फुल्लीडुमर/बांका/अंगभारत। बांका जिले के फुल्लीडुमर प्रखंड अंतर्गत राता पंचायत का वार्ड संख्या 16, जिसे बदलाचक के नाम से जाना जाता है, इन दिनों भीषण जल संकट का सामना कर रहा है। यहाँ की स्थिति इतनी दयनीय है कि गर्मी की शुरुआत होते ही ग्रामीण बूंद-बूंद पानी के लिए तरस रहे हैं। गाँव में लगे सभी सार्वजनिक चापानल पिछले नौ महीनों से पूरी तरह खराब पड़े हैं और सरकार की महत्वाकांक्षी ‘हर घर नल जल योजना’ भी लंबे समय से दम तोड़ चुकी है। पानी की अनुपलब्धता के कारण ग्रामीणों को अपनी दिनचर्या चलाने के लिए कई किलोमीटर दूर जाने या दूसरों के निजी चापानल के भरोसे रहने को मजबूर होना पड़ रहा है।
संकट के मुख्य कारण
बदलाचक गांव की इस जल समस्या के पीछे प्रशासनिक लापरवाही सबसे बड़ा कारण बनकर उभरी है। ग्रामीणों के अनुसार, गांव में लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग (PHED) की ओर से केवल दो चापानल स्थापित किए गए थे। पहला चापानल बजरंगबली मंदिर के समीप और दूसरा घनश्याम यादव के आवास के पास है। इन दोनों ही जल स्रोतों के लंबे समय से खराब रहने के कारण गांव में पेयजल का कोई स्थायी विकल्प नहीं बचा है।
- विभाग की निष्क्रियता: अधिकारियों को दर्जनों बार लिखित और मौखिक सूचना देने के बाद भी मरम्मत के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया।
- नल जल योजना की विफलता: नल जल योजना के तहत बिछाई गई पाइपलाइन से पानी की आपूर्ति कई महीनों से ठप पड़ी है।
- अधिकारियों का उदासीन रवैया: ग्रामीण जब भी अपनी शिकायत लेकर पहुंचते हैं, उन्हें कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिलता।
ग्रामीणों की सरकारी गुहार
ग्रामीणों ने अपनी समस्या के समाधान के लिए प्रखंड विकास पदाधिकारी को एक औपचारिक आवेदन सौंपा है। आवेदन में स्पष्ट रूप से बताया गया है कि पूर्व में कई बार ग्रामीणों ने खुद चंदा इकट्ठा कर चापानल की मामूली मरम्मत कराई थी, लेकिन अब समस्या का स्तर इतना बढ़ चुका है कि बिना सरकारी तकनीकी सहायता के इसे ठीक करना संभव नहीं है। दुखद स्थिति यह है कि स्थानीय कनीय अभियंता (JE) से संपर्क करने की कोशिश करने पर भी वे फोन नहीं उठाते और प्रखंड कार्यालय के अन्य कर्मी भी इस गंभीर समस्या पर चुप्पी साधे बैठे हैं।
जल जीवन मिशन के तहत हर घर तक शुद्ध पेयजल पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है, लेकिन बदलाचक गांव की हकीकत इन दावों की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है।
अधिकारी का पक्ष
इस पूरी स्थिति के संबंध में कनीय अभियंता रामचरित्र मंडल ने अपनी प्रतिक्रिया दी है। रामचरित्र मंडल ने स्वीकार किया कि चापानल खराब हैं और उन्होंने यह आश्वासन दिया है कि जल्द ही मरम्मती दल को भेजकर इन्हें दुरुस्त कराया जाएगा। हालांकि, ग्रामीणों का कहना है कि वे ऐसे आश्वासन पहले भी सुन चुके हैं। यदि समय रहते जलापूर्ति बहाल नहीं की गई, तो भीषण गर्मी के महीनों में बदलाचक गांव के निवासियों का जीवन और भी अधिक कष्टदायक हो जाएगा। स्थानीय निवासियों का कहना है कि प्रशासनिक सुस्ती का खामियाजा केवल आम आदमी को भुगतना पड़ रहा है, जबकि पानी जैसी बुनियादी जरूरत के लिए किसी को भी दर-दर भटकने की स्थिति में नहीं होना चाहिए।








