसले पक्षपातपूर्ण हैं। इस प्रस्ताव पर कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके और वामपंथी दलों समेत विपक्ष के कुल 118 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। विपक्ष का मानना है कि सदन में उनकी आवाज को दबाने का प्रयास किया जा रहा है, जिसके विरोध में यह कदम उठाना जरूरी हो गया था।

तृणमूल का रुख

इस राजनीतिक लड़ाई में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) ने भी विपक्ष के इस प्रस्ताव को अपना खुला समर्थन देने की घोषणा कर दी है। लोकसभा में तृणमूल कांग्रेस के पास 29 सांसद हैं। टीएमसी के शामिल होने से विपक्षी खेमे की ताकत और एकजुटता काफी बढ़ गई है। भले ही विपक्ष जानता है कि वह संख्या बल में पीछे है, लेकिन टीएमसी जैसी बड़ी क्षेत्रीय पार्टी का साथ मिलना सरकार विरोधी मोर्चे को नैतिक रूप से मजबूत बनाता है।

अविश्वास प्रस्ताव का गणित

लोकसभा नियमों के अनुसार, स्पीकर को हटाने का प्रस्ताव सदन में मौजूद और मतदान करने वाले सदस्यों के साधारण बहुमत (Simple Majority) से ही पारित किया जा सकता है। वर्तमान लोकसभा के आंकड़ों पर नजर डालें तो राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के पास स्पष्ट और मजबूत बहुमत है। अकेले एनडीए के पास ही 290 से अधिक सांसदों का भारी समर्थन मौजूद है। इस गणित से यह पूरी तरह साफ है कि विपक्ष का यह प्रस्ताव गिर जाएगा। लेकिन राजनीति में कई बार मकसद जीतना नहीं, बल्कि अपनी बात को पुरजोर तरीके से संसद के रिकॉर्ड पर दर्ज कराना होता है।

व्हिप का महत्व

संसद में जब भी कोई संवेदनशील वोटिंग या चर्चा होनी होती है, तो सभी दल अपने सदस्यों के लिए व्हिप जारी करते हैं। व्हिप एक ऐसा कानूनी और दलीय निर्देश होता है जिसका उल्लंघन करने पर किसी भी सांसद की सदस्यता जा सकती है। भाजपा और कांग्रेस दोनों ने अपने सांसदों को सदन में उपस्थित रहने का जो निर्देश दिया है, वह यह दिखाता है कि दोनों ही दल इस ऐतिहासिक बहस को लेकर कितने गंभीर हैं। कोई भी दल इस महत्वपूर्ण मौके पर अपने संख्या बल को कम नहीं होने देना चाहता।

संवैधानिक प्रावधान क्या हैं

भारतीय संविधान के अनुच्छेद 94 के तहत लोकसभा अध्यक्ष को पद से हटाने का विशेष प्रावधान दिया गया है। इसके लिए कम से कम 14 दिन पहले लिखित नोटिस देना अनिवार्य होता है, जिसका पालन विपक्ष ने पहले ही कर दिया है। भारतीय संसदीय इतिहास में ऐसे मौके बहुत कम आए हैं जब अध्यक्ष को हटाने के लिए औपचारिक प्रस्ताव लाया गया हो। यह टकराव यह साफ संकेत देता है कि बजट सत्र का यह दूसरा हिस्सा कामकाज से ज्यादा राजनीतिक घमासान और तीखी बहसों के नाम रहने वाला है।

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अंग भारत • रिपोर्टर

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