रांची,अंग भारत। झारखंड विधानसभा में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की बढ़ती कीमतों के खिलाफ एक बेहद अनोखा और तीखा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। राज्य के स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी और कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की शुक्रवार को एक आम रिक्शे पर सवार होकर विधानसभा पहुंचे, जिसने वहां मौजूद हर किसी को हैरान कर दिया। इस प्रदर्शन का सीधा मकसद केंद्र सरकार की आर्थिक नीतियों और लगातार बढ़ती महंगाई पर वार करना था। मंत्रियों का कहना था कि ईंधन की बेलगाम कीमतों ने राज्य के गरीब और मध्यम वर्गीय परिवारों का जीना दूभर कर दिया है और इस मुद्दे पर अब चुप बैठना नामुमकिन है।
अनोखा विरोध प्रदर्शन
इस पूरे प्रदर्शन की सबसे दिलचस्प तस्वीर तब सामने आई जब स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी खुद रिक्शा चलाने लगे। उन्होंने पूरी ताकत से पैडल मारकर रिक्शे को विधानसभा परिसर के मुख्य द्वार तक पहुंचाया। वहीं, कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की रिक्शे की पीछे वाली सीट पर बैठी थीं। उनके हाथों में विरोध दर्ज कराती हुई तख्तियां थीं, जिन पर तीखे नारे लिखे थे। इन तख्तियों पर लिखा था— “पेट्रोल डीजल की मार, जनता हो रही लाचार” और “महंगी गैस-महंगा तेल, आम आदमी हुआ फ़ेल”। विधानसभा परिसर में घुसते ही पत्रकारों और सुरक्षाकर्मियों की भीड़ उन्हें देखने के लिए उमड़ पड़ी। मंत्रियों ने साफ किया कि यह कोई प्रतीकात्मक नौटंकी नहीं है, बल्कि देश के करोड़ों परेशान लोगों की आवाज है।
महंगाई की मार
झारखंड जैसे राज्य में, जहां की एक बड़ी आबादी गांवों में रहती है और कृषि पर निर्भर है, वहां महंगाई का असर बहुत गहरा होता है। स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने इस बात को पुरजोर तरीके से उठाया। उन्होंने पत्रकारों से बात करते हुए कहा कि झारखंड एक गरीब राज्य है और यहां के लोग पहले से ही कई आर्थिक चुनौतियों का सामना कर रहे हैं। उन्होंने कहा:
“झारखंड की गृहणियों और गरीब परिवारों को गैस के बढ़ते दामों से सबसे ज्यादा परेशानी हो रही है। जब रसोई गैस के दाम एक हजार रुपये के पार चले जाते हैं, तो गरीब के घर का चूल्हा बुझने की नौबत आ जाती है। इसी गंभीर संकट की ओर ध्यान खींचने के लिए हम आज रिक्शा से विधानसभा पहुंचे हैं।”
डीजल महंगा होने से केवल गाड़ियां ही नहीं रुकतीं, बल्कि खेतों में पानी चलाने वाले पंप का खर्च भी बढ़ जाता है। इससे अनाज और सब्जियों की कीमतें अपने आप आसमान छूने लगती हैं। यही वजह है कि इस महंगाई का सबसे पहला और सीधा हमला गरीब की थाली पर होता है।
बिगड़ती आर्थिक स्थिति
प्रदर्शन के दौरान कृषि मंत्री शिल्पी नेहा तिर्की ने देश के व्यापक आर्थिक ढांचे और नीतियों पर गंभीर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि देश की आर्थिक स्थिति को लेकर चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। अगर हालात को काबू में नहीं किया गया, तो देश की पूरी अर्थव्यवस्था ढह सकती है। शिल्पी नेहा तिर्की ने सरकार की आयात नीति की आलोचना करते हुए कहा कि भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बहुत बड़े पैमाने पर विदेशी आयात पर निर्भर है। लेकिन गलत आर्थिक नीतियों और करों के भारी बोझ के कारण घरेलू बाजार में आम लोगों के लिए तेल खरीदना एक सपना बनता जा रहा है। उन्होंने आगाह किया कि यदि समय रहते राहत नहीं दी गई, तो इसका असर सीधे तौर पर देश की उत्पादन क्षमता और रोजगार पर पड़ेगा।
ईंधन का गणित
ईंधन की बढ़ती कीमतों का चक्रवात पूरे बाजार को अपनी चपेट में लेता है। तेल की कीमतें बढ़ने से रोजमर्रा की चीजों पर कैसा असर पड़ता है, इसे नीचे दी गई तालिका से आसानी से समझा जा सकता है:
| प्रभावित क्षेत्र | महंगाई का मुख्य कारण | आम जनता पर सीधा असर |
|---|---|---|
| रसोई बजट | एलपीजी गैस सिलेंडर के दामों में लगातार बढ़ोतरी | मध्यम और गरीब परिवारों के मासिक बजट का बिगड़ना |
| कृषि लागत | ट्रैक्टर और सिंचाई पंपों के लिए डीजल का महंगा होना | फसल उगाने का खर्च बढ़ना, जिससे अनाज महंगा होता है |
| स्थानीय परिवहन | पेट्रोल और ऑटो ईंधन की कीमतें बढ़ना | दैनिक यात्रियों के जेब खर्च और माल ढुलाई के किराए में वृद्धि |
आगे की राह
विधानसभा परिसर में हुआ यह रिक्शा प्रदर्शन केवल एक दिन की हलचल बनकर शांत होने वाला नहीं दिख रहा है। मंत्रियों ने खुले तौर पर चेतावनी दी है कि वे महंगाई के इस गंभीर मुद्दे पर चुप नहीं बैठेंगे और आगे भी अलग-अलग तरीकों से अपना विरोध जारी रखेंगे। स्वास्थ्य मंत्री इरफान अंसारी ने कहा कि जब तक केंद्र सरकार टैक्स कम करके जनता को वास्तविक राहत नहीं देती, तब तक सड़क से लेकर सदन तक यह लड़ाई लड़ी जाएगी। इस तरह के विरोध प्रदर्शन यह याद दिलाते हैं कि जब नीतियां जनता के अनुकूल नहीं होतीं, तो जन प्रतिनिधियों को अपनी आवाज बुलंद करने के लिए जमीन पर उतरना ही पड़ता है।








