रांची,अंग भारत। झारखंड विधानसभा बजट सत्र के 13वें दिन शुक्रवार को सदन की कार्यवाही उस समय गरमा गई, जब सत्ता पक्ष के विधायकों ने एलपीजी गैस की किल्लत और बढ़ती कीमतों को लेकर जोरदार प्रदर्शन किया। सदन की कार्यवाही शुरू होते ही सत्ता पक्ष के विधायकों ने अपनी सीटों से उठकर केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी शुरू कर दी, जिससे सदन का माहौल पूरी तरह बदल गया। यह मामला महज एक राजनीतिक बहस तक सीमित नहीं रहा, बल्कि आम आदमी की रसोई और बुनियादी सुविधाओं से जुड़ा एक बड़ा मुद्दा बन गया है, जिसके समाधान के लिए सदन में जमकर हंगामा हुआ।
सदन में तीखी बहस
सदन के भीतर सत्ता पक्ष के विधायकों ने गैस सिलेंडर की अनुपलब्धता को राज्य की एक बड़ी समस्या बताया। सत्ता पक्ष के विधायक प्रदीप यादव ने प्रदर्शन के दौरान अखबारों की कटिंग लहराते हुए दावा किया कि राज्य के विभिन्न इलाकों में गैस सिलेंडर के लिए लोग घंटों लंबी कतारों में खड़े रहने को मजबूर हैं। उन्होंने सदन को आगाह किया कि इस किल्लत का असर सिर्फ घरों तक ही सीमित नहीं है, बल्कि इससे सरकारी स्कूलों में संचालित मध्यान्ह भोजन (मिड-डे मील) की व्यवस्था भी बुरी तरह प्रभावित हो रही है। उन्होंने केंद्र सरकार की नीतियों को इस संकट का मुख्य कारण बताते हुए घेरा।
विपक्ष का कड़ा रुख
सत्ता पक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए नेता प्रतिपक्ष बाबूलाल मरांडी ने पूरी तरह से इनकार किया कि राज्य में गैस की कोई कमी है। बाबूलाल मरांडी ने स्पष्ट रूप से कहा कि यह संकट आपूर्ति की कमी नहीं, बल्कि राज्य सरकार के कुप्रबंधन का परिणाम है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि सत्ता पक्ष अपनी विफलताओं को छिपाने के लिए सदन में अनावश्यक रूप से शोर-शराबा कर रहा है। बाबूलाल मरांडी ने यह भी कहा कि जहां एक तरफ लोकसभा में कांग्रेस के नेता चर्चा से भागते नजर आते हैं, वहीं झारखंड विधानसभा में ठीक इसके विपरीत वे शोर मचाकर कार्यवाही बाधित कर रहे हैं।
सरयू राय की प्रतिक्रिया
इसी मुद्दे पर विधायक सरयू राय ने अपना पक्ष रखते हुए कहा कि एलपीजी सिलेंडर का मामला मूल रूप से वितरण प्रणाली (डिस्ट्रिब्यूशन सिस्टम) और बेहतर प्रबंधन से जुड़ा है। सरयू राय के अनुसार, इसे बेवजह राजनीति का अखाड़ा बनाना उचित नहीं है। उन्होंने संकेत दिया कि यदि तंत्र को सुदृढ़ किया जाए, तो जनता को हो रही परेशानी को काफी हद तक कम किया जा सकता है।
विधानसभा अध्यक्ष का हस्तक्षेप
हंगामे के बीच जब स्थिति अनियंत्रित होने लगी, तो विधानसभा अध्यक्ष डॉ रवींद्र नाथ महतो ने हस्तक्षेप किया। डॉ रवींद्र नाथ महतो ने सत्ता पक्ष और विपक्ष को संयम बरतने की सलाह दी। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि इस प्रश्न पर सदन का बहुमूल्य समय बर्बाद न किया जाए और इसे यहीं विराम देते हुए कार्यसूची के अनुसार आगे की कार्यवाही संचालित की जाए। अध्यक्ष के हस्तक्षेप के बाद ही सदन में कुछ समय के लिए शांति बनी और विधायी कार्य आगे बढ़ सके।
परिसर के बाहर प्रदर्शन
सदन के भीतर ही नहीं, बल्कि विधानसभा परिसर के बाहर भी सत्ता पक्ष के विधायकों का विरोध जारी रहा। विधायकों ने हाथों में बैनर और पोस्टर लेकर जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान शामिल पोस्टरों में बेहद आक्रामक राजनीतिक संदेश लिखे थे, जिनमें मुख्य रूप से केंद्र सरकार पर निशाना साधा गया था।
- पोस्टर की मुख्य बातें: प्रदर्शन में शामिल पोस्टरों में लिखा था कि “संसद से नरेंद्र मोदी गायब और देश से सिलेंडर गायब”।
- तस्वीरों का इस्तेमाल: कुछ पोस्टरों पर राजनीतिक व्यंग्य के तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की तस्वीरों का उपयोग किया गया था।
- महंगाई का मुद्दा: विधायकों का तर्क था कि घरेलू गैस के दाम गरीब और मध्यम वर्ग के परिवारों की जेब पर भारी पड़ रहे हैं, जिससे रसोई का बजट पूरी तरह बिगड़ चुका है।
आम जनता पर प्रभाव
गैस सिलेंडर की किल्लत और बढ़ी हुई कीमतों के कारण राज्य के गरीब परिवारों को सबसे ज्यादा मार झेलनी पड़ रही है। सत्ता पक्ष के विधायकों का कहना है कि लोग घंटों कतारों में खड़े होने के बाद भी खाली हाथ लौट रहे हैं। खाना पकाने की मूलभूत आवश्यकता के लिए इतनी जद्दोजहद करना, आम नागरिक के जीवन स्तर पर सीधे प्रहार जैसा है। इस प्रदर्शन के माध्यम से सरकार ने यह दिखाने की कोशिश की है कि केंद्र की नीतियां किस तरह से दूर-दराज के इलाकों में रहने वाले आम आदमी की बुनियादी जरूरतों को प्रभावित कर रही हैं।








