सुपौल,अंग भारत। बिहार के सुपौल जिले में एलपीजी गैस सिलेंडर की भारी किल्लत और तीन दिनों से ऑनलाइन बुकिंग बंद होने से नाराज उपभोक्ताओं ने बुधवार को सुपौल शहर के अतिथि गृह के पास मुख्य सड़क को जाम कर जोरदार प्रदर्शन किया। रसोई गैस की अनियमित सप्लाई और गैस एजेंसियों के अड़ियल रवैये से परेशान लोग सुबह से ही लाइनों में खड़े थे, लेकिन एजेंसियों के शटर न खुलने और कोई संतोषजनक जवाब न मिलने के कारण उनका गुस्सा फूट पड़ा। इस हंगामे के बाद मौके पर पहुंचे एसडीएम मनोहर साहू और एसडीपीओ शिवेन्द्र अनुभवी ने लोगों को समझा-बुझाकर और जल्द से जल्द गैस आपूर्ति बहाल करने का भरोसा देकर जाम हटवाया।
किल्लत की असली वजह
सुपौल में अचानक आई इस गैस किल्लत के पीछे मुख्य रूप से डिजिटल सर्वर की विफलता और स्थानीय वितरकों की लापरवाही सामने आ रही है। पिछले तीन दिनों से एलपीजी बुकिंग का ऑनलाइन पोर्टल पूरी तरह ठप पड़ा है, जिससे ग्रामीण और शहरी क्षेत्र के लोग अपने घरों से सिलेंडर बुक नहीं कर पा रहे हैं। जब परेशान उपभोक्ता सीधे गैस एजेंसी के दफ्तर और गोदाम पर पहुंच रहे हैं, तो उन्हें वहां भी खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। एजेंसी संचालकों द्वारा सही जानकारी न देने और मनमाने ढंग से दफ्तर बंद रखने के कारण यह संकट और गहरा गया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस तकनीकी खराबी का फायदा उठाकर कुछ बिचौलिए सिलेंडरों की कालाबाजारी की कोशिश में जुटे हैं, जिससे आम जनता को ऊंचे दामों पर गैस खरीदने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है।
रसोई में मचा हाहाकार
इस गैस संकट का सबसे बुरा असर आम परिवारों के चूल्हे पर पड़ा है। सुपौल के कई घरों में पिछले दो-तीन दिनों से खाना नहीं बना है और लोग वैकल्पिक साधनों जैसे लकड़ी के चूल्हे या बिजली के इंडक्शन पर निर्भर होने को मजबूर हैं। प्रदर्शन में शामिल महिलाओं ने अपनी पीड़ा साझा करते हुए बताया कि वे सुबह चार बजे से ही घर का सारा काम छोड़कर गैस एजेंसी के बाहर लाइन में लग जाती हैं। इसके बावजूद दोपहर तक यह कहकर उन्हें वापस भेज दिया जाता है कि स्टॉक खत्म हो गया है। बच्चों की पढ़ाई, स्कूल के टिफिन से लेकर दफ्तर जाने वाले लोगों के समय पर भोजन मिलने तक की पूरी व्यवस्था इस किल्लत के कारण चरमरा गई है।
प्रशासन ने क्या किया?
सड़क जाम और बढ़ते हंगामे की खबर मिलते ही स्थानीय प्रशासन तुरंत हरकत में आया। एसडीएम मनोहर साहू, एसडीपीओ शिवेन्द्र अनुभवी और थानाध्यक्ष रामसेवक रावत भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने आक्रोशित लोगों से बात की और उनकी जायज मांगों को सुना। प्रशासन ने गैस एजेंसी मालिकों को सख्त हिदायत दी है कि वे अपनी कार्यप्रणाली में सुधार लाएं और ऑनलाइन बुकिंग सिस्टम की तकनीकी खामियों को तुरंत दूर करें। अधिकारियों के इस भरोसे और त्वरित कार्रवाई के आश्वासन के बाद ही लोगों ने सड़क से जाम हटाया और यातायात सामान्य हो सका।
उपभोक्ताओं के लिए सलाह
अगर आप भी इस तरह की गैस किल्लत या बुकिंग की समस्या से जूझ रहे हैं, तो कुछ जरूरी कदम उठाकर अपनी शिकायत सीधे उच्च अधिकारियों तक पहुंचा सकते हैं:
- टोल-फ्री नंबर का उपयोग: गैस आपूर्ति न होने या एजेंसी द्वारा परेशान किए जाने पर आप मुख्य तेल कंपनियों के टोल-फ्री नंबर 1800-233-3555 पर अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
- लिखित शिकायत दें: अपने क्षेत्र के जिला आपूर्ति पदाधिकारी (DSO) या एसडीएम को सीधे लिखित शिकायत सौंपें, जिससे एजेंसी पर कानूनी दबाव बनता है।
- डिजिटल रसीद मांगें: अगर कोई एजेंसी संचालक ऑफलाइन बुकिंग के बदले ज्यादा पैसे मांगता है, तो हमेशा रसीद की मांग करें और बिना वैध रसीद के अतिरिक्त भुगतान न करें।
संकट दूर करने के उपाय
इस तरह के बार-बार होने वाले संकटों को रोकने के लिए वितरण प्रणाली में बड़े बदलावों की जरूरत है। सबसे पहले, ऑनलाइन बुकिंग पोर्टल क्रैश होने की स्थिति में कंपनियों के पास एक मजबूत ऑफलाइन या एसएमएस-आधारित बैकअप सिस्टम होना चाहिए ताकि बुकिंग बाधित न हो। इसके साथ ही, हर गैस एजेंसी के बाहर एक डिस्प्ले बोर्ड होना चाहिए, जिस पर प्रतिदिन उपलब्ध सिलेंडरों की संख्या और वितरण की स्थिति साफ-साफ लिखी हो। स्थानीय प्रशासन को समय-समय पर गैस गोदामों का औचक निरीक्षण करना चाहिए ताकि अवैध भंडारण और कालाबाजारी पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके।








