काठमांडू,अंग भारत। भारत के बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड से नेपाल को होने वाली बिजली आपूर्ति की नई दरें निर्धारित कर दी गई हैं। दोनों देशों के बीच हुई उच्च स्तरीय बैठक में आगामी एक वर्ष के लिए बिजली खरीद दरों पर सहमति बनी है, जिससे पड़ोसी देशों के बीच ऊर्जा सहयोग का एक नया अध्याय शुरू हुआ है। इस समझौते के तहत पिछले वर्ष की तुलना में बिजली की कीमतों में 1.5 प्रतिशत की मामूली वृद्धि की गई है, जो दोनों देशों के उपभोक्ताओं और आर्थिक हितों के बीच एक संतुलित तालमेल को दर्शाता है।
वार्ता के प्रमुख प्रतिनिधि
पोखरा में 12 और 13 मार्च को आयोजित यह महत्वपूर्ण बैठक द्विपक्षीय ऊर्जा कूटनीति के लिहाज से काफी अहम रही। इसमें दोनों देशों के शीर्ष अधिकारियों ने भाग लिया:
- हितेंद्र देव शाक्य: कार्यकारी निदेशक, नेपाल विद्युत प्राधिकरण (NEA)।
- विजय कुमार सिंह: बोर्ड सदस्य, सेंट्रल इलेक्ट्रिसिटी ऑथोरिटी (भारत)।
मूल्य निर्धारण पर चर्चा
वार्ता के दौरान भारत ने बिजली उत्पादन और उसके पारेषण (ट्रांसमिशन) में आई लागत में वृद्धि का हवाला देते हुए दरों में 5.5 प्रतिशत की बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा था। हालांकि, नेपाल विद्युत प्राधिकरण के कार्यकारी निदेशक हितेंद्र देव शाक्य ने बाजार सूचकांकों और भारतीय बिजली बाजार के वर्तमान रुझानों का हवाला देते हुए इस प्रस्ताव पर पुनर्विचार करने का तर्क दिया। अंततः, लंबी चर्चा के बाद दोनों पक्ष पिछले वर्ष की तरह ही 1.5 प्रतिशत की वृद्धि पर राजी हो गए।
नई बिजली दरें
समझौते के अनुसार, 132 केवी, 33 केवी और 11 केवी लाइनों के माध्यम से होने वाली आपूर्ति के लिए नई दरें इस प्रकार तय की गई हैं:
| प्रसारण लाइन (केवी) | नई दर (प्रति यूनिट रुपये में) |
|---|---|
| 132 केवी | 8.22 |
| 33 केवी | 8.91 |
| 11 केवी | 9.55 |
आपूर्ति और मांग
नेपाल की ऊर्जा स्थिति पर गौर करें तो वर्तमान में नेपाल विद्युत प्राधिकरण प्रतिदिन लगभग 12 से 14 हजार मेगावाट-घंटा बिजली का आयात कर रहा है। सूखे मौसम (ड्राई सीजन) के दौरान नेपाल में जलविद्युत परियोजनाओं से होने वाला उत्पादन घट जाता है, जिससे भारत से होने वाले आयात पर निर्भरता बढ़ जाती है। इस अवधि में मांग में और अधिक उछाल आने की संभावना है, जिसे देखते हुए यह समझौता काफी राहत भरा माना जा रहा है।
ऊर्जा सहयोग का भविष्य
दोनों पक्षों ने इस बात पर जोर दिया कि यह समझौता केवल एक व्यापारिक सौदा नहीं है, बल्कि यह क्षेत्रीय ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़ा कदम है। बैठक के दौरान यह भी तय किया गया कि भविष्य में बिजली खरीद दर की संरचना को लेकर अगले वर्ष फिर से विस्तृत समीक्षा की जाएगी। इस प्रक्रिया से यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि दोनों देशों के बीच ऊर्जा व्यापार पारदर्शी और लाभकारी बना रहे।
रणनीतिक लाभ
- नेपाल को सूखे के मौसम में बिजली की कमी से राहत मिलेगी।
- भारत और नेपाल के बीच दीर्घकालिक मैत्रीपूर्ण संबंध और प्रगाढ़ होंगे।
- पारेषण लाइनों के माध्यम से बिजली आपूर्ति में तकनीकी स्पष्टता आएगी।
- आगामी वर्ष के लिए ऊर्जा बाजार में स्थिरता बनी रहेगी।
भारत और नेपाल के बीच ऊर्जा का यह आदान-प्रदान दक्षिण एशिया में बिजली ग्रिड कनेक्टिविटी के लिए एक बेहतरीन उदाहरण है। यह न केवल औद्योगिक विकास को गति देता है, बल्कि नेपाल के आम नागरिकों के घरों में रोशनी सुनिश्चित करने में भी बिहार, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड के ग्रिड महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।








